इंजीनियर्स डे 15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है

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इंजीनियर्स डे: हर साल 15 सितंबर को सुप्रसिद्ध इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या के जन्मदिन पर इंजीनियर्स डे (Engineers Day) मनाया जाता है. इंजीनियिरंग के क्षेत्र में विश्वेश्वरय्या के बेहतरीन काम के लिए साल 1955 में भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया था.

इंजीनियरिंग की डिग्री होल्डर्स हर साल यानी 15 सितंबर को विश्वेश्वरय्या की स्मृति में इंजीनियर्स डे मनाते हैं. इस मौके पर लोग एक-दूसरे को इंजीनियर्स डे के फोटो, ग्रीटिंग्स, व्हाट्सऐप मैसेज और फेसबुक स्टेटस भेजकर अपने अंदाज में इस दिन को सेलीब्रेट करते हैं.

देश को समृद्ध और विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका

जीनियर्स डे मनाने का उद्देश्‍य है भारत में विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित करना. इंजीनियर देश को समृद्ध और विकसित बनाने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. भारत इंजीनियरिंग व आईटी के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश है. इंजीनियरिंग एक विस्तृत क्षेत्र है और अब तो भारत में कई विषयों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.

कृष्णराज सागर बांध और विशाखापट्टणम बंदरगाह के निर्माण में योगदान

विश्वेश्वरय्या ने मैसूर में कावेरी नदी पर निर्मित कृष्ण राजा सागर डैम का निर्माण किया था. यही नहीं, उस समय एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा रिजर्वायर बनाया था. हैदराबाद के लिए बाढ़ सुरक्षा प्रणाली और विशावखापट्टणम पोर्ट को समुद्री कटाव से बचाने के लिए एक प्रणाली विकसित करने में भी विश्वेश्वरय्या ने बड़ा योगदान दिया था.

विश्वेश्वरय्या के प्रयासों से ही कृष्णराज सागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स, मैसूर सैंडल आइल एंड सोप फैक्टरी, मैसूर विश्‍वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर का निर्माण हो पाया. मैसूर में लड़कियों के लिए अलग से हॉस्टल और पहला फर्स्ट ग्रेड कॉलेज (महारानी कॉलेज) खुलवाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है. एशिया के बेस्ट प्लान्ड लेआउट्स में एक जयानगर है जो कि बेंगलुरु में स्थित है. इसकी पूरी डिजाइन और योजना बनाने का श्रेय सर एम. विश्वेश्वरैया को ही जाता है.

मैसूर में ऑटोमोबाइल और एयरक्राफ्ट फैक्टरी की शुरूआत करने का सपना मन में संजोए विश्वेश्वरैया ने 1935 में इस दिशा में कार्य शुरू किया. बंगलूर स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स तथा मुंबई की प्रीमियर ऑटोमोबाइल फैक्टरी उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है. 1947 में वह आल इंडिया मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष बने. वह किसी भी कार्य को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने में विश्वास करते थे.

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