प्रकाशित:7 minutes पहले | शाम 4:56⏱️ पढ़ने का समय:4 मिनट
रांची : क्या आप जानते हैं कि सुबह आपके दरवाजे पर आने वाला दूध का पैकेट किन वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है? RKDF University Ranchi के लाइफ साइंसेज और होटल मैनेजमेंट के छात्रों ने जब धुर्वा स्थित सुधा डेयरी प्लांट में कदम रखा, तो किताबों में पढ़ी थ्योरी सीधे लाइव एक्शन में बदल गई।
विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज और डिपार्टमेंट ऑफ होटल मैनेजमेंट द्वारा आयोजित इस विशेष इंडस्ट्रियल विजिट का मकसद छात्रों को क्लासरूम से निकालकर सीधे इंडस्ट्री के ग्राउंड फ्लोर पर ले जाना था। यहां छात्रों ने दूध के कलेक्शन से लेकर पैकेजिंग और सप्लाई चेन के हर बारीक स्टेप को डिकोड किया।
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दूध की शुद्धता से लेकर आधुनिक मशीनों के ऑटोमेशन तक, यह दौरा केवल एक विजिट नहीं बल्कि भविष्य के प्रोफेशनल्स के लिए करियर का मजबूत रोडमैप साबित हुआ।
प्रोक्योरमेंट से पैकेजिंग: 5 चरणों में समझा दूध का पूरा सफर
धुर्वा स्थित सुधा डेयरी (HEC Sector-2) में कदम रखते ही छात्रों का सामना आधुनिक ऑटोमेशन और कड़े हाइजीन प्रोटोकॉल से हुआ। प्लांट के तकनीकी विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समझाया कि कैसे ग्रामीण इलाकों से दूध का प्रोक्योरमेंट (संग्रहण) किया जाता है और फिर लैब में उसकी प्रारंभिक गुणवत्ता जांची जाती है।
आपके घर तक कैसे पहुंचता है शुद्ध दूध? Rkdf यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सुधा डेयरी में डिकोड किया पूरा प्रोसेस 3
छात्रों ने देखा कि किस तरह पाश्चराइजेशन, क्वालिटी कंट्रोल, कोल्ड स्टोरेज और हाई-स्पीड पैकेजिंग के जरिए दूध को सुरक्षित रखा जाता है ताकि उपभोक्ता तक शुद्ध उत्पाद पहुंचे।
फूड माइक्रोबायोलॉजी: लैब की थ्योरी जब बनी इंडस्ट्री की ढाल
लाइफ साइंसेज के विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव बिल्कुल अलग था। माइक्रोबियल सेफ्टी, हाइजीन और पैथोजेन टेस्टिंग को उन्होंने अब तक केवल किताबों और कॉलेज की लैब में पढ़ा था, लेकिन यहां उन्होंने देखा कि बड़े स्तर पर फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स कैसे मेंटेन होते हैं।
माइक्रोबियल सेफ्टी: हानिकारक बैक्टीरिया से बचाव के साइंटिफिक टेस्ट।
क्वालिटी एश्योरेंस: तय मानकों पर खरा उतरने के बाद ही पैकेजिंग की मंजूरी।
हाइजीन स्टैंडर्ड्स: जीरो-कंटामिनेशन सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए कड़े नियम।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में स्टोरेज और हैंडलिंग की अहमियत
होटल मैनेजमेंट के छात्रों के लिए यह दौरा फूड हैंडलिंग और सप्लाई चेन मैनेजमेंट की क्लास साबित हुआ। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में सेफ स्टोरेज और टेम्परेचर कंट्रोल का क्या महत्व है, इसे उन्होंने प्लांट के कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स में बारीकी से समझा।
आपके घर तक कैसे पहुंचता है शुद्ध दूध? Rkdf यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सुधा डेयरी में डिकोड किया पूरा प्रोसेस 4
छात्रों ने जाना कि केवल स्वाद ही काफी नहीं होता; पैकेजिंग की मजबूती, सही तापमान पर स्टोरेज और समय पर लॉजिस्टिक्स डिलीवरी ही किसी फूड प्रोडक्ट को मार्केट में लीडर बनाती है।
डिग्री से आगे: इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल्स बनाने की दिशा में बड़ा कदम
आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी का मुख्य फोकस विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री थमाने के बजाय उन्हें ‘इंडस्ट्री-रेडी’ बनाना है। इस तरह के ऑन-ग्राउंड इंडस्ट्रियल विजिट्स छात्रों में व्यावहारिक समझ, टेक्निकल डिसिप्लिन और मार्केट की मांग को समझने की क्षमता विकसित करते हैं।
संस्थान का स्पष्ट मानना है कि असली शिक्षा वही है जो वास्तविक दुनिया की चुनौतियों और प्रक्रियाओं से मेल खाए।
आगे क्या? (What Next)
एकेडमिक्स और इंडस्ट्री के बीच का यह तालमेल झारखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक बेंचमार्क सेट कर रहा है। आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रबंधन का लक्ष्य राज्य के अन्य बड़े मैन्युफैक्चरिंग और फूड प्रोसेसिंग प्लांट्स के साथ ऐसे और प्रैक्टिकल सेशन्स आयोजित करना है, ताकि झारखंड के युवा ग्लोबल इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स पर खुद को साबित कर सकें।
सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।