रांची: झारखंड की राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में विजयादशमी के मौके पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस बार राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाकर रावण के पुतले का दहन किया। कार्यक्रम में सोने की लंका, लेजर शो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आतिशबाजी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के विशाल पुतलों का दहन किया गया। आयोजन को देखने के लिए मैदान में लोगों की भीड़ जुटी। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे।
70 फीट का रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले भी जले
मोरहाबादी मैदान में इस बार रावण का 70 फीट ऊंचा पुतला लगाया गया था। वहीं, कुंभकर्ण का पुतला 65 फीट और मेघनाथ का पुतला 60 फीट ऊंचा था। विजयादशमी के अवसर पर तीनों पुतलों का दहन किया गया।
कार्यक्रम में सोने की लंका का दहन भी किया गया। इसके साथ लेजर शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आकर्षक आतिशबाजी का आयोजन हुआ। इन प्रस्तुतियों के बीच मैदान में दशहरा उत्सव का माहौल देखने को मिला।
मातृशोक के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बार मोरहाबादी मैदान के रावण दहन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उपलब्ध स्रोत सामग्री के अनुसार, मातृशोक के कारण उन्होंने कार्यक्रम से दूरी बनाई।
रांची के दूसरे इलाकों में भी हुआ रावण दहन
मोरहाबादी मैदान के अलावा अरगोड़ा, तुपुदाना, टाटीसिलवे और रांची के अन्य इलाकों में भी रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। अरगोड़ा में वाटरप्रूफ रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र रहा।
स्रोत सामग्री के अनुसार, रांची के नामकुम क्षेत्र के सिदरौल और अनगड़ा के गेतलसूद में 21 अक्टूबर को रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होने हैं।
बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
विजयादशमी पर रावण दहन को असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से अहंकार, बुराई और अन्याय का त्याग कर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
मोरहाबादी मैदान में पुतलों के दहन और आतिशबाजी के साथ दशहरा उत्सव संपन्न हुआ।












