धनतेरस की पूजा 25 अक्टूबर को कब करें, क्या‍ सोना-चांदी ही खरीदनी चाहिए

धनतेरस की पूजा 25 अक्टूरबर को कब करें, क्या‍ सोना-चांदी ही खरीदनी चाहिए

Dhanteras 2019 Date in India (धनतेरस कब है): धनतेरस से दिवाली पर्व की शुरुआत होती है जो भाई दूज तक रहती है. धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि की भी पूजा की जाती है.

माना जाता है कि इस दिन नया समान जैसे सोना, चांदी औप बर्तन की खरीदारी करने से पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. धनतेरस के मौके पर सोने के खरीदारी का विशेष प्रचलन है. इस बार धनतेरस का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जायेगा.

धनतेरस के दिन क्‍या खरीदें?

 आमतौर पर लोग इस दिन सोने-चांदी के आभूषण खरीदते हैं. लेकिन यह जरूर नहीं कि आपकी जेब भी इसकी अनुमति दे. लेकिन त्‍योहार है तो उसे मनाना भी जरूरी है. ऐसे में आप सोने या चांदी का सिक्‍का खरीद सकते हैं. 
 धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है और उन्‍हें चांदी अति प्रिय है. ऐसे में इस दिन चांदी खरीदना अच्‍छा माना जाता है. कहते हैं कि धनतेरस के मौके पर चांदी खरीदने से यश, कीर्ति और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है. यही नहीं चांदी को चंद्रमा का प्रतीक भी माना जाता है, जो मनुष्‍य के जीवन में शीतलता लेकर आती है.  
 इस दिन धातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. विशेषकर चांदी और पीतल को भगवान धन्‍वंतरी का मुख्‍य धातु माना जाता है. ऐसे में इस दिन चांदी या पीतल के बर्तन जरूर खरीदने चाहिए.
 मान्‍यता है कि भगवान धन्‍वंतर‍ि समुद्र मंथन के दौरान हाथ में कलश लेकर जन्‍मे थे. इसलिए धनतेरस के दिन पानी भरने वाला बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है.
 इस दिन व्‍यापारी नए बही-खाते खरीदते हैं, जिनकी पूजा दीपावली के मौके पर की जाती है.  
 इस दिन गणेश और लक्ष्‍मी की अलग-अलग मूर्तियां जरूर खरीदें. दीपावली के दिन इन मूर्तियों की पूजा का विधान है. 
 इस दिन खील-बताशे और मिट्टी के छोटे दीपक खरीदें. एक बड़ा दीपक भी खरीदें. 
 इस दिन लक्ष्‍मी जी का श्री यंत्र खरीदना भी शुभ माना जाता है. 
 इसके अलावा आप अपनी घर की जरूरत का दूसरा सामान जैसे कि फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मिक्‍सर-ग्राइंडर, डिनर सेट और फर्नीचर भी ले सकते हैं. 
 इस दिन वाहन खरीदना शुभ होता है. लेकिन मान्‍यताओं के मुताबिक राहु काल में वाहन नहीं खरीदना चाहिए. 
 मान्‍यता है कि मां लक्ष्‍मी को कौड़‍ियां अति प्रिय हैं. इसलिए धनतेरस के दिन कौड़‍ियां खरीदकर रखें और शाम के समय इनकी पूजा करें. दीपावली के बाद इन कौड़‍ियों को अपने घर की तिजोरी में रखें. मान्‍यता है कि ऐसा करने से धन-धान्‍य की कमी नहीं रहती.
 मां लक्ष्‍मी को धनिया अति प्रिय है. धनतेरस के दिन धनिया के बीज जरूर खरीदने चाहिए. मान्‍यता है कि जिस घर में धनिया के बीज रहते हैं वहां कभी धन की कमी नहीं रहती. दीपावली के बाद धनिया के इन बीजों को घर के आंगन में लगाना चाहिए. 
 धनतेरस के दिन नया झाड़ू खरीदना चाहिए. मान्‍यता है कि झाड़ू दरिद्रता को दूर करता है. कहते हैं कि लक्ष्‍मी स्‍वच्‍छ घर में ही निवास करती हैं और झाड़ू सफाई करने का सर्वोत्तम साधन है.

धनतेरस के दिन क्‍या न खरीदें? 

