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Ranchi

झारखंड पुलिस में प्रमोशन और ACP पर DGP सख्त, दिए कड़े आदेश

Ranchi | झारखंड पुलिस महकमे में लंबे समय से अटकी फाइलों और पुलिसकर्मियों के हकों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि जवानों के प्रमोशन और एसीपी-एमएसीपी जैसे लाभों में अब एक दिन की भी बेवजह देरी बर्दाश्त नहीं होगी।

रांची स्थित पुलिस मुख्यालय के सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में डीजीपी ने सभी जिलों के कप्तानों को दो टूक निर्देश जारी किए। आरक्षी से लेकर दारोगा रैंक तक के प्रमोशन और मालखाना प्रभार में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर सीधी जवाबदेही तय होगी।

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इस फरमान का सीधा असर राज्य के हजारों पुलिसकर्मियों के वेतन, पेंशन और करियर पर पड़ने वाला है। सालों से प्रमोशन और वित्तीय लाभ की राह देख रहे जवानों के लिए यह आदेश बड़ी राहत लेकर आया है।

सेवानिवृत्त होने वाले जवानों को प्राथमिकता: मुख्यालय का ‘डेडलाइन’ मॉडल

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने साफ निर्देश दिया कि जो पुलिसकर्मी अगले एक वर्ष के भीतर रिटायर होने वाले हैं, उनके एसीपी (ACP) और एमएसीपी (MACP) से जुड़े मामले सबसे पहले निपटाए जाएं।

इसके साथ ही, जो जवान पहले ही सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन उनके बकाए अटके हैं, उन्हें भी तत्काल क्लीयर किया जाएगा। ट्रेड चालक, आर्मोरर, आरक्षी और हवलदार संवर्ग के मामलों को जिला स्तर पर ही युद्धस्तर पर निपटाने और पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द मुख्यालय भेजने का अल्टीमेटम दिया गया है।

सिपाही से दारोगा तक का रास्ता साफ: प्रमोशन फाइलों पर जमी धूल हटेगी

विभाग में वर्षों से एक ही पद पर सेवा दे रहे जवानों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया अब रफ्तार पकड़ेगी। डीजीपी ने तीन मुख्य स्तरों पर तेजी लाने का आदेश दिया है:

  • कांस्टेबल से हवलदार
  • हवलदार से सहायक अवर निरीक्षक (ASI)
  • सहायक अवर निरीक्षक (ASI) से पुलिस अवर निरीक्षक (SI / दारोगा)

मुख्यालय ने निर्देश दिया कि पात्र पुलिसकर्मियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिले, ताकि फील्ड में तैनात जवानों का मनोबल न गिरे और प्रशासनिक कार्यक्षमता बनी रहे।

मालखाना और केस डायरी अटकाने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज

फील्ड से अक्सर यह शिकायत आती है कि अफसरों के तबादले के महीनों बाद भी केस का प्रभार और मालखाना हैंडओवर नहीं होता। इस पर डीजीपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिलों को ऐसे थानों और अधिकारियों को चिह्नित करने का आदेश दिया है।

स्थानांतरित हो चुके पुलिस अधिकारियों के पास यदि अब भी कांडों या मालखाना का प्रभार लंबित है, तो संबंधित जिलों के एसपी वर्तमान थाना प्रभारियों के साथ समन्वय बनाकर इसे विधिवत हैंडओवर कराएंगे। प्रभार अटका कर रखने वाले अफसरों की सूची तैयार की जा रही है।

50% रिक्तियों का रोस्टर क्लीयरेंस: 15 दिनों में मांगी पूरी रिपोर्ट

राज्य में पुलिस बल की कमी को दूर करने के लिए डीजीपी ने रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत पदों का रोस्टर क्लीयरेंस कराने का निर्देश दिया। सभी जिलों को विभिन्न संवर्गों में खाली पदों का ब्योरा 15 दिनों के भीतर मुख्यालय को सौंपना होगा।

साथ ही, जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाने के लिए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को नियमित रूप से ‘पुलिस सभा’ आयोजित करने को कहा गया है, ताकि जवान अपनी समस्याएं सीधे कप्तानों के सामने रख सकें।

सिस्टम में पारदर्शिता और अगला कदम

इस बैठक में एडीजी मुख्यालय मनोज कौशिक, आईजी मानवाधिकार पंकज कम्बोज, आईजी प्रोविजन पटेल मयूर कन्हैयालाल और डीआईजी जगुआर इंद्रजीत महथा सहित सभी जिलों के एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े थे।

अगला कदम: अगले 15 दिन झारखंड पुलिस के प्रशासनिक ढांचे के लिए बेहद अहम होंगे। जिलों को न केवल रिक्तियों का रोस्टर भेजना है, बल्कि मालखाना प्रभार और प्रमोशन की लंबित सूचियों पर की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट भी मुख्यालय को सौंपनी होगी। यह कदम दिखाता है कि पुलिस महकमा अब पुरानी लालफीताशाही छोड़ पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध कार्यप्रणाली की ओर बढ़ रहा है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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