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नशे में डूबे युवा भारत से कैसे करें सफलता की उम्मीद – अतुल मलिकराम

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यार वीकेंड का क्या प्लान है? वीकेंड का मतलब अब ज्यादातर लोगों खासकर युवाओं के लिए केवल दारू पार्टी बनकर रह गया है, बीते शनिवार को मुझे इस बात का यकीन भी हो चला, दरअसल शनिवार रात मैं अपने एक रिश्तेदार के घर गया था, रात को घर लौटने में करीब पौने 12 बज गये, तभी मैने सड़क के बीचो-बीच कुछ युवाओं को आपस में बहस करते हुए देखा, इन युवाओं की उम्र तकरीबन 18 से 20 वर्ष होगी, इनमें कुछ बच्चियां भी शामिल थी। ये सब के सब शराब के नशे में चूर थे। तभी एक लड़के ने एक लड़की पे हाथ उठा दिया। ये देखकर मुझसे रहा नहीं गया और मैं कार से नीचे उतर गया, जैसे ही मैने लड़के को रोकना चाहा तो लड़की बोल पड़ी कि ‘आप हमारे पर्सनल मैटर में मत पड़िए।‘ लेकिन मुझसे रहा नही गया और मै बोल पड़ा कि ‘बेटा, अगर मेरी जगह आपके पिता होते तो क्या आप यही बोलती, आपके पिता को जान कर कैसा लगेगा कि जिस बेटी का भविष्य बनाने के लिए वो दिन-रात एक कर रहे हैं, वो बेटी खुद को नशे में डूबो रही है, किसी के हाथों पीट रही है।‘ वो लड़की चुपचाप वहां से चली गई।
शराब के नशे में डूबे युवाओं की तादाद लगातार बढ़ती ही जा रही है।  भविष्य उज्जवल बनाने का सपना आंखों में ले घर से निकलने वाले युवाओं की आंखें अक्सर नशे में डूबी मिलती है। सरकार की हालिया सर्वेक्षण रिपोर्ट बतलाती है कि युवा भारत मे करीब 16 करोड़ लोग नशे में लिप्त हैं। ये सर्वे 186 जिलों का है, जबकि भारत में वर्तमान में 719 जिले हैं, ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि युवा भारत किस तेजी से नशे में डूब रहा है। युवा भारत को सशक्त बनाने के लिए उसे नशामुक्त बनाना और भी जरूरी बन जाता है, क्योंकि एक राष्ट्र तभी सशक्त बन सकता है, जब वो स्वस्थ हो, शराब के नशे में डूबे राष्ट्र से सफलता की उम्मीद नही की जा सकती। 

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