रांची | राजधानी रांची के पारिजात हॉल में रविवार को उस वक्त अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब मंच पर उतरे 60 नन्हे फनकारों ने अपनी धुनों से पूरे हॉल को झूमने पर मजबूर कर दिया। मौका था शहर में पहली बार आयोजित रांची डिस्ट्रिक्ट जूनियर गिटार एवं कीबोर्ड प्रतियोगिता–2026 का।
कॉसमॉस यूथ क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट की इस अनूठी पहल ने न सिर्फ बच्चों की कला को एक बड़ा मंच दिया, बल्कि कला प्रेमियों और अभिभावकों को भी हैरान कर दिया। 5 अलग-अलग श्रेणियों में हुए इस मुकाबले में बच्चों ने शास्त्रीय से लेकर वेस्टर्न धुनों पर ऐसा समां बांधा कि निर्णायक भी दंग रह गए।
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण बच्चों का आत्मविश्वास और मंच पर बिना किसी हिचकिचाहट के किया गया लाइव परफॉर्मेंस रहा, जिसने रांची के सांस्कृतिक पटल पर एक नई लकीर खींच दी है।
5 कड़े मुकाबले, 60 धुरंधर और धुनों का महासंग्राम
पारिजात हॉल में आयोजित इस प्रतियोगिता को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने के लिए पांच अलग-अलग वर्गों—ग्रुप A कीबोर्ड, ग्रुप A गिटार, ग्रुप B कीबोर्ड, ग्रुप B गिटार एवं ग्रुप C कीबोर्ड—में बांटा गया था।
सुबह से शुरू हुए इस संगीत उत्सव में हर वर्ग के टॉप-3 विजेताओं (प्रथम, द्वितीय और तृतीय) को मुख्य पुरस्कारों से नवाजा गया। इसके साथ ही, मंच पर असाधारण प्रदर्शन करने वाले 5 होनहार बच्चों को विशेष ‘मेरिट अवॉर्ड’ मेडल दिया गया। ट्रस्ट ने हौसला अफजाई करते हुए हिस्सा लेने वाले सभी 60 बच्चों को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।
जब जजों ने खुद संभाला मंच: लाइव म्यूजिक पर झूमा पूरा हॉल
इस मुकाबले का स्तर कितना ऊंचा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मूल्यांकन के लिए संगीत जगत के नामचीन विशेषज्ञों की टीम मौजूद थी।
विशेष आमंत्रित कलाकार व निर्णायक निलांजना घोष दस्तिदार और सुदीप ‘बॉब’ घोष ने बच्चों के प्रदर्शन को परखने के साथ-साथ एक शानदार ‘लाइव म्यूजिक डेमॉन्स्ट्रेशन’ पेश किया। जजों की इस लाइव जुगलबंदी ने हॉल में मौजूद अभिभावकों और बच्चों में नया जोश भर दिया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
“मंच से मिलता है आत्मविश्वास”: आयोजकों ने बताया विजन
प्रतियोगिता की सफलता पर बात करते हुए कॉसमॉस यूथ क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष श्री देवाशीष राय ने कहा:
“हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ ट्रॉफी बांटना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर संगीत के प्रति सच्ची रुचि जगाना और उन्हें स्टेज फियर (मंच का डर) से मुक्त करना है। जब इतनी कम उम्र में बच्चा सैकड़ों लोगों के सामने परफॉर्म करता है, तो उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। अभिभावकों का यह भरोसा और बच्चों का उत्साह ही इस आयोजन की असली ताकत है।”
श्री राय ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी समर्पित वॉलंटियर्स और कोर टीम का आभार जताते हुए कहा कि बिना उनकी दिन-रात की मेहनत के यह ऐतिहासिक आयोजन संभव नहीं था।
क्या रांची बनेगा उभरते संगीतकारों का नया हब?
रांची में पहली बार हुआ यह डिस्ट्रिक्ट लेवल जूनियर कॉम्पिटिशन सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि शहर में छुपी बाल प्रतिभाओं को तराशने की एक ठोस शुरुआत है। ट्रस्ट के अनुसार, आने वाले समय में इसे राज्य स्तर पर और बड़े पैमाने पर आयोजित करने की योजना है ताकि झारखंड की संगीत प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पटल पर पहचान मिल सके।











