रांची: झारखंड विधानसभा के इतिहास में जो कभी नहीं हुआ, वह मानसून सत्र के चौथे दिन देखने को मिला। JPSC परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सदन में ऐसा प्रचंड हंगामा हुआ कि इतिहास में पहली बार कोई सत्र अपनी तय अवधि पूरी किए बिना ही समय से पहले समाप्त कर दिया गया।
मंगलवार को दूसरी पाली की कार्यवाही शुरू होते ही सदन जंग का मैदान बन गया। विपक्ष के तेवरों से साफ था कि वह आज सरकार को बख्शने के मूड में नहीं है। JPSC मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक मचे इस घमासान ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है।
सदन में उस वक्त सब हैरान रह गए जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के वक्तव्य के दौरान ही बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने वेल में आकर खुलेआम नोट लहरा दिए। इस अप्रत्याशित कदम के बाद सदन में नारेबाजी और तेज हो गई, जिससे माहौल पूरी तरह बेकाबू हो गया।
सड़क से सदन तक Ruckus: जब वेल में लहराए गए नोट
ग्राउंड से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर जैसे ही भोजन अवकाश के बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सीधे आसन के सामने पहुंच गए। विधायकों के हाथों में JPSC धांधली के खिलाफ तख्तियां थीं और जुबान पर सीबीआई जांच की मांग।
इसी हंगामे के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोर्चा संभाला और बोलना शुरू किया। लेकिन विपक्ष का शोर इतना ज्यादा था कि उनकी आवाज दबने लगी। तभी पूर्व मंत्री और सीनियर विधायक सीपी सिंह ने अपने कुर्ते की जेब से नोटों की गड्डी निकाली और आसन के ठीक सामने लहराने लगे। सत्ता पक्ष के विधायकों ने तुरंत इसका कड़ा विरोध किया और दोनों तरफ से तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
हंगामे के बीच पारित हुआ बजट संशोधन विधेयक
सदन में चल रहे अभूतपूर्व शोर-शराबे और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति के बीच ही सरकार ने अपना विधायी कार्य निपटाया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भारी हंगामे के बीच ही ‘झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026’ सदन के पटल पर रखा।
बिना किसी विस्तृत चर्चा के, केवल ध्वनिमत और हंगामे के शोर के बीच इस महत्वपूर्ण विधेयक को पास करा लिया गया। इसके तुरंत बाद विपक्ष का गुस्सा और भड़क गया।
| घटनाक्रम | स्थिति / विवरण |
| सत्र की अवधि | 5 दिवसीय (चौथे दिन ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित) |
| मुख्य मुद्दा | JPSC परीक्षा की सीबीआई (CBI) जांच की मांग |
| प्रमुख घटना | बीजेपी विधायक सीपी सिंह द्वारा सदन में नोट लहराना |
| पारित विधेयक | झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक, 2026 |
“भारी मन से कर रहा हूँ स्थगित…” — स्पीकर की लाचारगी
सदन के भीतर का दृश्य बता रहा था कि अब कार्यवाही चलाना असंभव है। विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो के चेहरे पर निराशा साफ देखी जा सकती थी। उन्होंने कांपती आवाज और बेहद गंभीर लहजे में सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने अनिश्चितकाल के लिए स्थगन की घोषणा कर दी।
“झारखंड विधानसभा के इतिहास में यह पहला मौका है जब मैं अत्यंत भारी मन से सभा की कार्यवाही को तय समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर रहा हूँ।”
— रविंद्र नाथ महतो, अध्यक्ष, झारखंड विधानसभा
[यहाँ विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो के बयान का वीडियो क्लिप एम्बेड करें]
स्थानीय प्रभाव और आगे की राह
विधानसभा का सत्र समय से पहले समाप्त होना केवल राजनीतिक हार नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भरोसे पर करारा प्रहार है। JPSC परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर अभ्यर्थियों में आक्रोश चरम पर है।
अब देखना यह होगा कि क्या हेमंत सरकार विपक्ष के इस दबाव के आगे झुकते हुए JPSC मामले की जांच सीबीआई को सौंपेगी, या फिर यह मुद्दा आगामी दिनों में सड़क पर और विकराल रूप लेगा। फिलहाल, सदन तो स्थगित हो गया है, लेकिन झारखंड की राजनीति का तापमान आने वाले दिनों में और चढ़ना तय है।











