Ranchi | झारखंड में नई शराब नीति 2025 को लेकर राज्य सरकार और शराब व्यापारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। झारखंड शराब व्यापारी संघ ने वर्तमान नीति को पूरी तरह विफल बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को मजबूर होंगे।
झारखंड शराब नीति 2025: व्यापारियों ने बताया ‘विफल’, उच्चस्तरीय जांच की मांग
झारखंड शराब व्यापारी संघ ने राज्य में लागू शराब नीति 2025 पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ का कहना है कि वर्तमान नीति के चलते न तो सरकार को अपेक्षित राजस्व प्राप्त हो रहा है और न ही वैध शराब कारोबार सुरक्षित रह पाया है। व्यापारियों ने इस पूरी प्रक्रिया और नीति के परिणामों पर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
व्यापारियों का तर्क है कि राज्य सरकार ने उनकी व्यवहारिक सलाह को नजरअंदाज किया, जिससे बाजार में अस्थिरता पैदा हुई है। संघ के अनुसार, यह स्थिति न केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था के लिहाज से भी चिंताजनक है।
विवाद के मुख्य कारण: भारी राजस्व लक्ष्य और अवैध शराब का बढ़ता ग्राफ
झारखंड के शराब व्यापारियों ने नीति की विफलता के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण गिनाए हैं:
- राजस्व लक्ष्य का दबाव: संघ ने पूर्व में 3400 करोड़ रुपये के राजस्व का व्यवहारिक सुझाव दिया था, जिस पर सहमति भी बनी थी। हालांकि, बाद में सरकार ने इस लक्ष्य को बढ़ाकर व्यापारियों पर अनुचित दबाव डाल दिया।
- पड़ोसी राज्यों से तुलना: झारखंड में शराब के दाम पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी अधिक रखे गए हैं। इसके कारण वैध बिक्री में भारी गिरावट आई है।
- अवैध कारोबार में बढ़ोतरी: ऊंचे दामों और कठिन नियमों के कारण राज्य में अवैध और ‘दो नंबर’ की शराब का कारोबार तेजी से बढ़ा है।
- ईमानदार व्यापारियों को नुकसान: गलत नीतियों के कारण उन व्यापारियों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है जो नियमबद्ध तरीके से काम करना चाहते हैं।
प्रशासन का कड़ा रुख: दुकानों के नवीकरण के लिए नए निर्देश जारी
एक तरफ जहाँ व्यापारी विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्पाद विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुकानों के नवीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सहायक आयुक्त उत्पाद, रांची द्वारा जारी निर्देश के अनुसार:
- राजस्व में वृद्धि: झारखंड उत्पाद नियमावली 2025 के तहत, वार्षिक न्यूनतम प्रत्याभूत राजस्व (MGR) में वृद्धि के साथ ही दुकानों का नवीकरण किया जाएगा।
- डेडलाइन: सभी अनुज्ञाधारियों (Licensees) को अपनी लाइसेंस नवीकरण के लिए 20 जनवरी 2026 तक आवेदन कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है।
- स्थल परिवर्तन की छूट: व्यापारियों को नियमानुसार अपनी दुकानों का स्थान बदलने (Relocation) के लिए आवेदन देने का अवसर भी दिया गया है।
व्यापारी संघ की सरकार से प्रमुख मांगें
झारखंड शराब व्यापारी संघ के महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार इन मांगों पर विचार नहीं करती है, तो राज्य की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- शराब की कीमतों को पड़ोसी राज्यों के स्तर पर लाकर उनमें एकरूपता लाई जाए।
- अव्यवहारिक राजस्व लक्ष्यों को तुरंत घटाकर वास्तविक स्थिति के अनुरूप बनाया जाए।
- नीति बनाने से पहले व्यापारियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए ताकि एक व्यवहारिक नीति तैयार हो सके।
आर्थिक और कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव
व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने शराब नीति की समीक्षा नहीं की, तो इसका खामियाजा राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों को भुगतना पड़ेगा। अवैध शराब की बिक्री बढ़ने से न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि अपराध की दर बढ़ने का भी खतरा है। वर्तमान में, दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक के शराब उठाव के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि बाजार में स्टॉक की कमी न हो।
आगे की राह: आंदोलन या समाधान?
वर्तमान स्थिति को देखते हुए झारखंड में शराब व्यवसाय को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। 20 जनवरी तक लाइसेंस नवीकरण की समय सीमा तय है, जबकि व्यापारी संघ आंदोलन की चेतावनी दे रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य सरकार व्यापारियों के साथ मेज पर बैठकर कोई बीच का रास्ता निकालती है या अपने कड़े रुख पर कायम रहती है।
झारखंड शराब नीति 2025 ने सरकार और व्यापारियों के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर दी है। राजस्व संग्रह और व्यवहारिक व्यापार के बीच का यह संतुलन ही तय करेगा कि राज्य का आबकारी विभाग अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाता है या नहीं।










