झारखंड मौसम अपडेट: राज्य के मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। उत्तर-पूर्वी असम और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती हवाओं के दबाव के कारण राज्य के कई हिस्सों में आसमान पर बादलों का डेरा है।
मौसम विभाग (IMD) ने साफ किया है कि अगले 48 घंटों तक बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। 29 और 30 सितंबर को उत्तर-पश्चिमी, उत्तर-पूर्वी और मध्य झारखंड के जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज हो सकती है।
हालांकि, इस मानसूनी उतार-चढ़ाव के बीच आम जनता और किसानों के लिए राहत की बात यह है कि किसी बड़े नुकसान या भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है। 3 अक्टूबर के बाद से राज्य में मौसम पूरी तरह शुष्क होने के आसार हैं।
असम-यूपी में चक्रवाती सिस्टम: किन जिलों में छाएंगे बादल?
मौसम केंद्र, रांची द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर दो अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय हैं। पहला सिस्टम पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊंचाई पर केंद्रित है, जबकि दूसरा सिस्टम पूर्वोत्तर असम और उसके आसपास बना हुआ है।
इसका सीधा प्रभाव राज्य के उत्तर-पश्चिमी (पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार), उत्तर-पूर्वी (देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज) और मध्य भाग (रांची, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़) पर दिख रहा है। इन इलाकों में 1 अक्टूबर तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है।
पलामू में उमस, कांके में ठंडक: पारे का खेल समझिए
बीते 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो झारखंड में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक दर्ज किया गया है। सबसे ज्यादा तापमान सरायकेला में 34.8°C रिकॉर्ड हुआ, जबकि सबसे ठंडा इलाका BAU कांके (रांची) रहा, जहां न्यूनतम पारा लुढ़क कर 17.4°C पर आ गया।
राज्य भर में 85 से 98 प्रतिशत तक की आपेक्षिक आर्द्रता (Humidity) दर्ज की जा रही है। हवा में अत्यधिक नमी होने के कारण दोपहर के समय चिपचिपी उमस लोगों को परेशान कर रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।

किसानों के लिए अलर्ट: गंधी कीट और फंगस का दोहरा खतरा
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) और मौसम केंद्र रांची के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. बाबूराज पी.पी. के अनुसार, खेतों में ज्यादा पानी और अत्यधिक नमी फसलों में कीट और बीमारियों को न्योता दे सकती है:
- धान की सुरक्षा: प्रजनन चरण में खेतों में 5 से 10 सेमी पानी रखें, लेकिन अतिरिक्त पानी बाहर निकालें। बूटिंग और दूध भरने की अवस्था में ‘गंधी कीट’ का प्रकोप बढ़ सकता है। बचाव के लिए किसान प्रकाश जाल (Light Trap) लगाएं या जरूरत पड़ने पर साइपरमेथ्रीन 25 EC (0.5 मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें।
- दलहनी व मक्का की फसल: उरद, मूंग और अरहर के खेतों में पानी बिल्कुल न ठहरने दें। मक्के के भुट्टों को पक्षियों से बचाने के लिए खेतों में चमकीले रिबन या फीते लगाएं।
- सब्जी और पोल्ट्री: उच्च आर्द्रता से सब्जियों में झुलसा (Blight) का खतरा है, जिसके लिए मैंकोजेब का इस्तेमाल करें। पोल्ट्री फार्म संचालक फंगल संक्रमण रोकने के लिए बिछाली (Poultry Litter) में सूखा चूना जरूर मिलाएं।
3 अक्टूबर से बदलेगा मिजाज
2 अक्टूबर तक उत्तर-पूर्वी झारखंड में हल्की बारिश जारी रहने के बाद 3 अक्टूबर से पूरे राज्य में मौसम साफ और शुष्क होने लगेगा। 4 और 5 अक्टूबर को भी बारिश की कोई संभावना नहीं है।
मौसम विभाग ने भारी बारिश या आंधी का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है, जिससे दुर्गा पूजा की तैयारियों में जुटे पूजा पंडालों और आम जनता को आने वाले दिनों में राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।













