Ranchi | झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों के कड़े संघर्ष के आगे आखिरकार हेमंत सरकार झुक गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विवादों में घिरी JSSC CGL समेत TDPL एजेंसी द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला सुनाया है।
सरकार के इस ऐलान के बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मूसलाधार बारिश के बीच छात्र तिरंगा लहराते, मिठाइयां बांटते और एक-दूसरे को गले लगाते नजर आए।
हालांकि, इस ऐतिहासिक फैसले के बाद भी युवाओं ने साफ कर दिया है कि उनका धरना खत्म नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह उनकी पहली जीत है, पूरी जंग अभी बाकी है।
बारिश में गूंजे नारे, स्टेडियम में बंटी मिठाइयां
जैसे ही मुख्यमंत्री का फैसला सार्वजनिक हुआ, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम का माहौल पूरी तरह बदल गया। हफ्तों से दिन-रात धरना दे रहे अभ्यर्थियों के चेहरों पर संतोष और जीत का भाव साफ देखा गया।
छात्रों ने इसे झारखंड के युवाओं की एकजुटता और न्याय की पहली बड़ी जीत बताया। बारिश के बीच छात्र ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाते रहे।

छात्र नेताओं का रुख: ‘परीक्षा रद्द होना सिर्फ पहला पड़ाव, CBI जांच तक अनशन जारी’
धरना स्थल पर मौजूद छात्र नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन इससे पूरा सिस्टम ठीक नहीं हो जाता।
1. रवींद्र पासवान बोले- “CBI जांच से कम कुछ भी मंजूर नहीं”
अनशन पर बैठे छात्र नेता रवींद्र पासवान ने आंदोलन को समर्थन देने वाले सभी युवाओं, अभिभावकों और मीडिया का आभार जताया।
रवींद्र ने कड़े शब्दों में कहा:
“परीक्षा रद्द करने की हमारी पहली मांग मान ली गई है, लेकिन यह आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक धांधली की निष्पक्ष CBI जांच का आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता। जब तक जांच एजेंसी तय नहीं होती, छात्र धरना स्थल से एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।”
2. पीयूष कुमार: “11 से 13 के मुद्दे पर रुख साफ करे सरकार”
छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा कि यह लड़ाई के पहले चरण की जीत है। उन्होंने कहा:
“हम इस फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन ’11 से 13′ से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर हमारी मांगें जस की तस हैं। पूरी भर्ती प्रक्रिया के विवादित पहलुओं को दुरुस्त किए बिना यह संघर्ष नहीं थमेगा।”
3. देवेंद्र नाथ महतो का बयान: “सिस्टम में व्यापक सुधार की लंबी लड़ाई बाकी”
आंदोलन की अगुवाई कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने कहा:
“छात्रों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सिस्टम के भ्रष्टाचार को उजागर किया। सरकार, प्रशासन और आम जनता का आभार, लेकिन असली लड़ाई शिक्षा और चयन प्रणाली में पारदर्शी सुधार लाने की है। इसके लिए आगे की कानूनी व रणनीतिक योजना जल्द सामने रखी जाएगी।”

अब आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद अब गेंद पूरी तरह प्रशासन और आयोग के पाले में है।
- पुनः परीक्षा की रूपरेखा: सरकार को अब एक नई, पारदर्शी और फूल-प्रूफ परीक्षा प्रणाली का खाका तैयार करना होगा ताकि भविष्य में पेपर लीक या एजेंसी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
- CBI जांच पर फैसला: आंदोलनकारी छात्रों का मुख्य फोकस अब निष्पक्ष जांच पर है। क्या सरकार इस मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपेगी? यह सवाल अब झारखंड की सियासत और युवाओं के बीच सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।











