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Palamu

झारखंड भवन लिफ्ट हादसा: घूरन राम के छह परिजन बेहोश

पलामू/नई दिल्ली: दिल्ली के पुराने झारखंड भवन में लिफ्ट में फंसने के बाद पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के छह सदस्य बेहोश हो गए। इनमें उनके बेटे और बहू भी शामिल हैं। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को हुई घटना के बाद परिजनों को अस्पताल पहुंचाया गया।

घूरन राम के मुताबिक, परिवार काफी देर तक लिफ्ट में फंसा रहा, लेकिन मौके पर कोई इंजीनियर या टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं था। उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट में काम करने वाले लोगों ने लिफ्ट खोलकर परिजनों को बाहर निकाला।

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पूर्व सांसद ने सभी की हालत खतरे से बाहर बताई है। हालांकि, घटना ने भवन की लिफ्ट के रखरखाव और आपातकालीन बचाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

झारखंड भवन लिफ्ट हादसा: कैसे बाहर निकला परिवार?

घूरन राम ने बताया कि लिफ्ट में फंसने के दौरान उनके परिवार के सदस्यों की तबीयत बिगड़ गई। उनके अनुसार, तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं होने पर रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने लिफ्ट तोड़कर सभी को बाहर निकाला। इसके बाद परिजनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिवार कितनी देर तक अंदर फंसा रहा, इस पर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। शुरुआती जानकारी में कई घंटे का उल्लेख है, जबकि कुछ प्रकाशित रिपोर्टों में करीब एक घंटे की अवधि बताई गई है। बचाव का सटीक समय आधिकारिक विवरण से स्पष्ट होगा।

सभी की हालत खतरे से बाहर होने की जानकारी

पूर्व सांसद के मुताबिक, डॉक्टरों की निगरानी में परिवार के सदस्यों का इलाज चल रहा है और सभी खतरे से बाहर हैं।

परिजनों के बेहोश होने की चिकित्सकीय वजह अभी उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है। इसलिए अस्पताल के अधिकृत विवरण के बिना इसे ऑक्सीजन की कमी या किसी अन्य निश्चित कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

घूरन राम ने भवन की व्यवस्था पर लगाए आरोप

पूर्व सांसद ने पुराने झारखंड भवन के संचालन और सुविधाओं पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि वहां जरूरी सुविधाओं और कर्मचारियों की उपलब्धता में कमी है। उन्होंने कहा कि लापरवाही के कारण उनके परिवार के साथ गंभीर अनहोनी हो सकती थी।

ये आरोप भवन के संचालन से जुड़े लोगों पर हैं। उपलब्ध जानकारी में भवन प्रबंधन का विस्तृत पक्ष शामिल नहीं है। लिफ्ट रुकने की तकनीकी वजह और बचाव में देरी की जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

आपात स्थिति में मदद की व्यवस्था कितनी तैयार थी?

घूरन राम के बयान से सबसे अहम सवाल तत्काल सहायता का उठता है। यदि तकनीकी कर्मचारी मौके पर नहीं थे, तो आपात स्थिति में उन्हें बुलाने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की क्या व्यवस्था थी?

लिफ्ट की आखिरी सर्विस कब हुई, उसका आपातकालीन अलार्म काम कर रहा था या नहीं और मदद मिलने में कितना समय लगा—इन बिंदुओं की जांच घटना की पूरी तस्वीर सामने ला सकती है।

गढ़वा और पलामू में परिजनों की सेहत को लेकर चिंता

घटना की जानकारी मिलने के बाद गढ़वा और पलामू के लोगों ने घूरन राम से बातचीत कर परिवार का हाल जाना। पूर्व सांसद और उनके परिजन फिलहाल दिल्ली में हैं।

घूरन राम मूल रूप से गढ़वा के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2007 के लोकसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर पलामू संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की थी। फिलहाल वह भाजपा में हैं।

स्थानीय स्तर पर घटना को लेकर चिंता के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि दिल्ली में राज्य के भवन में ठहरने वाले लोगों के लिए आपातकालीन सहायता कितनी सुलभ है।

अब क्या होगा: तकनीकी जांच और प्रबंधन के जवाब का इंतजार

झारखंड भवन लिफ्ट हादसा सामने आने के बाद अगला जरूरी कदम लिफ्ट की तकनीकी जांच और बचाव व्यवस्था की समीक्षा है। उपलब्ध जानकारी में किसी औपचारिक जांच आदेश या कार्रवाई का विवरण नहीं है।

भवन प्रबंधन का जवाब यह स्पष्ट करेगा कि लिफ्ट क्यों रुकी, सहायता कैसे पहुंची और ऐसी घटना दोबारा रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। परिवार की सेहत में सुधार राहत की बात है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब भी जरूरी है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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