Gumla | गुमला जिले के सिसई स्थित शिवनाथपुर में आयोजित एकीस पड़हा के कार्यक्रम में सामाजिक संगठन मिशन बदलाव ने दूसरे राज्यों में काम करने गए झारखंड के प्रवासी मजदूरों के लापता होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन के संयोजक भूषण भगत ने केंद्र और राज्य सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेने और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और व्यवस्था पर उठे सवाल
मिशन बदलाव के संयोजक भूषण भगत के अनुसार, झारखंड से हर साल रोजगार के लिए हजारों मजदूर पलायन करते हैं। दूसरे राज्यों में काम के दौरान मजदूरों के लापता होने, बंधक बनाए जाने और शोषण के मामले सामने आते रहते हैं।
संगठन का आरोप है कि पीड़ित परिवार न्याय के लिए थानों के चक्कर लगाते हैं, लेकिन शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं होती। इससे प्रभावित परिवारों में आक्रोश और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
मिशन बदलाव की 5 सूत्री मांगें
- समयबद्ध कार्रवाई: लापता मजदूरों की शिकायत मिलते ही तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू की जाए।
- अधिकारियों की जवाबदेही: शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा हो और लापरवाही पर दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
- अंतरराज्यीय समन्वय: झारखंड पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर खोज अभियान तेज करे।
- अनिवार्य पंजीकरण: श्रम विभाग प्रवासी मजदूरों के अनिवार्य पंजीकरण और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था को धरातल पर मजबूत करे।
- पीड़ित परिवारों को सहायता: परिजनों को केस की प्रगति की नियमित जानकारी, सरकारी सहायता, उचित मुआवजा और काउंसलिंग दी जाए।
संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से लगाई गुहार
भूषण भगत ने कहा कि मजदूरों की सुरक्षा केवल कागजी व्यवस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सरकार की सीधी जवाबदेही का विषय है। उन्होंने PMO India, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस पूरे मामले पर कड़े कदम उठाने की अपील की है।
संगठन ने मांग की है कि झारखंड सरकार प्रवासी मजदूरों के लिए हेल्पलाइन, कंट्रोल रूम और ट्रैकिंग सिस्टम को और अधिक सक्रिय करे। इस मामले में अब तक शासन या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।










