Ranchi। क्या कोई बच्चा कैलकुलेटर से भी तेज़ गणित के सवाल हल कर सकता है? क्या महज चंद सेकंड्स में हज़ारों की गणना उंगलियों पर संभव है? इसका जवाब आज रांची के खेलगांव में मिलने वाला है। रविवार, 25 जनवरी 2026 को खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में ‘एसआईपी प्रॉडिजी-2026’ का महाकुंभ सज रहा है। इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में झारखंड के कोने-कोने से आए 2200 नन्हे ‘मैथ्स विजार्ड्स’ अपनी दिमागी शक्ति का लोहा मनवाएंगे।
यह आयोजन केवल एक कॉम्पिटिशन नहीं, बल्कि उस संस्था का शक्ति प्रदर्शन है जो अब तक 5 बार लिम्का बुक ऑफ नेशनल रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुकी है। आज राज्य के 85 सेंटर्स के बच्चे जब अबैकस और मेंटल एरिथमेटिक के साथ मैदान में उतरेंगे, तो मुकाबला सिर्फ अंकों का नहीं, बल्कि गति और सटीकता (Speed and Accuracy) का होगा।
कैलकुलेटर फेल! 15,000 में से छंटकर आए ये ‘सुपर किड्स’
एसआईपी एकेडमी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश विक्टर ने प्रेस वार्ता में चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि आज जो 2200 बच्चे इस स्टेडियम में मौजूद हैं, वे 15,000 बच्चों की कड़ी स्क्रीनिंग के बाद यहां तक पहुंचे हैं। ये बच्चे न सिर्फ गणित हल करते हैं, बल्कि ‘ब्रेन जिम’ और मानसिक अंकगणित के जरिए अपने मस्तिष्क की क्षमता को उस स्तर पर ले गए हैं जहाँ आम इंसान का सोचना भी मुश्किल है।
झारखंड के इन जिलों से पहुंचे प्रतिभागी
इस महा-मुकाबले में झारखंड का प्रतिनिधित्व व्यापक है। रांची के अलावा जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, डाल्टनगंज, दुमका और लोहरदगा जैसे जिलों से बच्चे अपने माता-पिता के साथ रांची पहुंचे हैं।
- कुल प्रतिभागी: 2200 बच्चे
- कुल सेंटर्स: 85 एसआईपी लर्निंग सेंटर्स
- आयु वर्ग: 6 से 12 वर्ष
लिम्का रिकॉर्ड वाली संस्था का दावा: ‘5 गुना तेज होगा दिमाग’
एसआईपी (SIP) एकेडमी दुनिया की एकमात्र ऐसी संस्था होने का दावा करती है जो बच्चों के मानसिक कौशल में 5 गुना सुधार की गारंटी देती है। 20 देशों में फैले अपने नेटवर्क और 11 लाख बच्चों को प्रशिक्षित करने के अनुभव के साथ, यह संस्था आज झारखंड के बच्चों को वैश्विक मंच प्रदान कर रही है। आज के विजेता बच्चों को न केवल ट्रॉफी मिलेगी, बल्कि उन्हें ‘परफॉर्मेंस अवार्ड’ से नवाजा जाएगा, जो उनके भविष्य के करियर के लिए एक बड़ा माइलस्टोन साबित होगा।
ग्राउंड रिपोर्ट: रांची में क्यों है इतना उत्साह?
टाना भगत इंडोर स्टेडियम के बाहर सुबह से ही अभिभावकों और बच्चों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में जहाँ बच्चे स्मार्टफोन के आदी हो रहे हैं, वहां अबैकस और मेंटल मैथ्स जैसी पद्धतियां उनकी एकाग्रता (Concentration) और स्मरण शक्ति (Memory) को बढ़ाने में ‘रामबाण’ साबित हो रही हैं।
प्रतियोगिता के दौरान रीजनल हेड सुभजीत मल्लिक और स्टेट हेड इकबाल सिंह होरा ने बताया कि इस आयोजन का मकसद बच्चों के डर को खत्म कर उनमें आत्मविश्वास भरना है। प्रशासन ने भी सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि इतने बड़े स्तर पर हो रहे आयोजन में बच्चों को कोई असुविधा न हो।
आगे क्या? क्या झारखंड से निकलेगा अगला विश्व विजेता?
आज शाम तक ‘एसआईपी प्रॉडिजी-2026’ के विजेताओं के नाम घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या हमारा एजुकेशन सिस्टम इन ‘गॉड गिफ्टेड’ बच्चों की प्रतिभा को सहेज पाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि जो बच्चे आज खेलगांव में अपना जलवा दिखा रहे हैं, वे भविष्य के इंजीनियर, साइंटिस्ट और डेटा एनालिस्ट बनने की रेस में सबसे आगे हैं।










