साहिबगंज। साहिबगंज रेलमार्ग पर महाराजपुर और सकरीगली के बीच गंगा का कटाव रेलवे लाइन के करीब पहुँच गया है। सबसे गंभीर हिस्से में कटाव और पटरी के बीच सिर्फ 10 मीटर का फासला बचा है। रेलवे ट्रैक को सुरक्षित रखने के लिए बड़े पैमाने पर बोल्डर डाल रहा है।
बुधवार, 30 सितंबर की शाम तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस व्यवधान के दौरान कुल छह मेल-एक्सप्रेस और 39 पैसेंजर ट्रेनें रद्द की जा चुकी हैं। 21 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का रास्ता भी बदला गया है। इसका सीधा असर स्थानीय और लंबी दूरी के यात्रियों पर पड़ा है।
कटावरोधी काम बुधवार को पूरा नहीं हो सका। गुरुवार, 1 अक्टूबर को भी काम जारी रहेगा और पैसेंजर सेवाएँ प्रभावित रहने की आशंका है। शुक्रवार से डाउन लाइन पर परिचालन सामान्य होने की संभावना है, लेकिन बहाली की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है।
साहिबगंज रेलमार्ग पर 160 मीटर हिस्से में सबसे ज्यादा खतरा
महाराजपुर-सकरीगली के बीच करीब 300 मीटर लंबाई में कटाव हो रहा है। इसमें लगभग 160 मीटर हिस्से की स्थिति गंभीर बताई गई है। रेलवे इसी हिस्से में बचाव कार्य पर विशेष ध्यान दे रहा है।
कटाव का पटरी के इतने करीब पहुँचना चुनौती बढ़ाता है। यहाँ काम सिर्फ मिट्टी के नुकसान को रोकने तक सीमित नहीं है; रेलवे को लाइन के किनारे का हिस्सा सुरक्षित भी करना है, ताकि परिचालन बहाल होने के बाद यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे।
डाउन लाइन पर यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन प्रभावित होने की पुष्टि अन्य रिपोर्टों में भी हुई है। रेलवे की टीमें प्रभावित हिस्से में लगातार काम कर रही हैं।
रेलवे ने राज्य सरकार से भी माँगा सहयोग
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेलवे ने कटाव से निपटने के लिए राज्य सरकार से सहयोग माँगा है। बुधवार को गंगा पंप नहर के कार्यपालक अभियंता प्रेम सोरेन और साहिबगंज के अंचल अधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने मौके का जायजा लिया।
जिले में कटावरोधी कार्यों का अनुभव रखने वाले गंगा पंप नहर विभाग की विशेषज्ञता इस स्थान पर उपयोगी हो सकती है। फिलहाल रेलवे और स्थानीय प्रशासन के सामने प्राथमिक चुनौती कटाव को आगे बढ़ने से रोकना है।
300 मजदूर जुटे, अररिया-किशनगंज से आए विशेषज्ञ
साहिबगंज रेलमार्ग को सुरक्षित करने के काम में करीब 300 मजदूर लगाए गए हैं। अररिया और किशनगंज से ऐसे दक्ष श्रमिक भी बुलाए गए हैं, जिन्हें कटावरोधी काम का अनुभव है।
ये श्रमिक तार की जालियाँ तैयार करते हैं। उनमें बोल्डर भरकर कटाव वाले स्थान पर डाला जाता है। मौके पर सामग्री पहुँचाने के लिए रेलवे वैगनों की मदद ले रहा है।
150 वैगन बोल्डर लगने का अनुमान
रेल प्रशासन के अनुसार, बचाव कार्य में करीब 150 वैगन बोल्डर की जरूरत पड़ सकती है। बुधवार शाम तक लगभग 50 वैगन बोल्डर कटाव स्थल पर डाले जा चुके थे।
हालाँकि, बोल्डर डालने की मात्रा से ही परिचालन बहाली तय नहीं होगी। प्रभावित हिस्से की स्थिति और कटाव रोकने में मिली सफलता भी अहम होगी।
ट्रेनें रद्द और डायवर्ट: यात्रियों पर कितना असर?
बुधवार शाम तक उपलब्ध कुल आँकड़ों के अनुसार, साहिबगंज रेलमार्ग पर व्यवधान के चलते ट्रेनों में ये बदलाव किए गए:
| परिचालन में बदलाव | मेल-एक्सप्रेस | पैसेंजर |
|---|---|---|
| रद्द | 6 | 39 |
| मार्ग परिवर्तन | 21 | — |
| दूसरे स्टेशन से परिचालन शुरू | 1 | 4 |
| निर्धारित गंतव्य से पहले समाप्त | 2 | 4 |
ये पूरे व्यवधान के दौरान प्रभावित सेवाओं के आँकड़े हैं; इन्हें केवल गुरुवार की रद्द ट्रेनों की सूची न समझें।
पैसेंजर सेवाएँ प्रभावित होने से आसपास के स्टेशनों तक रोजाना आने-जाने वालों की मुश्किल बढ़ी है। यात्रियों को ट्रेन की जानकारी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है और कुछ स्थानीय यात्राओं के लिए सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है।
गुरुवार को किन एक्सप्रेस ट्रेनों का रास्ता बदला?
उपलब्ध सूचना के अनुसार, गुरुवार के लिए इन ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन किया गया है:
- गया-हावड़ा एक्सप्रेस
- भागलपुर-रांची वनांचल एक्सप्रेस
- जमालपुर-हावड़ा एक्सप्रेस
- ब्रह्मपुत्र मेल
- नटेसर-हावड़ा स्पेशल
यात्री स्टेशन निकलने से पहले अपनी ट्रेन की संख्या और यात्रा की तारीख के अनुसार रेलवे की नवीनतम परिचालन सूचना जाँचें। रद्दीकरण, बदला हुआ मार्ग और शुरुआती स्टेशन में बदलाव—तीनों का यात्रा पर अलग असर पड़ता है।
अब क्या: शुक्रवार से बहाली की उम्मीद कितनी?
साहिबगंज रेलमार्ग पर गुरुवार का बचाव कार्य परिचालन बहाली के लिए अहम रहेगा। शुक्रवार, 2 अक्टूबर से डाउन लाइन पर यातायात सामान्य होने की संभावना जताई गई है, लेकिन इसे तय समयसीमा नहीं माना जा सकता।
अगला निर्णायक कदम कटाव वाले गंभीर हिस्से को सुरक्षित करना और उसकी स्थिति का आकलन करना होगा। यात्रियों के लिए सबसे जरूरी सूचना रेलवे की अंतिम बहाली घोषणा होगी—इसी से स्पष्ट होगा कि उनकी ट्रेन कब और किस रास्ते से चलेगी।











