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Bokaro
यह खबर कहाँ की हैबोकारो, झारखंड

बोकारो DC आवास परिसर में मंदिर निर्माण पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मुद्दा उठा

बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले में उपायुक्त के आवासीय परिसर में मंदिर निर्माण का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिसर में मंदिर का बाहरी ढांचा तैयार हो चुका है। हालांकि, अपरिहार्य कारणों से फिलहाल निर्माण कार्य बंद है। इस निर्माण को लेकर सरकारी जमीन पर धार्मिक स्थलों के निर्माण से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन का सवाल उठ रहा है।

मंदिर का ढांचा तैयार, निर्माण कार्य फिलहाल बंद

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बोकारो उपायुक्त के आवासीय परिसर में मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था। मंदिर का बाहरी ढांचा तैयार होने के बाद निर्माण कार्य रुक गया।

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हालांकि, निर्माण किसकी अनुमति से शुरू हुआ, इसके लिए धन की व्यवस्था कहां से की गई और काम बंद होने का वास्तविक कारण क्या है, इसकी जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

सरकारी जमीन पर धार्मिक निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक स्थलों के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पूर्व में निर्देश जारी कर चुका है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, केंद्र सरकार बनाम गुजरात से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सार्वजनिक स्थानों पर पहले से बने धार्मिक स्थलों की जानकारी मांगी थी।

इस मामले के संदर्भ में झारखंड सरकार ने वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थलों और सरकारी जमीन पर नए धार्मिक निर्माण नहीं किए जाने की बात कही थी।

हालांकि, इन निर्देशों का बोकारो उपायुक्त के आवासीय परिसर में चल रहे निर्माण पर किस प्रकार प्रभाव पड़ता है, यह संबंधित आदेश, जमीन के रिकॉर्ड और निर्माण की अनुमति की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंदिर निर्माण की अनुमति और जमीन की स्थिति अहम

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उपायुक्त का आवासीय परिसर जिस जमीन पर स्थित है, उसकी कानूनी स्थिति क्या है और मंदिर निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं।

यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि निर्माण कार्य किस समय शुरू हुआ और इसे किन कारणों से रोका गया।

संबंधित रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि निर्माण किसी न्यायिक निर्देश या लागू प्रशासनिक नियम का उल्लंघन करता है या नहीं।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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