आखिर क्यों जरूरी है जनसंख्या नियंत्रण कानून?

by
Ritesh Kashyap

भारत के अंदर किसी भी प्रकार की समस्या के मूल में जनसंख्या विस्फोट ही है. भारत की जनसंख्या वर्तमान दर बढ़ती रही तो भारत जल्दी ही चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा. जो भारत की उपलब्धि में तो कतई नहीं शामिल होने वाला. इसके साथ ही बढ़ती जनसंख्या रोकने के लिए अविलंब जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बना तो भारत को गृहयुद्ध से बचा पाना नामुमकिन हो जाएगा.

ऐसा नहीं है कि इन बातों पर देश के बुद्धिजीवियों का ध्यान नहीं जा रहा है. बल्कि समाज के कई संगठन और बुद्धिजीवीयों ने भारत की बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जाहिर की है. जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के तहत इस जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग पिछले 8 वर्षों से की जा रही है. इस संगठन के माध्यम से देश में कई जगहों पर जन जागरण के कार्य किए जा रहे हैं. लोगों को बढ़ती जनसंख्या से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया जा रहा है. उनके द्वारा देश के सांसदों और विधायकों से मिलकर उन्हें जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने और लागू करवाने का प्रयास भी जारी है.

ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की आबादी 140 करोड़ के करीब हो चुकी है. प्रतिदिन भारत में औसतन 75 हजार बच्चों का जन्म होता है. आबादी के मामले में पूरे विश्व में भारत लगभग 18% आबादी का योगदान देते हुए दूसरे नंबर पर आ चुका है. इस बढती आबादी ने हमारे देश के संसाधनों पर भी असर डालना शुरू भी कर दिया हैं. इसी का परिणाम है की आज देश में चारों ओर गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, प्रदुषण और अपराध जैसी तस्वीरे देखने और सुनने को मिलती रहती हैं.

जनसंख्‍या नियंत्रण कानून की जरूरत

किसी भी देश का सर्वांगीण विकास तभी हो सकता है जब उस देश का समाज भी जागरूक होगा. देश में बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी को जन्म देती है. जहां बेरोजगारी बढ़ेगी वहां गरीबी, भूखमरी, प्रदूषण और अपराध जैसी समस्याएं उत्पन्न होना स्वभाविक है. इस परिस्थिति में देश के विकास की कल्पना करना भी स्वप्न देखने के समान है. यदि किसी देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ेगी तो उस देश में मौजूद आधारभूत संरचना और संसाधनों पर भी दबाव बढ़ेगा. ऐसा होने से देश में विकास गति स्वतः धीमी पड़ जाएगी और देश गरीबी के कुचक्रों में फंसता चला जायेगा.

भारत के अंदर जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर उत्तर प्रदेश की सरकार ने विचार करना शुरू कर दिया. प्रदेश के राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या विधायक 2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. इस ड्राफ्ट में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानूनी उपाय सुझाए गए हैं. ड्राफ्ट में दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरियों में आवेदन से लेकर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने तक पर रोक लगाने का प्रावधान है. हालांकि इस मामले में लोगों से भी सुझाव मांगा जा रहा है.

देश में 50 फ़ीसदी समस्याओं के लिए जनसंख्या विस्फोट को जिम्मेदार बताते हुए जनसंख्या नियंत्रण कानून पूरे देश में लागू करने के लिए याचिका दायर की गई है. याचिका में यह भी बताया गया कि जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन संविधान में सातवीं अनुसूची (20ए) की लिस्ट 3 का हिस्सा है. इसके तहत केंद्र जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून और नियम भी बना सकती है. मगर इसके लिए सरकार की ओर से उचित कदम नहीं उठाया जा रहा है.

भारत के लोगों में भी जनसंख्या वृद्धि को लेकर जागरूकता देखने को मिल रही है. अगर सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती है तो आने वाले कुछ सालों में भारत की स्थिति बद से बदतर होने से कोई नहीं रोक सकता है.

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