एम्स्टर्डम/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 5 देशों के बेहद महत्वपूर्ण विदेशी दौरे के दूसरे चरण में नीदरलैंड पहुंच चुके हैं। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के विशेष निमंत्रण पर हो रही यह आधिकारिक यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद संवेदनशील मोड़ पर हो रही है। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान पीएम मोदी नीदरलैंड के राजा महामहिम विलेम-अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा से खास मुलाकात करेंगे, जिसके बाद प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ उनकी द्विपक्षीय शिखर वार्ता होगी।
क्या है इस दौरे का मुख्य एजेंडा?
यूरोप के सबसे ताकतवर व्यापारिक केंद्रों में से एक, नीदरलैंड में पीएम मोदी का यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं है। ग्राउंड जीरो से मिल रही खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन, और समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) को लेकर कई बड़े समझौतों पर मुहर लग सकती है।
भारत इस समय वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के एकाधिकार को तोड़ना चाहता है, और नीदरलैंड की ASML जैसी कंपनियां माइक्रोचिप निर्माण में दुनिया की रीढ़ हैं। ऐसे में पीएम मोदी की यह रणनीतिक हलचल बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक बेचैनी बढ़ाने के लिए काफी है।
शाही महल में मुलाकात और डच पीएम के साथ ‘सीक्रेट’ टेबल टॉक
पीएम मोदी एम्स्टर्डम में शाही महल पहुंचेंगे, जहां राजा विलेम-अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा उनका पारंपरिक स्वागत करेंगे। राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय राजशाही द्वारा भारत को दिया जा रहा यह सम्मान वैश्विक पटल पर नई दिल्ली की बढ़ती धक को दिखाता है।
इसके तुरंत बाद, पीएम मोदी और डच समकक्ष रॉब जेटेन के बीच वन-टू-वन बैठक होगी। इस बैठक में मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर फोकस रहने वाला है:
- सेमीकंडक्टर और हाई-टेक निवेश: भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए डच कंपनियों को न्योता।
- जल प्रबंधन (Water Management): नीदरलैंड की बाढ़ नियंत्रण तकनीक से भारत के बाढ़ प्रभावित राज्यों (जैसे बिहार और असम) के लिए परमानेंट सॉल्यूशन तलाशना।
- इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा: हिंद महासागर में चीन की दादागीरी को रोकने के लिए यूरोपीय देशों का साथ पाना।
आम आदमी और देश पर क्या होगा इस यात्रा का सीधा असर?
एक्सपर्ट कमेंट: “नीदरलैंड केवल एक खूबसूरत देश नहीं है, बल्कि यह यूरोप का प्रवेश द्वार (Gateway to Europe) है। भारत का सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट इसी रास्ते से होता है। अगर यहां बात बनती है, तो भारत के युवाओं के लिए हाई-टेक सेक्टर में नौकरियों की बाढ़ आ सकती है।”
इस दौरे का सीधा असर भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ेगा। अगर डच तकनीक भारत आती है, तो आने वाले समय में मोबाइल, लैपटॉप और गाड़ियां सस्ती हो सकती हैं क्योंकि चिप इंपोर्ट पर हमारी निर्भरता घटेगी। साथ ही, कृषि और डेयरी सेक्टर में नीदरलैंड की आधुनिक तकनीक भारतीय किसानों की आय दोगुनी करने में मददगार साबित हो सकती है।
आगे क्या हो सकता है और सिस्टम का अगला कदम?
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के बाद दोनों देश एक ‘ज्वाइंट डिक्लेरेशन’ (साझा बयान) जारी करेंगे। देखना यह होगा कि क्या यूक्रेन संकट और रूस के साथ भारत के रिश्तों पर नीदरलैंड अपना रुख नरम करता है या नहीं। भारत की कोशिश होगी कि यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की राह में नीदरलैंड उसका सबसे बड़ा वकील बने। अगले 24 घंटे इस बात की दिशा तय करेंगे कि भारत-यूरोप कूटनीति का ऊंट किस करवट बैठता है।
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