पलामू: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के एक तीखे सियासी बयान ने पलामू की सियासत में जोरदार उबाल ला दिया है। भाजपा के तीखे विरोध के बाद अब कांग्रेस भी खुलकर अपने मंत्री के बचाव में सड़कों पर उतर आई है।
मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पलामू के कई प्रमुख इलाकों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह और जिला अध्यक्ष अमित तिवारी का पुतला फूंककर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
पलामू के चौक-चौराहों पर दोनों प्रमुख दलों के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। पहले भाजपा ने मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला, और अब कांग्रेस के पलटवार से पूरे जिले का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है।
मंच से दी गई टिप्पणी और फिर भड़का सियासी आक्रोश
मामले की शुरुआत वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के एक सार्वजनिक समारोह में दिए गए भाषण से हुई। मंत्री ने भाजपा की धार्मिक और जातिगत नीतियों को लेकर तीखी टिप्पणी की थी।
इस बयान के सामने आते ही भाजपा नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया। रविवार और सोमवार को पलामू के विभिन्न हिस्सों में वित्त मंत्री के खिलाफ जोरदार नारेबाजी हुई और उनके पुतले फूंके गए। भाजपा ने आरोप लगाया कि मंत्री का बयान समाज में विभाजन पैदा करने वाला है।
ईंट का जवाब पत्थर से: कांग्रेस ने प्रखंड स्तर पर शुरू किया पलटवार
भाजपा के दो दिनों के लगातार विरोध के बाद कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया कि वे बैकफुट पर नहीं रहेंगे।
पलामू के मेदिनीनगर, छतरपुर और नौडीहा बाजार जैसे अहम इलाकों में कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और भाजपा नेताओं के पुतले लेकर सड़कों पर उतर आए।
ग्राउंड से लाइव: किन इलाकों में दिखा सबसे ज्यादा असर?
- छतरपुर: प्रखंड अध्यक्ष मोहन जायसवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पुतला दहन किया।
- नौडीहा बाजार: प्रखंड अध्यक्ष संतोष पाठक की अगुवाई में बाजार क्षेत्र में विरोध मार्च निकाला गया और भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए गए।
- मेदिनीनगर: जिला मुख्यालय के आसपास कार्यकर्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए वित्त मंत्री के समर्थन में आवाज बुलंद की।
क्या पलामू से शुरू हुआ यह संग्राम पूरे राज्य में फैलेगा?
फिलहाल यह टकराव प्रखंड स्तर पर केंद्रित दिख रहा है, लेकिन दोनों खेमों की आक्रामकता साफ इशारा कर रही है कि यह विवाद जल्द थमने वाला नहीं है। स्थानीय चाय की दुकानों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक, हर जगह इसी सियासी घमासान की चर्चा है।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा इस पलटवार के बाद अपना आंदोलन जिला मुख्यालय तक ले जाती है, या कांग्रेस का यह आक्रामक रुख टकराव को राज्यव्यापी स्तर पर पहुंचा देगा।









