रांची: छात्रों के 26 दिनों तक चले आंदोलन, ताला तोड़ने और जिला प्रशासन द्वारा सीलिंग की कार्रवाई के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम एक बार फिर चर्चा में है। ताजा घटनाक्रम में रांची नगर निगम ने इस स्टेडियम परिसर के आस-पास पटाखा बिक्री के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) और किसी भी प्रकार की अनुमति देने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।
निगम की संपत्ति, नहीं बनेगा कोई अस्थायी शेड
रांची नगर निगम के प्रवर्तन कोषांग (Enforcement Cell) की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को जारी आम सूचना के अनुसार, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम नगर निगम की संपत्ति है और यह उसके पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन है। सहायक नगर आयुक्त द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि परिसर में पटाखा बिक्री के लिए किसी भी व्यक्ति या विक्रेता को कोई NOC या अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी। अस्थायी लाइसेंस चाहने वाले सभी विक्रेताओं को ताकीद की गई है कि वे वहां किसी भी तरह का अस्थायी शेड, दुकान या ढांचा खड़ा न करें और न ही बिक्री से जुड़ी कोई तैयारी शुरू करें। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ झारखण्ड नगरपालिका अधिनियम, 2011 के तहत कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पृष्ठभूमि: आंदोलन से लेकर मेयर-प्रशासन के टकराव और सीलिंग तक का घटनाक्रम
गौरतलब है कि कुछ समय पहले जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन लगातार 26 दिनों तक चला था। आंदोलन समाप्त होने के बाद रांची जिला प्रशासन ने स्टेडियम के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया था।
इसके बाद स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब रांची नगर निगम की मेयर रोशनी खलखो ने मौके पर पहुंचकर ताला तोड़ दिया और स्टेडियम को मॉर्निंग वॉकर्स के लिए खोल दिया था। मेयर के इस कदम से जिला प्रशासन और नगर निगम के बीच सीधा टकराव सामने आ गया था। आखिरकार विवाद बढ़ने पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम को पूरी तरह सील कर दिया था।
प्रशासनिक टकराव के बीच पटाखा बिक्री पर रोक
पहले से ही विवादों और सीलिंग के साये में मौजूद इस स्टेडियम में दीपावली के मौके पर पटाखा दुकानें सजने की संभावनाओं पर अब नगर निगम के इस नए आदेश ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। निगम के इस कड़े रुख के बाद अब पटाखा विक्रेताओं को शहर के अन्य चिन्हित मैदानों का रुख करना होगा।














