Ranchi | चुनाव प्रक्रिया पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर झारखंड में सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राहुल गांधी पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वे देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
गिरिडीह में मीडिया से मुखातिब होते हुए मरांडी ने कांग्रेस को दो टूक नसीहत दी कि पार्टी अपने नेता की फिक्र करे। उन्होंने तंज कसा कि राहुल गांधी का किसी अच्छे अस्पताल में इलाज कराया जाए, नहीं तो वे पूरी पार्टी को ले डूबेंगे।
यह जुबानी हमला ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन चुनाव आयोग और मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर लगातार सवाल खड़े कर रहा है।
‘2014 से अब तक केवल मुद्दे बदले, आदत नहीं’: मरांडी
प्रेस वार्ता के दौरान बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस के पिछले एक दशक के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था पर अंगुली उठाना कांग्रेस की पुरानी फितरत बन चुकी है। जब से 2014 में पार्टी सत्ता से बाहर हुई है, तब से संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
मरांडी ने सिलसिलेवार ब्योरा देते हुए कहा:
- पहले ईवीएम को ‘ब्लैक बॉक्स’ बताकर संदेह पैदा करने की कोशिश हुई।
- इसके बाद ‘चौकीदार चोर है’, राफेल सौदा और पेगासस फोन टैपिंग जैसे मामलों पर विवाद खड़ा किया गया।
- अब हार के डर से सीधे ‘वोट चोरी’ का नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि देश की जनता अब इन बयानों को गंभीरता से नहीं लेती और हर बार चुनावों में इन आधारहीन दावों को खारिज कर चुकी है।
चुनाव आयोग के रुख से विपक्ष को झटका
मरांडी ने हालिया विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि एक अखबार की खबर को ढाल बनाकर विपक्ष ने बड़ा सियासी बवंडर खड़ा करने की कोशिश की। ऐसा दिखाया गया मानो कोई बहुत बड़ा सुबूत हाथ लग गया हो।
हालाँकि, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद आए संयुक्त बयान—जिसमें स्पष्ट किया गया कि सभी फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए हैं—ने विपक्ष के दावों की हवा निकाल दी। मरांडी के मुताबिक, इस स्पष्टीकरण के बाद राहुल गांधी और पूरे ‘इंडिया’ गठबंधन की रणनीति धराशायी हो गई।
विदेश में देश की छवि बिगाड़ने का आरोप
मरांडी ने राहुल गांधी के संसद और विदेश दौरों के बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल कभी भी भारत की प्रगति और सामर्थ्य के साथ खड़े नहीं दिखते। उनके कई बयान राष्ट्रीय हितों के बजाय विदेशी एजेंडे के अनुकूल प्रतीत होते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर कांग्रेस ने अपनी कार्यशैली नहीं बदली, तो 2029 तक गठबंधन का राजनीतिक अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
आगे क्या: चुनावी राज्यों में तेज होगा ध्रुवीकरण
बाबूलाल मरांडी के इस कड़े रुख से साफ है कि भाजपा आने वाले दिनों में चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों को ‘संवैधानिक संस्थाओं के अपमान’ और ‘देशविरोधी नैरेटिव’ के रूप में पेश करेगी। वहीं, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे चुनावी शुचिता का मुद्दा बनाकर सड़क से संसद तक घेरने की तैयारी में हैं। दोनों पक्षों की इस तल्खी का सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों की चुनावी बिसात पर देखने को मिलेगा।











