Ranchi | झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन बुधवार को एक ऐसे मुद्दे ने सियासी पारा गरमा दिया है, जिसने सीधे तौर पर राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य को झकझोर दिया है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के नाम पर चल रहे ‘कमीशन और शोषण’ के खेल को उजागर किया है।
सदन से लेकर सड़क तक यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सरकारी नौकरियों में आउटसोर्सिंग एजेंसियां युवाओं से मोटी रकम वसूल रही हैं? विधायक ने साफ तौर पर आरोप लगाया है कि थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नियुक्तियों में पारदर्शी सिस्टम के बजाय ‘पैसों का लेन-देन’ हावी है।
आउटसोर्सिंग या युवाओं का शोषण?
विधायक प्रदीप यादव ने मीडिया से बातचीत में गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य के लगभग सभी विभागों में अब मैनपावर की आपूर्ति आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियां नौजवानों को नौकरी देने के बदले उनसे मोटी रकम मांग रही हैं। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि झारखंड के उन गरीब युवाओं के साथ धोखा है जो मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
‘मैन पावर प्रोक्योरमेंट मैन्युअल 2025’ पर उठे सवाल
झारखंड सरकार ने हाल ही में आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए “मैन पावर प्रोक्योरमेंट मैन्युअल 2025” लागू किया है। लेकिन प्रदीप यादव का दावा है कि यह कागजी शेर साबित हो रहा है।
मैन्युअल की बड़ी कमियां:
- कागजों पर 100% स्थानीयता: नियम कहता है कि शत-प्रतिशत बहाली झारखंड के युवाओं की होगी, लेकिन जमीन पर इसका पालन संदिग्ध है।
- परीक्षा और इंटरव्यू का दिखावा: तीन लोगों का पैनल बनाकर चयन करने का प्रावधान है, जिसे विधायक ने अव्यावहारिक करार दिया है।
- मंत्रियों की चुप्पी: प्रदीप यादव ने तंज कसते हुए कहा कि खुद सरकार के मंत्री भी दबी जुबान में शोषण की बात स्वीकारते हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
आखिर क्यों बेबस है राज्य का युवा?
झारखंड में कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग पर बहाल कर्मियों के स्थायीकरण की प्रक्रिया कछुआ गति से चल रही है। ऐसे में नए युवाओं के पास इन एजेंसियों के पास जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
क्या होगा असर? अगर सरकार ने इन एजेंसियों पर तुरंत नकेल नहीं कसी, तो राज्य में ‘जॉब सिंडिकेट’ और मजबूत हो जाएगा। इससे न केवल टैलेंट का नुकसान होगा, बल्कि सरकार की छवि पर भी भ्रष्टाचार का दाग गहरा सकता है।
“अस्थायी बहाली में भी अगर युवाओं का शोषण होगा, तो वे किसके पास जाएंगे? सरकार को इन काली सूची वाली कंपनियों पर नकेल कसनी ही होगी।” — प्रदीप यादव, नेता कांग्रेस विधायक दल
प्रदीप यादव द्वारा सदन में इस मुद्दे को उठाने के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है। क्या सरकार इन एजेंसियों का ऑडिट कराएगी? बजट सत्र के समापन पर युवाओं की नजरें अब मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर ‘मैन पावर प्रोक्योरमेंट मैन्युअल 2025’ को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।









