कोविड नियमों के उल्‍लंघन पर FIR हो सकता है तो कोरोना मृतकों के परिजनों को मुआवजा क्‍यों नहीं

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Ranchi: झारखंड में कोविड 19 वायरस के संक्रमण से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग उठने लगा है. कहा गया है कि जब सरकार कोविड गाइडलाइन के उल्‍लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकता है कि तो कोरोना संक्रमण से मरने वालों के परिजनों को सरकारी मुआवजा क्‍यों नहीं दिया जा रहा है. इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता दीपेश कुमार निराला ने ट्वीटर पर पोस्‍ट किया है. ट्वीट करने वाले ने इसे झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री बन्‍ना गुप्‍ता और केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को टैग किया है.

आपदा से मौत पर 4 लाख मुआवजे का प्रावधान

आपदा से मौत होने पर मृतक के आश्रित को 4 लाख रुपये मुआवजा राशि भुगतान आपदा विभाग द्वारा किये जाने का प्रावधान है. क्योंकि कोरोना को आपदा माना गया है इसीलिए कोरोना से मौत होने पर मुआवजा की मांग की जा रही है. लेकिन किसी सरकार द्वारा न तो इसकी जानकारी दी जा रही है और न प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. मुआवजा राशि प्राप्‍त करने के लिए कोरोना से मौत का प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक की कॉपी की जरूरत होती है.

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मुआवजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मृत प्रत्‍येक व्‍यक्ति के परिजन को चार लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी की है. जस्टिस एल नागेश्‍वर राव की अध्‍यक्षता वाली बेंच ने नोटिस जारी किया. इस याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि आपदा प्रबंधन कानून की धारा 12 के तहत कोरोना संक्रमण मृत लोगों के परिजन को मुआवजा दे सरकार. याचिका में कहा गया है कि मृतकों के परिजन को मौत की मूल वजह जानने का हक है. मेडिकल अफसर कोरोना संक्रमण से मृतकों के शवों का पोस्‍टमार्टम नहीं कर रहे हैं. ऐसे में मौत की असली वजह का पता नहीं चल पा रहा है. याचिका में कहा गया है कि गृह मंत्रालय ने कोरोना से मृतकों के परिजन को नेशनल डिजास्‍टर रेस्‍पांस फंड और स्‍टेट डिजास्‍टर रेस्‍पांस फंड से चार लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने की अनुशंसा की थी. ऐसे में राज्‍य सरकारों की जिम्‍मेदारी है कि वे कोरोना से मृतकों के परिजन की देखभाल करें.

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कोविड से मौत पर डेथ सर्टिफिकेट पर लिखा जाये कोविड से मौत

सुप्रीम कोर्ट के जज अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह आईसीएमआर की गाइडलाइन पेश करे जिसमें कोविड से मौत के बाद डेथ सर्टिफिकेट जारी करने का प्रावधान है ओर इसके लिए एक समान पॉलिसी होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई केस में मौत फेफड़े में संक्रमण या हार्ट में परेशानी के कारण होती है, लेकिन ये सब कोविड के कारण ही होता है और मृत्‍यु प्रमाण पत्र में लिखा नहीं होता है. ऐसे में यदि किसी कोविड पीडित की मौत होती है तो उसके परिजनों को मुआवजे के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये पीडित परविार के प्रति उचित नहीं होगा कि मौत के बाद कारण अलग लिखा हो जबकि मौत की असली वजह कोविड है.

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