रांची: जेपीएससी गड़बड़ी मामले में सीआईडी की जांच का दायरा टीडीपीएल द्वारा आयोजित 21 परीक्षाओं तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध स्रोत-सामग्री के अनुसार, छह विशेष टीमें इन परीक्षाओं के मूल दस्तावेज, ओएमआर रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच कर रही हैं। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी है।
जेपीएससी गड़बड़ी मामले में रिकॉर्ड और ओएमआर का मिलान
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सीआईडी की छह विशेष टीमों को अलग-अलग परीक्षाओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। परीक्षा संचालन करने वाली मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) से जुड़े रिकॉर्ड जांच के दायरे में हैं।
स्रोत-सामग्री में बताया गया है कि सीआईडी ने जेपीएससी मुख्यालय से संबंधित परीक्षाओं के मूल दस्तावेज, ओएमआर रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जब्त किए हैं। एजेंसी के सर्वर डेटा का जेपीएससी के मूल रिकॉर्ड और अभ्यर्थियों की ओएमआर कार्बन कॉपी से मिलान किया जा रहा है।
उत्तर पुस्तिकाओं की फॉरेंसिक जांच भी शुरू होने की जानकारी दी गई है। जांच में विसंगति मिलने पर संबंधित अभ्यर्थियों और पदस्थापित अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- उपलब्ध विवरण के अनुसार, टीडीपीएल द्वारा आयोजित 21 परीक्षाएं जांच के दायरे में हैं।
- जांच के लिए सीआईडी की छह विशेष टीमें बनाई गई हैं।
- अब तक 27 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।
- इनमें तीन परीक्षाओं से जुड़े नौ सफल अभ्यर्थी शामिल बताए गए हैं।
- एफआरओ की 350 से अधिक और एसीएफ की 150 से अधिक ओएमआर शीट में छेड़छाड़ के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
तीन परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी
स्रोत-सामग्री के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 27 लोगों में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता शामिल हैं।
14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े गिरफ्तार अभ्यर्थियों में सुमन सौरभ, दीपक राणा, ओमप्रकाश राणा, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार और रक्षक सिंह के नाम दिए गए हैं। एसीएफ और एफआरओ परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों में ऋतिक रौशन और पंकज प्रसुन्न शामिल बताए गए हैं।
इन अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में फेरबदल कर उन्हें कट-ऑफ पार कराने का आरोप है।
इसे भी पढ़ें: JPSC-JSSC सुधार मंच ने परीक्षा रद्दीकरण के आधार अदालत में रखने की मांग की
अदालत में दी गई जानकारी और जांच के आरोप
उपलब्ध स्रोत-सामग्री में सीआईडी की ओर से अदालत को दी गई जानकारी का उल्लेख है। इसके मुताबिक, जेएसएससी द्वारा तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट की गई टीडीपीएल को जेपीएससी ने सीधे नॉमिनेशन के आधार पर काम सौंपा था। इसमें नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।
तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता पर आधिकारिक घोषणा से पहले सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 की आंसर-की एजेंसी के कर्मचारी को भेजने का आरोप भी है।
जांच विवरण में दावा किया गया है कि स्ट्रांग रूम से बाहर लाकर ओएमआर शीट में उत्तर भरे गए। प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख रुपये और अंतिम चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपये वसूलने का आरोप है। गारंटी के तौर पर अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज और खाली चेक रखवाने की बात भी कही गई है।
आरोपी अभय कुमार तिवारी पर प्रभाव का इस्तेमाल कर जेएसएससी-सीजीएल सहित कई परीक्षाएं अनुचित तरीके से पास करने का आरोप है। स्रोत-सामग्री के मुताबिक, उसने होटल रेडिसन ब्लू में ठहरे टीडीपीएल निदेशकों के खर्च का भुगतान अपने बैंक खाते से यूपीआई के जरिए किया था।
रिफॉर्म मंच ने जांच रिपोर्ट अदालत में रखने की मांग की
जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार से सीआईडी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की।
मंच का कहना है कि जिस रिपोर्ट के आधार पर 22 परीक्षाएं रद्द की गईं, उसे अदालत में रखा जाना चाहिए। मंच ने जेएसएससी-सीजीएल सहित दोनों आयोगों की विभिन्न परीक्षाओं में कथित धांधली की सीबीआई जांच की मांग को लेकर शीर्ष अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।
सीआईडी की जांच से संबंधित विवरण में 21 परीक्षाओं और मंच के बयान में 22 परीक्षाओं का उल्लेख है। उपलब्ध सामग्री में दोनों संख्याओं के अंतर का कारण स्पष्ट नहीं है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, सीआईडी रिकॉर्ड के मिलान और फॉरेंसिक जांच के आधार पर संबंधित सफल अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी कर रही है।
रिफॉर्म मंच के मुताबिक, मामले में सात अक्टूबर को हाईकोर्ट और आठ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। उपलब्ध सामग्री में अदालतों का सुनवाई आदेश संलग्न नहीं है।