 मान्‍यताओं के मुताबिक धनतेरस के दिन कांच का सामान नहीं खरीदना चाहिए. 
 हिन्‍दू धर्म में काले रंग को शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में कहा जाता है कि धनतेरस के दिन काले रंग की चीजें नहीं खरीदनी चाहिए.
 इस दिन नुकीली चीजें जैसे कि कैंची और चाकू नहीं खरीदना चाहिए.

धनतेरस के दिन क्‍या सावधानियां बरतें?

 धनतेरस से पहले घर की साफ-सफाई का काम पूरा कर लें. धनतेरस के दिन स्‍वच्‍छ घर में ही भगवान धन्‍वंतरि, माता लक्ष्‍मी और मां कुबेर का स्‍वागत करें. 
 धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने के बाद घर लाते समय उसे खाली न लाएं और उसमें कुछ मीठा जरूर डालें. अगर बर्तन छोटा हो या गहरा न हो तो उसके साथ मीठा लेकर आएं. 
 धनतेरस के दिन तिजोरी में अक्षत रखे जाते हैं. ध्‍यान रहे कि अक्षत खंडित न हों यानी कि टूटे हुए अक्षत नहीं रखने चाहिए. 
– इस दिन उधार लेना या उधार देना सही नहीं माना जाता है. 

क्यों मनाते हैं धनतेरस? कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि उत्पन्न हुए थे. इनके उत्पन्न होने के समय इनके हाथ में एक अमृत कलश था जिस कारण धनतेरस पर बर्तन खरीदने का भी रिवाज है. मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है. धनतेरस पर कई लोग धनिया के बीज भी खरीदते हैं. पिर दिवाली वाले दिन इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में बोते हैं.

धनतेरस कब मनाया जाता है?

धनतेरस का पर्व हर साल दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है. हिन्‍दू कैलेंडर के मुताबिक कार्तिक मास की तेरस यानी कि 13वें दिन धनतेरस मनाया जाता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व हर साल अक्‍टूबर या नवंबर महीने में आता है. इस बार धनतेरस 25 अक्‍टूबर को है.

धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त
धनतेरस की तिथि: 25 अक्‍टूबर 2019 
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 25 अक्‍टूबर 2019 को शाम 07 बजकर 08 मिनट से 
त्रयोदशी तिथि समाप्‍त: 26 अक्‍टूबर 2019 को दोपहर 03 बजकर 36 मिनट 
धनतेरस पूजा मुहूर्त: 25 अक्‍टूबर 2019 को शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 13 मिनट तक 
अवधि: 01 घंटे 05 मिनट 

धनतेरस का महत्‍व 

धनतेरस (Dhanteras) को धनत्रयोदशी (Dhantrayodashi), धन्‍वंतरि त्रियोदशी (Dhanwantari Triodasi) या धन्‍वंतरि जयंती (Dhanvantri Jayanti) भी कहा जाता है. मान्‍यता है कि समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्‍वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए.

कहते हैं कि चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था. भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. भगवान धन्‍वंतरि के जन्‍मदिन को भारत सरकार का आयुर्वेद मंत्रालय ‘राष्‍ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ (National Ayurveda Day) के नाम से मनाता है.

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन लक्ष्‍मी पूजन करने से घर धन-धान्‍य से पूर्ण हो जाता है. इसी दिन यथाशक्ति  खरीददारी और लक्ष्‍मी गणेश की नई प्रतिमा को घर लाना भी शुभ माना जाता है.

कहते हैं कि इस दिन जिस भी चीज की खरीददारी की जाएगी उसमें 13 गुणा वृद्धि होगी. इस दिन यम पूजा का विधान भी है. मान्‍यता है कि धनतेरस के दिन संध्‍या काल में घर के द्वार पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से अकाल मृत्‍यु का योग टल जाता है. 

धनतेरस की पूजा विधि 

धनतेरस के दिन भगवान धन्‍वंतरि, मां लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है. 
 धनतेरस के दिन आरोग्‍य के देवता और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्‍वंतरि की पूजा की जाती है. मान्‍यता है कि इस दिन धन्‍वंतरि की पूजा करने से आरोग्‍य और दीर्घायु प्राप्‍त होती है. इस दिन भगवान धन्‍वंतर‍ि की प्रतिमा को धूप और दीपक दिखाएं. साथ ही फूल अर्पित कर सच्‍चे मन से पूजा करें. 
 धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है. इस दिन संध्‍या के समय घर के मुख्‍य दरवाजे के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिट्टी का बड़ा दीपक रखकर उसे जलाएं. दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए. दीपक जलाते समय इस मंत्र का जाप करें: 

