झारखंड कांग्रेस में छिड़ा ‘पुत्रमोह’ का महायुद्ध: मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा? जानें पर्दे के पीछे का पूरा सच!

झारखंड कांग्रेस में छिड़ा 'पुत्रमोह' का महायुद्ध: मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा? जानें पर्दे के पीछे का पूरा सच!

Ranchi | झारखंड की सियासत में इन दिनों इरफान अंसारी के बयानों से ज्यादा शोर एक ‘नैतिकता’ की दुहाई देने वाले मंत्री के बागी सुरों का है। झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे से कद्दावर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जो नेता कल तक बीजेपी से टिकट न मिलने पर कांग्रेस का दामन थामने और मंत्री पद मिलने तक ‘अनुशासन’ की बात करता था, वह अचानक इतना हमलावर क्यों हो गया? क्या यह वास्तव में संगठन की चिंता है या फिर पर्दे के पीछे ‘पुत्रमोह’ की कहानी लिखी जा रही है?

झारखंड कांग्रेस में हड़कंप: आखिर क्या है विवाद की असली जड़?

राधाकृष्ण किशोर, जिन्हें झारखंड की राजनीति का बेहद मंझा हुआ खिलाड़ी माना जाता है, आजकल सोशल मीडिया पर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व और फैसलों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि किशोर की नाराजगी का केंद्र बिंदु नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश हैं। 2024 के चुनाव से ठीक पहले आलाकमान ने एक मजबूत ‘कुरमी चेहरा’ मानकर कमलेश को कमान सौंपी थी, लेकिन अब किशोर उनके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह लड़ाई विचारधारा की नहीं, बल्कि ‘विरासत’ की है। राधाकृष्ण किशोर अपने बेटे प्रशांत किशोर को अपनी राजनीतिक जमीन सौंपना चाहते हैं, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस पर पानी फेर दिया है।

झारखंड कांग्रेस में हड़कंप: आखिर क्या है विवाद की असली जड़?

नैतिकता की चादर और बेटे की विवादित डिग्री: क्या फँस गए मंत्री जी?

राधाकृष्ण किशोर अक्सर नैतिकता और सिद्धांतों की बात करते हैं, लेकिन उनके बेटे प्रशांत किशोर हाल ही में एक बड़े विवाद में घिर गए। रांची यूनिवर्सिटी से ‘नियम-कायदों को ताक पर रखकर’ डिग्री लेने का मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, जिसके बाद किशोर परिवार की खूब किरकिरी हुई। जिस बेटे को वह अपना उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी कर रहे थे, उसी की साख पर सवाल उठने लगे।

जानकारों का मानना है कि अपनी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने और बेटे को संगठन में स्थापित करने के लिए मंत्री जी ने ‘दबाव की राजनीति’ का रास्ता चुना है।

24 घंटे में इस्तीफा और ‘विद्रोह’ का नया चैप्टर

विवाद तब और गहरा गया जब नई प्रदेश कमेटी में प्रशांत किशोर को सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि नियुक्ति के महज 24 घंटे के भीतर ही उनसे इस्तीफा दिला दिया गया।

  • सवाल: क्या पद छोटा था इसलिए इस्तीफा हुआ?
  • दावा: क्या मंत्री जी बेटे के लिए प्रदेश संगठन में कोई बड़ी और ‘सुरक्षित’ कुर्सी चाहते हैं?
24 घंटे में इस्तीफा और 'विद्रोह' का नया चैप्टर

कांग्रेस आलाकमान की चुप्पी और आगे की राह

रांची की सड़कों से लेकर दिल्ली के दरबार तक इस ‘गृहयुद्ध’ की गूँज सुनाई दे रही है। फिलहाल आलाकमान इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन अंदरूनी कलह झारखंड कांग्रेस को अंदर से खोखला कर रही है। अगर जल्द ही इस ‘पुत्रमोह’ और ‘पद’ की जंग को नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में पार्टी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है।

प्रशासनिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राधाकृष्ण किशोर का यह रवैया उनकी ‘नैतिकता’ वाली छवि पर बड़ा दाग लगा सकता है। अब देखना यह है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अनुशासन का डंडा चलाता है या फिर मंत्री जी के दबाव के आगे झुक जाता है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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