राँची: अशोक नगर विवाद में पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम और उनके परिवार की शिकायत को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। पत्र में पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) आलोक प्रियदर्शी पर रास्ता रोकने, धमकाने और पद के दुरुपयोग के आरोपों की निष्पक्ष जाँच की माँग की गई है।
मरांडी ने शिकायतकर्ता परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रभावित लोगों का आवागमन बहाल कराने के लिए तत्काल प्रशासनिक कदम उठाने का आग्रह किया है। पत्र के अनुसार, परिवार ने अरगोड़ा थाना प्रभारी को भी लिखित शिकायत दी है।
अशोक नगर विवाद: 40 फीट रास्ते पर परिवार का दावा
मरांडी के पत्र के अनुसार, पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम का परिवार अशोक नगर, रोड नंबर-1 स्थित अपनी पैतृक भूमि पर लगभग पाँच दशकों से रह रहा है।
परिवार का दावा है कि स्वीकृत भवन नक्शे और संबंधित दस्तावेजों में अशोक नगर सोसाइटी की ओर से लगभग 40 फीट चौड़ा रास्ता दर्शाया गया है। परिवार लंबे समय से इसी मार्ग का इस्तेमाल आवागमन के लिए करता रहा है।
मरांडी ने पत्र में अपने निजी संज्ञान का उल्लेख करते हुए कहा है कि संबंधित रास्ता वर्ष 1964 से खुला और उपयोग में रहा है। हालाँकि, रास्ते की स्थिति और उस पर अधिकार का निर्धारण संबंधित अभिलेखों की जाँच से ही स्पष्ट होगा।
28 सितंबर की शाम क्या हुआ? शिकायत में आरोप
पत्र में वर्णित शिकायत के मुताबिक, 28 सितंबर 2026 को शाम लगभग छह बजे आलोक प्रियदर्शी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ वहाँ पहुँचे। आरोप है कि परिवार के मुख्य द्वार के सामने वाहन खड़ा करके रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे परिवार के सदस्यों को अपने ही घर में बंद रहने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। पत्र में आसपास के अन्य लोगों का सामान्य आवागमन बाधित होने का भी उल्लेख है।
धमकाने और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप
अशोक नगर विवाद से जुड़ी शिकायत में परिवार ने झूठे मुकदमों में फँसाने, जेल भेजने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बच्चों सहित परिवार के अन्य सदस्यों को धमकाए जाने की बात भी कही है।
शिकायत में हथियार दिखाकर धमकाने और धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप भी शामिल हैं। इन आरोपों पर किसी जाँच का निष्कर्ष उपलब्ध सामग्री में दर्ज नहीं है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा:
“कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता।”
उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के विरुद्ध आरोपों पर निर्णय निष्पक्ष जाँच और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री से छह बिंदुओं पर कार्रवाई की माँग
अशोक नगर विवाद में मरांडी ने मुख्यमंत्री से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है:
- स्वतंत्र जाँच: सभी आरोपों की जाँच किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी या उपयुक्त जाँच एजेंसी से कराई जाए।
- परिवार की सुरक्षा: शिकायतकर्ता और उनके परिवार को धमकी, दबाव, उत्पीड़न या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया जाए।
- अभिलेखों की पड़ताल: भूमि, स्वामित्व, स्वीकृत भवन नक्शे और लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे रास्ते की विधिसम्मत जाँच हो।
- धमकी के आरोपों की जाँच: हथियार दिखाने, रास्ता रोकने, झूठे मुकदमों की धमकी और धार्मिक टिप्पणी के आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर जाँचा जाए।
- आवागमन की रक्षा: प्रभावित परिवारों के आवागमन और अन्य वैध अधिकारों के लिए तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए जाएँ।
- अंगरक्षकों की भूमिका: जाँच हो कि सुरक्षाकर्मियों की भूमिका सुरक्षा तक सीमित थी या उनके माध्यम से नागरिकों को भयभीत करने का प्रयास हुआ।
स्थानीय असर: घर तक पहुँच और सुरक्षा का सवाल
अशोक नगर विवाद में रास्ते की स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि शिकायत सीधे घर तक आने-जाने की सुविधा से जुड़ी है। यदि रास्ता बाधित होने का दावा सही पाया जाता है, तो उसका असर परिवार की रोजमर्रा की आवाजाही और आपात स्थिति में सहायता पहुँचने पर भी पड़ सकता है।
मरांडी ने पत्र में इसे केवल दो व्यक्तियों के बीच भूमि या रास्ते का विवाद मानने के बजाय कई परिवारों की सुरक्षा, सम्मान और आवागमन से जुड़ा मामला बताया है।
जाँच से किन सवालों का जवाब मिलेगा?
इस प्रकरण में अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान आवश्यक होगा। स्वीकृत नक्शे में रास्ता कहाँ है, उसका स्वामित्व और उपयोग की स्थिति क्या है तथा कथित अवरोध किस स्थान पर हुआ—इन सवालों के जवाब विवाद को स्पष्ट कर सकते हैं।
धमकी और सुरक्षाकर्मियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की पड़ताल में उपलब्ध वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान उपयोगी हो सकते हैं। हालाँकि, ऐसी सामग्री उपलब्ध होने की पुष्टि दिए गए पत्र में नहीं है।
अशोक नगर विवाद में अगला महत्वपूर्ण कदम मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित प्रशासन का रुख होगा। उपलब्ध सामग्री में जाँच का आदेश जारी होने या किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं है।
मरांडी ने निष्पक्ष जाँच, परिवार की सुरक्षा और आवागमन संबंधी अधिकारों की रक्षा की माँग की है। प्रशासन की प्रतिक्रिया और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने से स्पष्ट होगा कि शिकायत पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।













