जमशेदपुर। टाटा स्टील को कोरस अधिग्रहण से जुड़े पुराने आयकर विवाद में बड़ी राहत मिली है। आयकर अपीलीय अधिकरण यानी आईटीएटी ने वित्तीय वर्ष 2008-09 के लिए कंपनी का ब्याज व्यय पर कटौती का दावा स्वीकार किया है। इससे करीब 427 करोड़ रुपये की संभावित कर देनदारी घटने का रास्ता खुला है।
विवाद उस कर्ज के ब्याज को लेकर था, जिसे कंपनी ने कोरस ग्रुप पीएलसी के अधिग्रहण के लिए लिया था। आयकर विभाग ने इस ब्याज पर मांगी गई कटौती खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ कंपनी ने अधिकरण में अपील की।
करीब 12 साल बाद आए अनुकूल फैसले का वित्तीय असर कर निर्धारण अधिकारी के आदेश लागू करने के बाद दर्ज होगा। इसी मुद्दे पर अन्य वित्तीय वर्षों के मामले अभी लंबित हैं।
टाटा स्टील के ब्याज कटौती दावे पर क्यों हुआ विवाद?
मामले के केंद्र में 813.65 करोड़ रुपये का ब्याज व्यय था। कंपनी ने कोरस अधिग्रहण के लिए जुटाए गए कर्ज पर चुकाए ब्याज को आयकर अधिनियम की धारा 36(1)(iii) के तहत कटौती योग्य माना था।
आयकर उपायुक्त ने 10 जनवरी 2014 के आदेश में यह दावा खारिज कर दिया। टाटा स्टील ने 4 फरवरी 2014 को आईटीएटी में अपील दाखिल कर इस फैसले को चुनौती दी।
813.65 करोड़ का दावा और 427 करोड़ की राहत अलग कैसे?
813.65 करोड़ रुपये ब्याज व्यय की वह राशि है, जिस पर कंपनी ने कटौती मांगी थी। वहीं, लगभग 427 करोड़ रुपये उस विवाद से जुड़ी संभावित कर देनदारी है।
इस अंतर को समझना जरूरी है। ब्याज व्यय पर कटौती स्वीकार होने से कर की गणना प्रभावित होती है; पूरी कटौती राशि कंपनी को नकद मिलने का अर्थ नहीं निकलता।
जून में सुनवाई, सितंबर में आया अनुकूल आदेश
वित्तीय वर्ष 2008-09 के मामले की अंतिम सुनवाई जून 2026 में हुई। अधिकरण ने 18 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया, जो कंपनी को 28 सितंबर को प्राप्त हुआ।
आईटीएटी ने वित्तीय वर्ष 2007-08 से जुड़े अपने पहले निर्णय का अनुसरण करते हुए इस मामले में भी ब्याज व्यय की कटौती स्वीकार की।
कुल संभावित देनदारी 1,259 करोड़ तक कैसे पहुंचेगी?
कोरस अधिग्रहण के कर्ज पर ब्याज कटौती का व्यापक विवाद वित्तीय वर्ष 2007-08 से 2014-15 तक फैला है। इस मुद्दे पर कंपनी का शुरुआती कुल संभावित कर जोखिम लगभग 1,901 करोड़ रुपये था।
फरवरी 2026 में वित्तीय वर्ष 2007-08 के लिए मिले अनुकूल फैसले से लगभग 215 करोड़ रुपये की राहत का रास्ता खुला था। उसके बाद संभावित देनदारी 1,686 करोड़ रुपये रहनी थी।
अब वित्तीय वर्ष 2008-09 के मामले में लगभग 427 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत के बाद यह राशि 1,259 करोड़ रुपये तक घटने की उम्मीद है, बशर्ते कर निर्धारण अधिकारी संबंधित आदेशों को प्रभाव दें।
जमशेदपुर के लिए क्या मायने रखता है फैसला?
जमशेदपुर के औद्योगिक परिदृश्य में टाटा स्टील से जुड़ा यह फैसला कंपनी की वित्तीय स्थिति समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसका सीधा संबंध पुराने कर विवाद और वित्तीय विवरणों में दर्ज संभावित देनदारी से है।
उपलब्ध सूचना में इस राहत को कर्मचारियों के बोनस, नई भर्ती या स्थानीय निवेश की किसी घोषणा से नहीं जोड़ा गया है। इसलिए फिलहाल इसका स्थानीय महत्व कंपनी पर पुराने कर जोखिम के घटने तक सीमित समझना चाहिए।
लंबित मामलों में भी मजबूत हो सकती है दलील
कंपनी के मुताबिक, दोनों अनुकूल आदेश इसी मुद्दे पर वित्तीय वर्ष 2009-10 से 2014-15 के लंबित मामलों में उसकी दलीलों को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, उन मामलों का निर्णय अलग से होना बाकी है।
अब कर निर्धारण अधिकारी के आदेश पर नजर
अगला अहम कदम अधिकरण के निर्णय को लागू करने वाला कर निर्धारण अधिकारी का आदेश होगा। इसके बाद टाटा स्टील अपने वित्तीय विवरणों में दर्ज आकस्मिक देनदारी में आवश्यक बदलाव करेगी।
कंपनी ने एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राहत कब खातों में दर्ज होती है और बाकी वर्षों की अपीलों में इन फैसलों का कितना असर पड़ता है।













