गालूडीह/जमशेदपुर: घाटशिला के गालूडीह थाना परिसर में 26 अक्टूबर दिन सोमवार को जमीन विवाद की सुनवाई के दौरान एक आदिवासी महिला ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया। पुलिस ने उन्हें जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घाटशिला एसडीपीओ विकास आनंद लगोरी के अनुसार, महिला की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और घटना की जांच की जा रही है।
बड़ाखुर्शी गांव की रहने वाली महिला ने जमीन विवाद में दर्ज मामले में कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्राथमिकी में नामजद लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई है और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी नहीं जोड़ी गई हैं।
12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की बात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला ने जमीन विवाद को लेकर 12 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सोमवार को वह इसी मामले में कार्रवाई की मांग लेकर गालूडीह थाना पहुंची थीं।
थाना प्रभारी अंकु कुमार के समक्ष बातचीत के दौरान उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी और संबंधित धाराएं जोड़ने की मांग रखी। इसी दौरान महिला ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया। पुलिस उन्हें सरकारी वाहन से एमजीएम अस्पताल ले गई।
महिला के आरोपों के संबंध में उपलब्ध विवरण में प्राथमिकी की प्रति, उसमें दर्ज धाराओं और अब तक हुई पुलिस कार्रवाई का ब्योरा शामिल नहीं है।
करीब 5 एकड़ 74 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विवाद पायरागुड़ी गांव के बिरहीगोड़ा टोला के पास एनएच-33 किनारे स्थित करीब पांच एकड़ 74 डिसमिल रैयती जमीन से जुड़ा है। यह जमीन स्वर्गीय मनोरंजन भूमिज की बताई गई है।
जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर भूमिज समुदाय के दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद होने की जानकारी सामने आई है। पूर्व में भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट और तनाव की घटनाएं होने की बात कही गई है। जमीन के स्वामित्व संबंधी दावों की पुष्टि राजस्व अभिलेखों से होना बाकी है।
एसडीपीओ ने जांच और कार्रवाई की बात कही
घाटशिला एसडीपीओ विकास आनंद लगोरी ने बताया कि घटना की जानकारी मिली है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी।
उन्होंने बताया कि महिला को अस्पताल पहुंचाया गया है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। हालांकि, महिला की ओर से लगाए गए गिरफ्तारी नहीं होने और एससी-एसटी अधिनियम की धाराएं नहीं जोड़ने के आरोपों पर उपलब्ध विवरण में पुलिस का बिंदुवार जवाब शामिल नहीं है। नामजद दूसरे पक्ष का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है।














