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रांची में लालू से मिलकर येचुरी ने कहा 2019 चुनाव के बाद लेंगे गठबंधन पर फैसला

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Ranchi: 2019 लोकसभा चुनावों से पहले देश में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच शनिवार को माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने रांची में लालू प्रसाद से अस्पताल में मुलाकात की. लालू से मिलकर बाहर निकलने पर उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस तरह की तस्वीरें उभर रही है उसमें साफ है कि केंद्र में सरकार बनाने के लिए लोकसभा चुनाव के बाद ही कोई गठबंधन बनेगा.

चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद फिलहाल इलाज के लिए रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती है. और इन दिनों अलग- अलग दलों के कई नेताओं का उनसे मुलाकात का सिलिसला भी जारी है.

उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन के सिलसिले में येचुरी ने कहा कि हर बार राज्यों के अंदर अलग-अलग गठबंधन बनते हैं. यह समीकरणों, विषयों और वक्त के हिसाब से भी तय होते हैं. बेशक सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए सपा-बसपा ने सीटें छोड़ी है. लेकिन उत्तरप्रदेश में कांग्रेस को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया है.

बिहार में देखा जाए

सातीराम येचुरी ने यह भी कहा कि बिहार में गठबंधन कौन सा स्वरूप लेगा इसे देखा जाना चाहिए. महाराष्ट्र और तामिलनाड़ु में भी अलग-अलग गठबंधन होगा. और गठबंधन की राजनीति में देश का यह इतिहास भी रहा है. हिन्दुस्तान में विविधता को देखकर यही हो सकता है.

Lalu

उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो भी वैकल्पिक सरकार बनाएगा उसका गठबंधन चुनावो के बाद ही बनेगा. माकपा नेता ने इसके उदाहरण भी गिनाए. उन्होंने कहा कि 1993 में देवगोड़ा जी के नेतृत्व में यूनाइटेड फ्रंट की सरकार बनी. 1998 में अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार भी इसी तरह से बनी. 2004 में भी डॉ मनमोहन सिंह की सरकार भी चुनावों बाद के गठबंधन से बनी.

विपक्षी दलों की अब होती रही साझा बैठकों के बारे में उन्होंने कहा कि वही लोग साथ बैठ रहे हैं जो साथ चुनाव लड़े हैं.

लालू से मुलाकात और बात के सवाल पर येचुरी ने कहा कि वे हमारे पुराने मित्र हैं. लंबे दिनों के बाद मिले हैं. बहुत सारी बातें साझा की है. एक बात समान है कि लालू जी हों या हमारी पार्टी सबकी सोच यही है कि भारत को बचाने के लिए बीजेपी को शासन से हटाना होगा.

आलोक वर्मा

सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को हटाने के सवाल पर येचुरी ने कहा कि यह जल्दीबाजी मे लिया गया फैसला है. साथ ही वर्कामा के खिलाफ कार्रवाई भी गलत तरीके से हुई. आलोक वर्मा और सीबीआई के साथ यह सलूक साबित करता है कि मोदी साहब के नेतृत्व में बहुत बड़े घोटाले हुए हैं.

 

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