रांची। रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट ने पर्यटन सचिव की गैरहाजिरी पर नाराजगी जताई। अदालत ने उन्हें पिछली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा था।
सरकार ने अदालत को बताया कि पर्यटन सचिव नीति आयोग के एक कार्यक्रम के लिए राज्य से बाहर हैं और उनकी उपस्थिति के लिए समय मांगा। इसके बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई।
अब 5 अक्टूबर को पर्यटन सचिव और रामगढ़ के उपायुक्त, दोनों को सशरीर उपस्थित होना होगा। इस सुनवाई से मंदिर विकास की योजना और प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट की नाराजगी की वजह क्या है?
मंदिर परिसर के विकास को लेकर हाईकोर्ट पहले भी सरकार के जवाब से असंतोष जता चुका है। 21 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने पर्यटन सचिव को 29 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। मंगलवार को उनके उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट ने अगली तारीख पर उनकी और रामगढ़ उपायुक्त की मौजूदगी जरूरी कर दी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा।
254 दुकानदारों की रोजी-रोटी भी मुद्दा
रजरप्पा मंदिर परिसर के पुनर्विकास से प्रभावित 254 दुकानदारों का पुनर्वास इस मामले का अहम हिस्सा है। अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट ने उन्हें दुकानें उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश दिए थे। बाद की रिपोर्ट के अनुसार, हटाए गए दुकानदारों को कारोबार फिर शुरू करने के लिए अस्थायी जगह दी गई। इसलिए स्थायी दुकान आवंटन और उसकी प्रगति पर प्रशासन की स्थिति अहम रहेगी।
विकास योजना में क्या प्रस्ताव है?
करीब 102 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार, दुकानों को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है। रजरप्पा में विकास कार्य आगे बढ़ने के साथ यह भी देखना होगा कि वहां लंबे समय से कारोबार कर रहे लोगों की आजीविका कैसे सुरक्षित रखी जाती है।
अब 5 अक्टूबर को क्या देखना होगा?
अगली सुनवाई में पर्यटन सचिव और रामगढ़ उपायुक्त को अदालत के सामने उपस्थित होना है। परियोजना की प्रगति तथा दुकानदारों के पुनर्वास पर प्रशासन क्या जानकारी देता है, उससे रजरप्पा मंदिर विकास मामले की अगली दिशा साफ होगी।












