रेप की इन घटनाओं पर खामोशी क्‍यों?

by
Advertisements

Ranchi: उत्‍तर प्रदेश की हाथरस रेपकांड तूल पकड़ा हुआ है. दूसरी ओर झारखंड में पिछले कुछ महीनों में महिला यौन हिंसा ओर दुष्‍कर्म में इजाफा देखने को मिला है. इसके बावजूद झारखंड हो रही इस तरह की घटनाएं देश की सुर्खियां नहीं बन पा रही हैं. झारखंड में तीन साल के दौरान 21 मॉब लिंचिंग की घटनाएं होती हैं. लेकिन सिर्फ तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग केस पर संसद में हंगामा होता है और पीएम को सफाई देनी पड़ती है.

झारखंड में 12 साल की बच्‍ची के साथ दुष्‍कर्म हुआ और बच्‍चे की मां बन गई तो कहीं दुष्‍कर्मियों द्वारा साध्‍वी को हवस का शिकार बना लिया जाता है. बावजूद इसके ऐसी घटनाएं कभी सुर्खियां बन पाई हैं. इसके खिलाफ न कोई सामाजिक संगठन और न कोई राजनीतिक संगठन इंसाफ के लिए आवाज बुलंद करता है. जबकि हाथरस कांड पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत पूरे कांग्रेस ने मोर्चा खोल रखा है.  

7 महीनों में 1033 रेप केस दर्ज

जनवरी 2020 से लेकर जुलाई 2020 तक झारखंड में एक हजार से भी ज्‍यादा यानि कुल 1033 रेप के मामले दर्ज किए गए हैं.

झारखंड में रेप के मामले

जनवरी 2020       151

फरवरी 2020        142

मार्च 2020           150

अप्रैल 2020          104

मई 2020            169

जून 2020            176

जुलाई 2020         141

(Data Source: jhpolice.gov.in)

झारखंड में खास मॉब लिंचिंग मुद्दा बनता है, रेप नहीं

‘झारखंड में मॉब लिंचिंग’ ये शब्‍द जब आप गूगल पर सर्च करेंगे तब आपको तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग की जानकारी प्रमुखता से मिलेगी. गूगल यहां वीकिपीडिया की जानकारी भी प्रमुखता से प्रदर्शित करता है. यह वाक्‍या साल 2019 को हुई थी. घटना का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था. तबरेज अंसारी को घंटों पीटा गया था और उसे ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए मजबूर किया गया था. यह घटना 18 जून की है, जब उसे झारखंड के सरायकेला में दो अन्य युवकों के साथ मोटरसाइकिल की चोरी के आरोप में पकड़ा था. इसके चार दिन बाद तबरेज ने 22 जून को अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. 

इस मौत के बाद झारखंड समेत पूरे देश की सियासत गरमा गई. रांची और सरायकेला में नेताओं का तांता लगने लगा. संसद के सत्र में एक सप्‍ताह तक हंगामा हुआ. विपक्ष के एक नेता ने झारखंड को मॉब लिंचिंग का फैक्‍ट्री भी कह डाला. आखिर में पीएम ने भी अपनी चुप्‍पी तोड़ी और कहा झारखंड में भीड़ द्वारा एक युवक की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना से मुझे दुख हुआ है, लेकिन इसके लिए पूरे प्रदेश पर आरोप लगाना गलत है.

ऐसा नहीं है झारखंड में तबरेज केस ही मॉब लिंचिंग का इकलौता मामला है. अप्रैल 2019 में प्रकाश लाकरा नाम के एक ईसाई आदिवासी को बैल की डेडबॉडी ले जाने के आरोप में जमकर पीटा गया था. यह घटना गुमला जिले के झुमरो गांव में हुई थी. इस मामले में झारखंड पुलिस ने पीड़ित को झारखंड बोवाइन पशु वध निषेध अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया था.

साल में 21 लोग बने मॉब लिंचिंग के शिकार

आंकड़ों की मानें तो साल 2019 तक 3 साल के दौरान झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में करीब 21 लोग मॉब लिंचिंग की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं. इसके अलावा जनवरी 2017 से अब तक 90 से ज्यादा लोग जादू-टोने के शक में मार दिए गए. लेकिन ये कभी देश की सुर्खियां नहीं बने. इन पर कभी संसद में मामला नहीं गरमाया. विपक्ष ने न कभी सवाल उठाया और न पीएम को कभी कोई जवाब देना पड़ा. 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.