मृत्‍युना दंडपाशाभ्‍यां कालेन श्‍याम्‍या सह|
त्रयोदश्‍यां दीप दानात सूर्यज प्रीयतां मम ||


 धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. मान्‍यता है कि उनकी पूजा करने से व्‍यक्ति को जीवन के हर भौतिक सुख की प्राप्‍ति होती है. इस दिन भगवान कुबेर की प्रतिमा या फोटो धूप-दीपक दिखाकर पुष्‍प अर्पित करें. फिर दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर सच्‍चे मन से इस मंत्र का उच्‍चारण करें: 

ॐ  श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्‍लीं श्रीं क्‍लीं वित्तेश्वराय नम: 

 धनतेरस के दिन मां लक्ष्‍मी की पूजा का विधान है. इस दिन मां लक्ष्‍मी के छोटे-छोट पद चिन्‍हों को पूरे घर में स्‍थापित करना शुभ माना जाता है. 

धनतेरस के दिन कैसे करें मां लक्ष्‍मी की पूजा?

धनतेरस के दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्‍मी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन मां लक्ष्‍मी के साथ महालक्ष्‍मी यंत्र की पूजा भी की जाती है. धनतेरस पर इस तरह करें मां लक्ष्‍मी की पूजा: 
 सबसे पहले एक लाल रंग का आसन बिछाएं और इसके बीचों बीच मुट्ठी भर अनाज रखें.
 अनाज के ऊपर स्‍वर्ण, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश रखें. इस कलश में तीन चौथाई पानी भरें और थोड़ा गंगाजल मिलाएं. 
 अब कलश में सुपारी, फूल, सिक्‍का और अक्षत डालें. इसके बाद इसमें आम के पांच पत्ते लगाएं. 
 अब पत्तों के ऊपर धान से भरा हुआ किसी धातु का बर्तन रखें. 
 धान पर हल्‍दी से कमल का फूल बनाएं और उसके ऊपर मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा रखें. साथ ही कुछ सिक्‍के भी रखें.
 कलश के सामने दाहिने ओर दक्षिण पूर्व दिशा में भगवान गणेश की प्रतिमा रखें. 
 अगर आप कारोबारी हैं तो दवात, किताबें और अपने बिजनेस से संबंधित अन्‍य चीजें भी पूजा स्‍थान पर रखें. 
 अब पूजा के लिए इस्‍तेमाल होने वाले पानी को हल्‍दी और कुमकुम अर्पित करें. 
 इसके बाद इस मंत्र का उच्‍चारण करें 

ॐ  श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलिए प्रसीद प्रसीद | 
ॐ  श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मिये नम: ||


– अब हाथों में पुष्‍प लेकर आंख बंद करें और मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान करें. फिर मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को फूल अर्पित करें. 
 अब एक गहरे बर्तन में मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा रखकर उन्‍हें पंचामृत (दही, दूध, शहद, घी और चीनी का मिश्रण) से स्‍नान कराएं. इसके बाद पानी में सोने का आभूषण या मोती डालकर स्‍नान कराएं. 
 अब प्रतिमा को पोछकर वापस कलश के ऊपर रखे बर्तन में रख दें. आप चाहें तो सिर्फ पंचामृत और पानी छिड़ककर भी स्‍नान करा सकते हैं. 
 अब मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को चंदन, केसर, इत्र, हल्‍दी, कुमकुम, अबीर और गुलाल अर्पित करें. 
 अब मां की प्रतिमा पर हार चढ़ाएं. साथ ही उन्‍हें बेल पत्र और गेंदे का फूल अर्पित कर धूप जलाएं. 
 अब मिठाई, नारियल, फल, खीले-बताशे अर्पित करें. 
 इसके बाद प्रतिमा के ऊपर धनिया और जीरे के बीज छिड़कें. 
– अब आप घर में जिस स्‍थान पर पैसे और जेवर रखते हैं वहां पूजा करें. 
 इसके बाद माता लक्ष्‍मी की आरती उतारें.

मां लक्ष्‍मी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता .
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता .
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

दुर्गा रूप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता .
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता .
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्‍गुण आता .
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता .
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता .
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता .
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता…॥

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता .
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥

आप सभी को धनतेरस की शुभकामनाएं !!!

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