हजारीबाग : हजारीबाग के डेमोटाँड़ में विजयादशमी के मौके पर आयोजित दशहरा समारोह में रावण दहन के साथ-साथ एक अनोखा प्रतीकात्मक विरोध देखने को मिला। आयोजकों ने पारंपरिक रावण के पुतले के साथ एक प्रतीकात्मक ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टा) का भी दहन किया। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं के अनुसार, यह प्रतीकात्मक दहन देश के भीतर और बाहर सक्रिय कथित ‘राष्ट्रविरोधी मानसिकता’ के विरोध में किया गया।
देश विरोधी साजिशों को कड़ा संदेश: सांसद मनीष जायसवाल
दशहरा कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने जनसमूह को संबोधित करते हुए देश को अस्थिर करने का प्रयास करने वाले तत्वों पर तीखा हमला बोला।
सांसद मनीष जायसवाल ने कहा:
“रावण तो सदियों से जल रहा है और जलता रहेगा, लेकिन ये जो कुछ लोग श्रीलंका, बांग्लादेश और यूरोप वाली स्क्रिप्ट भारत में चलाना चाहते हैं… वो भूल गए कि ये भारत है बाबू!”
उन्होंने आगे कहा कि बाहर की ताकतों से खाद-पानी लेकर देश में अशांति और विभाजन फैलाने की कोशिश करने वालों के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे, क्योंकि देश की जनता अब ऐसी साजिशों को भली-भांति समझती है और उन्हें आसानी से भड़काया नहीं जा सकता।

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‘कॉकरोच दहन’ का प्रतीकात्मक संदर्भ
कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयानों के अनुसार, यह प्रतीकात्मक ‘कॉकरोच’ उन ताकतों का प्रतीक था, जिन पर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों और कथित विदेशी टूल्स के सहारे देश के भीतर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया जाता रहा है। आयोजकों का संदेश था कि जिस प्रकार दशहरा बुराई पर अच्छाई और अहंकार पर सत्य की विजय का पर्व है, उसी प्रकार देश में अशांति फैलाने वाली प्रवृत्तियों का भी दहन जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान यह बात भी रेखांकित की गई कि जब वैश्विक स्तर पर कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं संकट से जूझ रही हैं, तब भारत अपनी स्थिरता बनाए रखते हुए आगे बढ़ रहा है और आम नागरिक देश को अस्थिर करने वाले किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे।











