Ranchi | फर्स्ट मार्क पब्लिक स्कूल में शनिवार को गणेश चतुर्थी का जश्न बेहद अनोखे और भव्य अंदाज में मनाया गया। छोटे बच्चों ने अपनी कला और भक्ति से ऐसा समां बांधा कि हर कोई बस देखता ही रह गया।
भगवान गणेश की वंदना से शुरू हुए इस महोत्सव में विद्यार्थियों ने शानदार श्लोक पाठ और रंगारंग नृत्य प्रस्तुत किए। पूरा स्कूल परिसर बप्पा के जयकारों और सांस्कृतिक उमंग से गूंज उठा।
यह कार्यक्रम सिर्फ एक उत्सव नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की एक शानदार पहल थी। आइए जानते हैं आखिर इस आयोजन में ऐसा क्या खास था, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
रंग-बिरंगे परिधान और मासूमों की मनमोहक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गणेश वंदना और प्रभावशाली वक्तृत्व (भाषण) से हुई। इसके बाद जब नन्हें-मुन्ने बच्चे रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में मंच पर उतरे, तो माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम का पैमाना भले ही बहुत विशाल नहीं था, लेकिन बच्चों के गजब के उत्साह और उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने इसे एक यादगार इवेंट बना दिया। हर एक परफॉरमेंस में बच्चों की रचनात्मकता और उनकी महीनों की मेहनत साफ झलक रही थी। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्कूल में एक पॉजिटिव और एनर्जेटिक वाइब बनी रही।
“सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, संस्कार भी हैं जरूरी”
आज के डिजिटल युग में जहां बच्चे स्क्रीन से चिपके रहते हैं, वहीं इस तरह के आयोजन उन्हें अपनी माटी से जोड़ते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रशासक प्रमोद कुमार ने मंच से अभिभावकों और समाज के लिए एक बेहद अहम संदेश दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों को केवल किताबी शिक्षा तक सीमित रखना संस्थान का लक्ष्य नहीं है। प्रमोद कुमार ने एक मजबूत बयान देते हुए कहा, “बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों का समावेश भी उतना ही आवश्यक है।”
मंच से दूर होता है डर, बढ़ता है आत्मविश्वास
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से बच्चों में सिर्फ भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान ही नहीं बढ़ता, बल्कि उनका मंचीय कौशल (Stage Fear खत्म होना) और आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ जाता है। इस सफल आयोजन में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और पूरे विद्यालय परिवार ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर बच्चों का हौसला बढ़ाया।
आगे क्या (What Next): फर्स्ट मार्क पब्लिक स्कूल का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि अगर बच्चों को सही मंच मिले, तो वे पढ़ाई के साथ-साथ संस्कारों की नींव भी मजबूत कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले त्योहारी सीजन (दशहरा-दिवाली) में स्कूल प्रबंधन बच्चों के छिपे हुए टैलेंट को निखारने के लिए और कौन सी नई रचनात्मक पहल करता है। फिलहाल, बप्पा के इस महोत्सव की खूबसूरत यादें बच्चों के दिलों में लंबे समय तक ताजा रहेंगी।











