पलामू: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में NPU ऑडिट ने वित्तीय जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न मदों में अग्रिम दिए गए 3.46 करोड़ रुपये का खर्च-समायोजन लंबित है। ऑडिट टीम ने संबंधित लोगों से राशि की वसूली और कार्रवाई की अनुशंसा की है।
दिए गए ऑडिट विवरण के मुताबिक, पुराने अग्रिम का हिसाब लिए बिना विश्वविद्यालय ने दोबारा अग्रिम राशि जारी की। जनवरी 2026 तक परीक्षा फंड और जनरल फंड में असमायोजित अग्रिम की कुल रकम बढ़कर 3.46 करोड़ रुपये हो गई।
यह मामला खर्च के दस्तावेज और अग्रिम राशि के समायोजन से जुड़ा है। समायोजन लंबित होने को अपने आप में गबन साबित होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता, लेकिन लंबे समय तक हिसाब नहीं मिलना विश्वविद्यालय की वित्तीय निगरानी पर गंभीर सवाल उठाता है।
NPU ऑडिट में कैसे सामने आया मामला?
विश्वविद्यालय के स्पेशल ऑडिट में चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी CA की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। इसमें सामने आया कि अलग-अलग मदों में अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए गए अग्रिम का समायोजन काफी समय से लंबित था।
अग्रिम का समायोजन करने का मतलब है—जिस काम के लिए पैसा लिया गया, उसके खर्च का विवरण और संबंधित बिल-वाउचर देकर हिसाब पूरा करना। बची हुई राशि लौटाने का विवरण भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
विश्वविद्यालय के मामले में ऑडिट ने इसी हिसाब के लंबित रहने पर आपत्ति जताई है।
वर्ष 2023 तक कितना अग्रिम लंबित था?
CA की वर्ष 2023 तक की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा फंड से दिए गए 1.74 करोड़ रुपये और जनरल फंड से दिए गए 1.01 करोड़ रुपये के अग्रिम का समायोजन नहीं हुआ था। दोनों मदों को मिलाकर यह रकम 2.75 करोड़ रुपये थी।
इसके बाद भी नया अग्रिम जारी हुआ। दस्तावेजों की जांच में जनवरी 2026 तक लंबित राशि और बढ़ने की बात सामने आई।
| फंड | वर्ष 2023 तक असमायोजित अग्रिम | जनवरी 2026 तक असमायोजित अग्रिम |
|---|---|---|
| परीक्षा फंड | ₹1.74 करोड़ | ₹2.27 करोड़ |
| जनरल फंड | ₹1.01 करोड़ | ₹1.19 करोड़ |
| कुल | ₹2.75 करोड़ | ₹3.46 करोड़ |
इन आंकड़ों के अनुसार, दोनों अवधियों के बीच असमायोजित अग्रिम में 71 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई।
पुराने खर्च का हिसाब नहीं, फिर नया अग्रिम क्यों?
NPU ऑडिट में सामने आया सबसे अहम सवाल यही है। पहले जारी रकम का समायोजन पूरा किए बिना बाद में फिर अग्रिम दिए गए।
इससे विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच और भुगतान प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठता है। यदि पुराने अग्रिम लंबित थे, तो नया भुगतान जारी करते समय उनकी स्थिति की समीक्षा कैसे हुई? संबंधित स्तर पर हिसाब जमा कराने की निगरानी क्यों प्रभावी नहीं रही?
उपलब्ध विवरण में अग्रिम लेने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम, प्रत्येक व्यक्ति की देनदारी तथा अलग-अलग भुगतान का उद्देश्य नहीं दिया गया है। इसलिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
ऑडिट टीम ने वसूली और कार्रवाई की अनुशंसा की
ऑडिट टीम ने अग्रिम राशि की वसूली संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से करने की अनुशंसा की है। साथ ही, खर्च का हिसाब नहीं देने या राशि वापस नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
NPU ऑडिट रिपोर्ट में अग्रिम का समायोजन नहीं होने को वित्त विभाग के जारी दिशा-निर्देशों के खिलाफ बताया गया है।
यहाँ अनुशंसा और वास्तविक कार्रवाई में अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में वसूली शुरू होने, नोटिस जारी होने या किसी अधिकारी-कर्मचारी पर कार्रवाई होने की पुष्टि नहीं है।
विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के लिए क्या मायने हैं?
परीक्षा फंड से जुड़े 2.27 करोड़ रुपये के अग्रिम का समायोजन लंबित होना विद्यार्थियों के लिए भी प्रासंगिक है। परीक्षा व्यवस्था से संबंधित धन के उपयोग का स्पष्ट रिकॉर्ड विश्वविद्यालय की जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में इस मामले के कारण परीक्षा, परिणाम या छात्र सेवाएं प्रभावित होने की जानकारी नहीं है। फिलहाल सवाल धन के उपयोग के दस्तावेज, समय पर हिसाब और वित्तीय अनुशासन का है।
अब आगे क्या होगा?
NPU ऑडिट के बाद नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के जवाब और ऑडिट की अनुशंसाओं पर होने वाली कार्रवाई पर रहेगी। संबंधित लोगों से खर्च के दस्तावेज लेने, लंबित अग्रिम का मिलान करने और वसूली की सिफारिश पर निर्णय से स्थिति स्पष्ट होगी।
उपलब्ध इनपुट में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष शामिल नहीं है। उसका जवाब आने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितना खर्च दस्तावेजों से प्रमाणित होता है, कितनी राशि वापस आती है और लंबित समायोजन के लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।










