Ranchi | झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET 2026) संपन्न होने के बाद अब प्रश्नपत्र में कथित त्रुटियों, ओएमआर शीट भरने में हुई परेशानी और ग्रेस मार्क्स की मांग का मुद्दा सामने आया है। ऑल स्टेट बीएड-डीएलएड स्टूडेंट एसोसिएशन, झारखंड के अध्यक्ष काजल मंडल ने परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को कम से कम 20 ग्रेस मार्क्स देने की मांग की है। उनका कहना है कि करीब 10 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित परीक्षा में कई अभ्यर्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
प्रेस वार्ता में काजल मंडल ने कहा कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की छपाई और प्रश्नों की व्यवस्था में गड़बड़ी थी। इसके कारण अभ्यर्थियों को प्रश्न समझने और ओएमआर शीट भरने में अतिरिक्त समय लगा। उन्होंने दावा किया कि कुछ अभ्यर्थी इसी वजह से अपने सभी उत्तर दर्ज नहीं कर पाए।
हालांकि, प्रश्नपत्र में कितनी त्रुटियां थीं और उनका अभ्यर्थियों के परिणाम पर कितना असर पड़ा, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग और सवालों पर उठाए सवाल
काजल मंडल ने दावा किया कि कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ, दोनों स्तरों की परीक्षा में प्रश्नपत्र की छपाई और पृष्ठों के क्रम को लेकर समस्याएं थीं।
उनके मुताबिक, प्रश्नों की व्यवस्था सही नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों को पन्ने बार-बार पलटने पड़े। इससे समय प्रबंधन प्रभावित हुआ और कुछ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर दर्ज करने से छूट गए।
उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों का परिणाम महज दो, चार, पांच या दस अंकों के अंतर से प्रभावित हो सकता है, उनके मामले में इन समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
मंडल ने एक प्रश्न के उत्तर विकल्पों पर भी आपत्ति जताई। उनका दावा है कि संबंधित प्रश्न में दिए गए विकल्प उचित उत्तर से मेल नहीं खाते थे। उन्होंने इस प्रकार के सवालों की समीक्षा की मांग की है।
कम से कम 20 ग्रेस मार्क्स देने की मांग
काजल मंडल ने कहा कि परीक्षा करीब दस वर्षों के बाद आयोजित हुई है। ऐसे में अनेक अभ्यर्थियों के लिए यह शिक्षक पात्रता हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर था।
उनका कहना है कि परीक्षा में कथित प्रश्नगत त्रुटियों और लंबे अंतराल को देखते हुए अभ्यर्थियों को कम से कम 20 ग्रेस मार्क्स दिए जाने चाहिए।
उन्होंने अन्य राज्यों में शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के दौरान ग्रेस मार्क्स दिए जाने के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। साथ ही दावा किया कि झारखंड में भी पूर्व में ऐसी राहत दी गई थी।
हालांकि, इन उदाहरणों और ग्रेस मार्क्स संबंधी पूर्व निर्णयों के आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध ट्रांसक्रिप्ट में शामिल नहीं हैं।
2023 की शिक्षक नियुक्ति से वंचित रहने का दावा
काजल मंडल ने कहा कि 2016 के बाद लंबे समय तक JTET परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण अनेक प्रशिक्षित अभ्यर्थी शिक्षक नियुक्ति के अवसरों से वंचित रह गए।
उन्होंने वर्ष 2023 की लगभग 26 हजार पदों वाली सहायक आचार्य नियुक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि पात्रता परीक्षा का अवसर नहीं मिलने से कई अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाए।
मंडल का दावा है कि करीब 50 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थियों के लिए मौजूदा परीक्षा अंतिम अवसर साबित हो सकती है। हालांकि, इस आंकड़े के समर्थन में कोई आधिकारिक अभ्यर्थी-वार विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे अभ्यर्थियों को राहत देने पर विचार किया जाए, जिससे वे आगामी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर प्राप्त कर सकें।
मॉडल प्रश्नपत्र नहीं मिलने से तैयारी प्रभावित होने का आरोप
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने परीक्षा से पहले मॉडल प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले मॉडल सेट उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें यह सामग्री नहीं मिली।
मंडल के मुताबिक, परीक्षा का पाठ्यक्रम व्यापक था। कंप्यूटर, भाषा, गणित, विज्ञान, इतिहास, भूगोल और अन्य विषयों की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को प्रश्नों के स्तर और प्रारूप की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल के बाद आयोजित परीक्षा में मॉडल प्रश्नपत्र उपलब्ध होने से अभ्यर्थियों को तैयारी की दिशा तय करने में सहायता मिलती।
प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने यह सवाल भी उठाया कि मॉडल प्रश्नपत्र और परीक्षा पैटर्न से जुड़ी आपत्तियां परीक्षा से पहले क्यों नहीं उठाई गईं। इसके जवाब में मंडल ने कहा कि परीक्षा से पहले मॉडल सेट उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
महिला अभ्यर्थियों और पारा शिक्षकों के लिए विशेष राहत की मांग
काजल मंडल ने महिला अभ्यर्थियों की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उनके लिए विशेष छूट की मांग की।
उनका कहना था कि कई महिलाएं पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच परीक्षा की तैयारी करती हैं। लंबे समय बाद परीक्षा आयोजित होने से उनके लिए अवसर सीमित हो गए हैं।
उन्होंने पारा शिक्षकों की व्यस्तता को भी मुद्दा बनाया। मंडल ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कार्यों में लगे कई शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
उन्होंने सरकार से इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राहत पर विचार करने की अपील की।
JAC अध्यक्ष और मुख्यमंत्री सचिवालय को पत्र देने का दावा
काजल मंडल ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री सचिवालय और राज्य के मुख्य सचिव को पत्र दिया है।
उन्होंने JAC और राज्य सरकार से प्रश्नपत्र की कथित त्रुटियों की समीक्षा करने तथा ग्रेस मार्क्स के मुद्दे पर निर्णय लेने की मांग की।
मंडल ने परीक्षा आयोजन के लिए JAC अध्यक्ष का आभार भी जताया और दावा किया कि परीक्षा कदाचार मुक्त रही। साथ ही उन्होंने कहा कि परीक्षा के आयोजन से जुड़ी सकारात्मक बातों के बावजूद अभ्यर्थियों की समस्याओं पर विचार किया जाना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में JAC या राज्य सरकार की ओर से इन मांगों पर किसी आधिकारिक निर्णय का विवरण नहीं है।
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