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खूंटी के चितरामू गांव में पत्थगड़ी को ग्रामीणों ने क्‍यों उखाड़ फेंका

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#Khunti : अपने राजनीतिक और आर्थिक स्वार्थ सिद्धि के लिए गैर पारंपरिक ढंग से दर्जनों गांवों में गैर परंपरागत और देश विरोधी पत्थलगड़ी कर सीधे-सादे आदिवासियों को गैर आदिवासियों और सरकार के खिलाफ भड़काने वाले तत्वों को आखिरकार मुंह की खानी पड़ी. खूंटी प्रखंड के सिलादोन पंचायत के चितरामू गांव की ग्रामसभा ने गैर परंपरागत पत्थगड़ी कों उखाड़ फेंक कर देश तोड़क तत्वों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ दिया.

ग्रामीणों ने कहा कि ऐसी पत्थलगड़ी को उखाड़ने का जा सिलसिला आज शुरू हुआ. वह दूसरे गांव तक जायेगा. सबसे बड़ी बात कि ऐसे पत्थलगड़ी को हटाने में न प्रशासन की कोई भूमिका रही और न किसी अन्य का. जो ग्रामसभा स्वार्थी नेताओं के बहकावे में आकर सरकारी योजनाओं का बहिष्कार कर रही थी. गैर आदिवासियों, सरकारी अधिकारियों, यहां तक कि पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा रही थी.

वहीं ग्रामसभा के लोगों को जब पत्थलगड़ी के स्वयंभू नेताओं की करतूतों की जानकारी मिली, तो ग्रामीणों को सच्चाई समझते देर नहीं लगी. पत्थलगड़ी की आड़ संविधान की गलत व्याख्या करते हुए ग्राम सभा को संसद और विधानसभा से भी बड़ी और सर्वाधिकार संपन्न संस्था और आदिवासियों को देश का राजा व गैर आदिवासियों के साथ सरकारी अधिकारियों को नौकर बता कर ग्रामीणों को भड़काने वालों को आज ग्रामसभा के लोग खुद ढूंढ रहे हैं.

पत्‍थलगड़ी उखाड़ फेंकने की असली वजह

जानकारी के अनुसार सिलादोन की ग्रामसभा ने ग्राम प्रधान अशोक मुंडा की अध्यक्षता में बैठक कर पत्थलगड़ी से हो रहे नफा-नुकसान की समीक्षा की. समीक्षा में सभी ने कहा कि यह आदिवासियों को अनपढ़ और आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश है. इससे आदिवासियों और गैर आदिवासियों के बीच दूरी बढ़ रही है.

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यह समाज के हक में नहीं है. अंततः सर्वसम्मति से ग्रामसभा ने पत्थलगड़ी को उखाड़ने का निर्णय लिया और इसकी लिखित जानकारी एसडीओ को दी. इसके पूर्व पत्थलगड़ी की पूजा गांव के पहानों द्वारा विधि विधान से की गयी. ग्राम प्रधान अशोक मुंडा और लीलू पाहन द्वारा भोज-भात की व्यवस्था की गयी थी.

बता दें कि इस गांव में 17 जून को पत्थलगड़ी की गयी थी. मौके पर खूंटी की प्रखंड प्रमुख रूकमिला देवी, उप प्रमुख जितेंद्र कश्यप सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे. ग्राम सभा के लोगों ने कहा कि पत्थलगड़ी से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने स्वीकार किया कि देश तोड़क पत्थलगड़ी के स्वयंभू नेताओं युसूफ पूर्ति, बलराम समद, जॉन जुनास तिड़ू आदि नेताओं ने उन्हें मूर्ख बनाया.

उनके बहकावे में आकर ग्रामीण सरकारी योजनाओं का बहिष्कार करते रहे. इसका परिणाम यह हुआ कि आज तक किसी को न घर मिला और न कोई सरकारी लाभ, जबकि ऐसे नेता खुद सरकारी योजनाओं का लाभ लेते रहे. दूसरों के आधार कार्ड और वोटर आईडी को जलवा दिया और अपना सब कुछ सुरक्षित रख लिया.

बता दें कि कथित आदिवासी महासभा के नाम देश तोड़क तत्वों ने खूंटी जिले के सैकड़ों गांवों में प्त्थलगड़ी कर संविधान के खिलाफ काम करे हुए ग्रामीणों को सरकारी अनाज, चिकित्सा, आवास, शौचालय और सरकारी सुविधा लेने पर रोक लगा दी थी.

भूमिगत हो गये पत्‍थलगड़ी के स्‍वयंभू नेता

सरकारी स्कूलों को बंद करा दिया था. यहां तक कि आदिवासियों पर फरमान जारी किया गया कि जो व्यक्ति सरकारी सुविधा लेने पर उसे समाज से निकाल दिया जायेगा. युसूफ पूर्ति के गांव उदबुरू में तो बैंक ऑफ ग्रामसभा भी खुल गया था. सैकड़ों लोगों ने वहां रकम जमा करायी थी,लेकिन ग्रामसभा का नेता युसूफ पूर्ति बैंक में जमा लाखों रुपये लेकर फरार हो गया.

