करम पूजा हरमू 2025 का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। राजधानी रांची के हरमू स्थित देशावली सरना सह अखड़ा पूजा स्थल पर यह पर्व पूरे उल्लास और परंपरा के साथ मनाया जाएगा। आयोजकों ने विस्तृत रूपरेखा साझा की है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान से लेकर सांस्कृतिक गतिविधियाँ शामिल होंगी।
मुख्य तिथियाँ और अनुष्ठान
करम पर्व की शुरुआत 26 अगस्त 2025 को सुबह 4 बजे जावा उठाने के साथ होगी। इसके बाद 31 अगस्त और 1 सितंबर को शाम 6:30 बजे जावा जगाने का आयोजन होगा। 2 सितंबर को शाम 7 बजे जय सरना के नारे गूंजेंगे और अखड़ा में सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित होगी। इसी दिन सुबह 10 बजे देशावली पूजा भी संपन्न की जाएगी।
3 सितंबर 2025 को दोपहर 1 बजे करम काटने के लिए परंपरागत नाच-गान के साथ ग्रामीण प्रस्थान करेंगे। शाम 5:30 बजे करम डाल का गाँव में स्वागत किया जाएगा। इसके बाद अखड़ा लीपन, गड्ढा खोदना और गाँव में तेल इकट्ठा करने की परंपरा निभाई जाएगी। रात 8 बजे अखड़ा में करम डाल के पास दीये जलाए जाएंगे।
इसके साथ ही रात 9 से 10 बजे के बीच मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में पूजा-अर्चना, करमा-धरमा की कहानी और नेग कार्यक्रम होंगे। रात 10:30 बजे से पाहन एवं अन्य अतिथियों द्वारा सद्वचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
सांस्कृतिक रंग और करमा नाच
4 सितंबर 2025 का दिन पूरी तरह से करमा नाच-गान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नाम रहेगा। बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे और सामूहिक नृत्य से गाँव का माहौल उत्सवधर्मी बनेगा। वहीं 5 सितंबर 2025 को सुबह 5 बजे से 11 बजे तक करम विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न होगी।

आयोजन स्थल और पदाधिकारी
पूरे कार्यक्रम का आयोजन देशावली सरना सह अखड़ा पूजा स्थल, हरमू, राँची में किया जाएगा। आयोजन समिति में अध्यक्ष विक्की कच्छप और सचिव सन्नी संतोष तिग्गा शामिल हैं। अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सूची कार्यपत्र में उपलब्ध है। आयोजकों ने ग्रामवासियों से सहयोग की अपील की है ताकि पर्व को सफल बनाया जा सके।
करम पर्व का महत्त्व
करम पूजा भादो शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है और इसका गहरा संबंध खेती, वर्षा, प्रकृति और संस्कृति से जुड़ा है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि समाज में एकजुटता और कर्म-धर्म के महत्व का संदेश भी देता है। करमा-धरमा की कहानियाँ जीवन में अच्छाई, संघर्ष और समाधान की शिक्षा प्रदान करती हैं।
विशेष संदेश और नारे
आयोजन समिति ने सभी ग्रामवासियों को करम पूजा की शुभकामनाएँ दी हैं और पर्व की सफलता के लिए एकजुट होकर सहयोग की अपील की है। पूरे आयोजन में “जय चाला”, “जय धरम” और “जय सरना” जैसे नारों से वातावरण गूंजता रहेगा।
हरमू का यह करम पूजा पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और सामूहिक जीवन मूल्यों का उत्सव है।











