Ranchi: शनिवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची शहर में ऐसा कदम उठाया, जिसने न केवल आम लोगों को चौंकाया बल्कि प्रशासनिक महकमे में भी हलचल पैदा कर दी। मुख्यमंत्री बिना किसी सुरक्षा काफिले और पूर्व सूचना के शहर के औचक निरीक्षण पर निकल पड़े। उनकी सादगी भरी इस पहल का उद्देश्य केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई को प्रत्यक्ष रूप से देखना था।
मुख्यमंत्री जिस वाहन में सवार थे, उसमें वे स्वयं मौजूद हैं—इसकी भनक किसी को नहीं थी। यही कारण रहा कि निरीक्षण पूरी तरह स्वाभाविक और वास्तविक परिस्थितियों में संपन्न हुआ। उन्होंने शहर के कई प्रमुख इलाकों का दौरा किया और आम नागरिकों की तरह ही सड़क, यातायात और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति को देखा।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने यातायात व्यवस्था की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया। सड़कों पर लगने वाले जाम, अव्यवस्थित पार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथों की स्थिति और ट्रैफिक नियमों के पालन की हकीकत को उन्होंने करीब से परखा। यह निरीक्षण किसी औपचारिक रिपोर्ट से कहीं अधिक प्रभावी माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने शहर की साफ-सफाई, सार्वजनिक शौचालयों, बस स्टॉप, चौक-चौराहों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की स्थिति का भी जायजा लिया। कई स्थानों पर उन्होंने शहरी आधारभूत संरचना में मौजूद खामियों को स्वयं महसूस किया, जो आम तौर पर फाइलों में दर्ज आंकड़ों से अलग नजर आती हैं।
जमीनी हकीकत से नीतियों को जोड़ने की कोशिश
इस औचक निरीक्षण को सरकार की कार्यशैली में संवेदनशीलता और जवाबदेही का संकेत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि नीतियां तभी प्रभावी बनती हैं, जब उनका आधार जमीनी अनुभव हो। इसी सोच के तहत उन्होंने प्रशासनिक रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं हालात देखने का निर्णय लिया।
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि आज उन्होंने रांची शहर का औचक निरीक्षण किया और यह समझने का प्रयास किया कि आम नागरिकों को रोजमर्रा के जीवन में किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के प्रत्येक शहर में आवागमन, नागरिक सुविधाओं और जीवन की सुगमता को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार इस दिशा में पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह संकल्प दोहराया कि झारखंड का हर शहर सुरक्षित, समावेशी और खुशहाल बने। उनका कहना है कि शहरी विकास का अर्थ केवल इमारतें और सड़कें नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण है, जहां हर नागरिक को सम्मान और बेहतर जीवन सुविधाएं मिलें।
प्रशासनिक हलकों में इस औचक निरीक्षण को एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अब लापरवाही और दिखावटी व्यवस्थाओं के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री का यह कदम आने वाले दिनों में शहरी प्रशासन को और अधिक सक्रिय व जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह औचक दौरा केवल एक निरीक्षण नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में शहरी व्यवस्था में दिख सकता है।