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प्रशासन की कड़ाई को देखते हुए युसूफ पूर्ति, बलराम समद, जॉन जुनास तिड़ू जैसे नेता भूगित हो गये, जबकि कृष्णा हांसदा, विजय कच्छप, बिरसा मुंडा जैसे दो दर्जन नेताओं को पुलिस ने जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. घाघरा लाठीचार्ज व और सामूहिक दुष्कर्म के बाद बदली स्थिति खूंटी प्रखंड के घाघरा में हुई पत्थलगड़ी को रोकने गयी पुलिस के जवानों को ग्रामीणों द्वारा खदेड़े जाने और सांसद कड़िया मुंडा के अनिगड़ा चंडी डीह गांव स्थित में आवास में हमला कर चार गार्ड का हथियार सहित अपहरण करने के बाद प्रशासन के धैर्य का बांध टूट गया.

पुलिस ने लापता जवानों को खोजने में ग्रामीणों से मदद मांगी, पर ग्रामीणों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया. पुलिस ने भी लाठी चार्ज किया, जिसमें एक ग्रामीण की मौत हो गयी.

इस घटना के बाद पत्थलगड़ी के अगुवा भूमिगत हो गये और भयभीत घाघरा के ग्रामीण भी गांव छोड़ कर भाग गये. उसी दौरान कोचांग गांव में नाटक मंडली के पांच महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हो गयी. इसमें भी ग्रामसभा के लोगों के शामिल रहने की बात उजागर हो गयी. इससे कोचांग के साथ ही ग्रामसभा की काफी बदनामी हुई.

गैंगरेप के दोषियों को सामने लाने में पुलिस की मदद कर रहे ग्रामीण

धीरे-धीरे ग्रामीण भी सच्चाई से अवगत होने लगे और प्रशासन की मदद करने लगे. पुलिस के रूख और बदनामी से बचने के लिए ग्रामसभा ने कहा कि वह गैंग रैप के अभियुक्तों को खुद खोजकर सजा देंगे. बता दें कि अब तक इस कांड से जुड़े ईसाई धमगुरू फादर अल्फोंस सहित पांच अपराधियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. कांकी में अधिकारियों के बाद बढ़ गया था मनोबल वैसे तो पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा रही है, पर गैर संवैधानिक और आदिवासी रीति-रिवाज के खिलाफ पत्थलगड़ी कर समाज में आतंक फैलाने वाले समाज विरोधी तत्वों का मनोबल कांकी में एसपी, एसडीपीओ, डीएसपी सहित कई अधिकारियों को रात भर बंधक बनाये जाने और प्रशासन द्वारा ऐसे तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं होने से उनका मनोबल बढ़ता गया.

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ऐसे तत्वों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार बंधक बनाया. ग्रामीणों को राजा और अधिकारियों को नौकर बता कर प्रशासन का खूब उपहास उड़ाया. इसके बाद भी पुलिस संयम बरतती रहीे, पर जब सांसद के गार्ड का अपहरण हो गया और पांच युवतियों के साथ गैंग रैप की घटना हुई, तब प्रशासन ने कड़ा रूख अख्तियार किया और कई गांवों में सुरक्षा बलों की प्रतिनियुक्ति कर दी. सरकार ने जिले में तीन नये थाने भी स्थापित कर दिये.

कोचांग, कुरूंगा और शारदा में पुलिस चैकी खोली गयी. इससे ग्रामीणों में पत्थलगड़ी नेताओं का खौफ कम होने लगा और पत्थलगड़ी वाले गांवों में विकास की किरणें पहुंचने लगीं हैं. पत्थलगड़ी वाले गांवों में होगा त्वरित विकास पत्थलगड़ी प्रभावित गांवों में लोगों के सकारात्क रूख से प्रशासन के अधिकारी भी खुश हैं. चितरामू में गैर पंरपरागत पत्थलगड़ी हटाये जाने के बादर प्रशासन ने गांव को हाथों हाथ लिया.

चितरामू में सरकार चलायेगी चलें विकास की ओर कार्यक्रम

एसडीओ प्रणब कुमार पाल ने बताया कि शनिवार से चितरामू में चलें विकास की ओर कार्यक्रम की शुरूआत की जायेगी. ग्रामीणों ने भी प्रशासन को आश्वस्त किया कि पत्थलगड़ी विकास में कभी बाधक नहीं बनेगी. विकास में ग्रामीण हर संभव सहयोग करेंगे. अफीम की अवैध खेती को लेकर हो रही थी पत्थलगड़ी जानकारों की मानें, तो पत्थलगड़ी का मुख्य उद्देश्य अफीम की अवैध खेती को संरक्षण देना था.

जिन गांवों में पत्थलगड़ी हुई, वहां भारी मात्रा में अफीम की खेती की जाती है. ग्रामसभा की आड़ में ऐसे तत्व पत्थलगड़ी कर गांवों में गैर आदिवासियों, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों यहां तक कि पत्रकारों के आने-जाने पर रोक लगा दी थी. इसका उद्देश्य था कि अफीम खेती की जानकारी दूसरों को न हो. ज्ञात हो कि अब तक पुलिस लाखों रुपये की अफीम बरामद कर चुकी है. दर्जनों अफीम तस्करों को जेल भेजा गया है, जिनमें कई पत्थलगड़ी समर्थक हैं.

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