झारखंड निकाय चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव: क्या हेमंत सरकार की ‘साजिश’ पर भारी पड़ेगा भगवा कार्यकर्ताओं का संकल्प?

झारखंड निकाय चुनाव में भाजपा का बड़ा दांव: क्या हेमंत सरकार की ‘साजिश’ पर भारी पड़ेगा भगवा कार्यकर्ताओं का संकल्प?

Ranchi | झारखंड की सियासत में निकाय चुनाव को लेकर हलचल अब अपने चरम पर है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई एक हाई-प्रोफाइल बैठक ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट कर दिया है कि भले ही सरकार ने चुनाव को दलीय आधार पर न कराने का फैसला लिया हो, लेकिन भाजपा जमीन पर ‘राष्ट्रवादी और विकासपरक’ चेहरों के पीछे अपनी पूरी ताकत झोंक देगी।

भाजपा का आरोप है कि हेमंत सरकार हार के डर से निकाय चुनाव को प्रशासनिक तरीके से प्रभावित करने की साजिश रच रही है, जिसे नाकाम करने के लिए कार्यकर्ताओं को ‘ग्राउंड जीरो’ पर उतरने का निर्देश दिया गया है।

निकाय चुनाव का रण: कोर्ट की सख्ती और भाजपा का आंदोलन रंग लाया

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि आज राज्य के नगर निकायों में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। अधिकारियों का बोलबाला है और आम जनता अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए दर-दर भटक रही है।

“यह चुनाव भाजपा के सड़क से सदन तक किए गए संघर्ष और कोर्ट की सख्ती का नतीजा है। हेमंत सरकार तो चुनाव कराना ही नहीं चाहती थी।” – आदित्य साहू

उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसे उम्मीदवारों को जिताने के लिए कमर कस लें जो सेवाभावी हों और जिनकी सोच में राष्ट्रवाद प्राथमिकता पर हो। साहू ने ‘बैलेट पेपर’ से चुनाव कराने के सरकार के फैसले को धांधली की एक बड़ी साजिश करार दिया।

भ्रष्टाचार मुक्त विकास ही एकमात्र एजेंडा: बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने बैठक में विकास के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि झारखंड में फिलहाल ‘विकास शून्यता’ की स्थिति है। निकायों में भ्रष्टाचार चरम पर है और बिना ‘लेन-देन’ के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती।

मरांडी के संबोधन की 3 बड़ी बातें:

  1. तुष्टिकरण बनाम विकास: मरांडी ने साफ कहा कि हमें ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन देना है जो तुष्टिकरण की राजनीति से दूर रहें।
  2. भ्रष्टाचार पर प्रहार: निकाय क्षेत्रों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना भाजपा की प्राथमिकता होगी।
  3. चेहरा पहचानिए: पार्टी उन चेहरों को प्रमोट करेगी जिनकी छवि साफ और जनता के प्रति समर्पित हो।

दिग्गज जुटे, रणनीतियों पर लगी मुहर

इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में न केवल रणनीति बनी, बल्कि एकजुटता का संदेश भी दिया गया। बैठक में संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश और प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद समेत कई दिग्गज शामिल हुए।

जानकारों का मानना है कि भाजपा ने दलीय आधार पर चुनाव न होने की स्थिति में भी ‘परोक्ष’ रूप से मैदान मारने की पूरी तैयारी कर ली है। पार्टी का फोकस शहरी मतदाताओं और उन इलाकों पर है जहाँ विकास कार्य ठप पड़े हैं।

आगे क्या होगा: प्रशासन बनाम कार्यकर्ता?

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान कब करता है। भाजपा ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह चुनावी मैदान खाली नहीं छोड़ने वाली।

आम आदमी पर असर: अगर भाजपा समर्थित ‘राष्ट्रवादी’ प्रत्याशी जीतते हैं, तो निकायों में सरकार विरोधी स्वर और तेज हो सकते हैं। वहीं, हेमंत सरकार के लिए यह चुनाव 2024 के सेमीफाइनल की तरह होगा। क्या जनता प्रशासनिक तंत्र से त्रस्त होकर भाजपा के ‘संकल्प’ को चुनेगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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