रांची | झारखंड की राजधानी रांची आज से वैश्विक तकनीक और नवाचार का केंद्र बनने जा रही है। राम टहल चौधरी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RTCIT) द्वारा आयोजित ‘चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस – एडवांस्ड कम्प्यूटिंग एंड एप्लीकेशन्स (ICACA-2026)’ का शंखनाद आज यानी 6 मार्च को होने जा रहा है। दो दिनों तक चलने वाले इस महाकुंभ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लेकर साइबर सिक्योरिटी तक के भविष्य पर मंथन होगा।
‘विकसित भारत 2047’ की नींव रखेगा यह सम्मेलन
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केवल शोध पत्र पढ़ना नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को तकनीकी पंख देना है। उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर का आयोजन झारखंड में तकनीकी निवेश और शोध की नई राहें खोलेगा।
ग्लोबल एक्सपर्ट्स का जमावड़ा: मकाउट से लेकर मलेशिया तक की भागीदारी
सम्मेलन की भव्यता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें न केवल भारत, बल्कि मलेशिया और अमेरिका जैसे देशों के दिग्गज वैज्ञानिक भी शामिल हो रहे हैं।
इन प्रमुख वक्ताओं पर रहेगी नज़र:
- प्रो. एन. सी. अर्जुमन: मल्टीमीडिया यूनिवर्सिटी, मलेशिया।
- डॉ. हेमंत सोनी: प्रोडक्ट लीडर (टेलीकॉम), USA।
- प्रो. देबासिस डे: मकाउट, कोलकाता।
- प्रो. (डॉ.) जे. के. मंडल: सम्मेलन अध्यक्ष और प्रसिद्ध शिक्षाविद।
4 बड़े सत्र: आम आदमी और देश की सुरक्षा पर क्या होगा असर?
ICACA-2026 में चार समानांतर तकनीकी सत्र चलेंगे, जिनका सीधा संबंध हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से है:
- सस्टेनेबल कम्प्यूटिंग: कैसे तकनीक पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना काम करे।
- साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल फोरेंसिक: बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और डेटा चोरी को रोकने के अचूक तरीके।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): कृषि, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र में AI का क्रांतिकारी इस्तेमाल।
- सिग्नल प्रोसेसिंग: 5G/6G और बेहतर संचार तकनीक पर मंथन।
ग्राउंड रिपोर्ट नोट: सम्मेलन में चयनित शोध पत्रों का प्रकाशन विश्व प्रसिद्ध ‘स्प्रिंगर’ (Springer) में होगा, जो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद विश्वसनीय और प्रतिष्ठित बनाता है।
झारखंड के युवाओं के लिए ‘गोल्डन चांस’
झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (JUT) के सहयोग से हो रहे इस आयोजन में राज्य के छात्रों को वैश्विक वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का मौका मिलेगा। RTCIT के अध्यक्ष और पूर्व सांसद श्री रामटहल चौधरी ने बताया कि यह आयोजन राज्य की वैज्ञानिक क्षमता को विश्व पटल पर रखने की एक कोशिश है।
सम्मेलन का समापन 7 मार्च को होगा, जहाँ उत्कृष्ट शोध पत्रों को सम्मानित किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि इस सम्मेलन से निकले निष्कर्षों का इस्तेमाल ISRO और DRDO जैसे संस्थानों में भविष्य के रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान को मजबूती देने में किया जा सकता है।










