Godda | झारखंड के गोड्डा जिले में मतदाता सूची को लेकर बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पोड़ैयाहाट और महागामा विधानसभा क्षेत्रों के कुछ बूथों पर एक-एक पते पर दर्जनों से लेकर सैकड़ों मतदाताओं के नाम सामने आए हैं।
आंकड़े इतने हैरान करने वाले हैं कि पोड़ैयाहाट के एक ही मकान में 126 और महागामा के एक मकान में 69 वोटर दर्ज मिले हैं। इस असामान्य वृद्धि के सामने आते ही सियासी हलके से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक खलबली मच गई है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे मामले को चुनाव प्रक्रिया की शुचिता से जोड़ते हुए राज्य मुख्य चुनाव आयुक्त से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और फर्जी प्रविष्टियों को तत्काल हटाने की मांग की है।
गोड्डा का वोटर लिस्ट विवाद: क्या है पूरा मामला?
झारखंड भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने गोड्डा जिले की दो प्रमुख विधानसभा सीटों—16-पोड़ैयाहाट और 18-महागामा—की मतदाता सूची में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है।
बीजेपी का कहना है कि यह सामान्य जनसांख्यिकीय बदलाव नहीं, बल्कि संगठित स्तर पर की गई ‘असामान्य वृद्धि’ का संकेत है। पार्टी ने दुमका जिला मंत्री रघुनाथ रजक के मैदानी इनपुट का हवाला देते हुए साक्ष्य सहित सूची चुनाव आयोग को सौंपी है।
चौंकाने वाले आंकड़े: 17 घरों में 793, तो 32 मकानों में 842 वोटर
शिकायत पत्र में दर्ज जमीनी ब्योरा किसी भी चुनाव विश्लेषक को चौंकाने के लिए काफी है। बूथ स्तर पर जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक स्थिति कुछ इस प्रकार है:
1. पोड़ैयाहाट विधानसभा (बूथ संख्या 319)
- लोकेशन: प्रखंड-सरैयाहाट, उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बाबुडीह उर्दू (मतदान केंद्र संख्या-319)।
- हैरान करने वाला तथ्य: यहाँ महज एक मकान के पते पर 126 मतदाताओं के नाम पंजीकृत हैं।
- सामूहिक विसंगति: सिर्फ 17 मकानों में कुल 793 मतदाता दर्ज दिखाए गए हैं, यानी प्रति मकान औसतन 46 से अधिक वोटर।
2. महागामा विधानसभा क्षेत्र
- विभिन्न मतदान केंद्र: महागामा के कई बूथों पर एक ही आवासीय पते पर असामान्य जमावड़ा मिला है।
- एकल मकान: एक ही पते पर 69 वोटर सूचीबद्ध हैं।
- सामूहिक विसंगति: कुल 32 मकानों के पते पर 842 मतदाता दर्ज पाए गए हैं।
बीजेपी का कड़ा रुख: ‘भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन तुरंत हो’
बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र की नींव निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची पर टिकी होती है।
पार्टी ने आयोग के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- डोर-टू-डोर फिजिकल वेरिफिकेशन: विवादित मकानों में जाकर प्रशासनिक स्तर पर भौतिक सत्यापन कराया जाए कि क्या वास्तव में इतने लोग वहां निवास करते हैं।
- अभिलेखीय जांच (Documentary Audit): मतदाताओं के निवास प्रमाण, उम्र और पहचान से जुड़े मूल दस्तावेजों की स्क्रूटनी की जाए।
- फर्जी नाम हटाने पर विधिक कार्रवाई: यदि कोई नाम नियमों के विरुद्ध या दोहरी प्रविष्टि (डुप्लीकेट/अपात्र) के रूप में दर्ज पाया जाता है, तो उसे तत्काल हटाते हुए जिम्मेदार बीएलओ (BLO) व संबंधित कर्मियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर टिकीं निगाहें
इस शिकायत के बाद अब सबकी नजरें गोड्डा जिला निर्वाचन पदाधिकारी और राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर हैं। चुनावी आचार और नियमों के तहत इतनी बड़ी तादाद में एक ही पते पर मतदाताओं का नाम होना गंभीर प्रशासनिक चूक या संभावित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
यदि आयोग इन केंद्रों पर विशेष सघन जांच दल (स्पेशल ऑडिट टीम) भेजता है, तो कई अन्य बूथों की सूचियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं। चुनाव की तारीखों से पहले वोटर लिस्ट का यह विवाद झारखंड की सियासत में और गर्माने वाला है।








