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बाबा रामदेव ने क्‍यों कहा कि नहीं कह सकते कि अगला पीएम कौन बनेगा

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Madurai: छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही देश की राजनीति में समीकरणों के उलटफेर का सिलसिला तेज हुआ है. कांग्रेस का विश्वास बढ़ा है. बीजेपी संभावित मुश्किलों से बचने की कोशिशों में जुटी है. इस बीच बाबा रामदेव के एक बयान के मायने निकाले जाने लगे हैं.

2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी का समर्थन करते रहे बाबा रामदेव ने कहा है कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. बाबा रामदेव की इन बातों के मायने निकाले जाने लगे हैं.

खबरों के मुताबिक मदुरै में मंगलवार को बाबा रामदेव ने कहा है ” राजनीतिक हालात बहुत कठिन हैं, हम नहीं कह सकते कि अगला पीएम कौन बनेगा. मैं राजनीति पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा हूं . और ना किसी का समर्थन करता हूं ना विरोध. हमारा उद्देश्य  सांप्रदायिक या हिेंदू भारत बनाना नहीं बल्कि हम एक आध्यात्मिक भारत और दुनिया का निर्माण करना चाहते हैं.”

गौरतलब है कि इससे पहले बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया है कि 2019 में वे बीजेपी के लिए प्रचार नहीं करेंगे. लोकसभा चुनावों में वे राजनीति से भी दूर रहेंगे.बाबा रामदेव ने कहा था कि मैं हमेशा राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर कार्य करता हूं. मेरी राजनीतिक भूमिका यह सुनिश्चित करने के लिए सीमित है कि देश अच्छे लोगों द्वारा शासित है.

हाल ही में राष्ट्रीय लोक समानता पार्टी ने एनडीए का साथ छोड़ दिया है. अलबत्ता आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में शामिल हो गए हैं. इस बीच एलजेपी नेता चिराग पासवान ने कहा था कि एनडीए नाजुक दौर से गुजर रहा है. हलांकि बीजेपी ने समय रहते एलजेपी के असंतोष को थाम लिया है. बिहार में सीटों के बंटवारे के साथ एलजेपी को छह सीटें दी गई है.

इस बीच यूपी में एनडीए के घटक दलों में से केद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल का कहना है कि यूपी में राज्य की बीजेपी यूनिट छोटे दलों का सम्मान नहीं कर रही है. अगर उचित सम्मान नहीं मिला तो एनडीए में बने रहने पर विचार करेंगे.

इधर राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा है कि बीजेपी दबाव से गुजर रही है. बिहार में सीटों के बंटवारे से यह साफ दिखता है. पायलट को भरोसा है कि केंद्र में अगली सरकार कांग्रेस की बनेगी.

एनडीटीवी की खबरों के मुताबिक बीजेपी पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा है कि अंहकार के चलते ही बीजेपी के सहयोगी दल एनडीए छोड़ रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा से पहले तेलुगु देशम ने एनडीए का साथ छोड़ा है. यही कारण है कि दबाव में  बीजेपी ने बिहार में जेडीयू को 17 सीटें दी हैं, जिसके केवल दो सांसद हैं. असुरक्षा का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है.

पायलट का कहना है कि भाजपा को यह तथ्य स्वीकार करना चाहिए कि उसे तीन राज्यों में बड़ा झटका लगा है तब उसे हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.जबकि कांग्रेस ने हमेशा राजनीति में नैतिकता का ख्याल रखा है.

 

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