कार-बाइक खरीदते समय जरूर देखें बैटरी कितनी अच्‍छी

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अक्सर लोग कार या बाइक खरीदते समय यही देखते हैं कि इसका इंजन कैसा है? माइलेज कैसी है? एक्सलेटर या गियर सिस्टम कैसा है? म्यूजिक सिस्टम कौन सी कंपनी का है? 

ज्यादा से ज्यादा सेफ्टी सिस्टम के बारे में लोग जानकारी हासिल करते हैं. बहुत कम लोग पूछते हैं कि इसमें बैटरी कौन सी लगी है या कैसी है? लेकिन भविष्य के वाहन बाजार में यही सवाल अहम रहेगा…बैटरी कैसी है…? जानते हैं कि नहीं, क्यों?

अब इलेक्ट्रिक व्हीकल का जमाना आ गया है, इसलिए आने वाले समय में यही वह चीज होगी, जो तय करेगा कि आप किस वाहन को चुनेंगे या खरीदेंगे.

इलेक्ट्रिक व्हीकल के युग में शक्तिशाली इंजन के साथ-साथ कुछ अन्य कल-पुर्जे गायब हो जाएंगे, जबकि बैटरी आकर्षण का केंद्र बन जाएगी. यह कई आकार-प्रकार में तो होगा ही, क्षमता के मुताबिक इसकी कीमत भी अलग-अलग होगी.

लिथियम आयन बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल या ईवी में कीमत का एकमात्र सबसे बड़ा माध्यम बनेगा. टाटा मोटर्स 2023 तक जगुआर लैंडओवर को पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने जा रही है, वहीं टाटा नेक्सन जैसी इलेक्ट्रिक कार भारत में धूम मचा रही है.

बैटरी का महत्व बढ़ना शुरू हो चुका

ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट प्रकाश कुमार बताते हैं कि बैटरी को महत्व मिलना शुरू हो चुका है. इसे इलेक्ट्रिक व्हीकल के दौर की शुरूआत कहें या कुछ और, अब लोग पेट्रोल कारों में भी बैटरी की पूछताछ करने लगे हैं. इस साल की शुरुआत में लांच किया गया नया ऑडी ई-ट्रॉन दो अलग-अलग बैटरी पैक के साथ आया था. एक छोटा 71 केडब्ल्यूएच पैक, जिसकी प्रमाणित रेंज 359 किलोमीटर है और एक बड़ा 95 किलोवाट पैक जो 484 किलोमीटर तक जा सकता है.

उच्च रेंज भी अधिक प्रदर्शन के साथ समर्थित है, जिसमें 308 एचपी और 504 एनएम टॉर्क के मुकाबले 402 एचपी और 664 एनएम टॉर्क. सभी लगभग 16 लाख रुपये की रेंज में थे. हुंडई कोना भारत में सड़क पर उतरने वाली पहली इलेक्ट्रिक कारों में से एक है. इसमें 39.2 केडब्ल्यूएच बैटरी पैक के साथ 64 केडब्ल्यूएच का बड़ा पैक है. हुंडई ने भारतीय बाजार में कीमत को देखते हुए छोटे बैटरी पैक के साथ कार लांच किया.

अलग-अलग आकार-प्रकार में होगी बैटरी

इलेक्ट्रिक व्हीकल में बैटरी अलग-अलग आकार-प्रकार में आ रही है. कुछ कारों का उपयोग शहर के अंदर किया जाएगा, उसकी बैटरी अलग होगी, जबकि लंबी दूरी का सफर तय करने वालों के लिए कार की बैट्री अलग साइज व पैक में होगी. छोटी बैटरी होगी, तो चार्जिंग प्वाइंट ढूंढना अधिक सुविधाजनक होगा. छोटी बैटरी का मतलब कम कीमत के रूप में कारें खुद अधिक किफायती होंगी.

इंटरसिटी का सफर करने वाले वाहनों के लिए बड़े बैटरी पैक की आवश्यकता होगी. अब कार कंपनियां या शोरूम के सेल्समैन आपको इसी रूप में सलाह देंगे. बैटरी का यह मसला बाइक के लिए भी कुछ इसी तरह का होगा.

ओला इलेक्ट्रिक ने हाल ही में पहला स्कूटर लांच किया है, जो 3.97 किलोवाट बैटरी पैक के साथ 181 किलोमीटर की प्रमाणित रेंज और 2.98 किलोवाट के छोटे पैक के साथ आता है, जिसमें 60 किलोमीटर कम रेंज है. एथर एनर्जी के दो स्कूटर 450 प्लस और 450 एक्स, भी ज्यादातर अपने बैटरी पैक से अलग हैं.

लिथियम आयन बैटरी का होगा बोलबाला

इलेक्ट्रिक व्हीकल में लिथियम आयन बैटरी का ही बोलबाला रहने की संभावना है. यह कम कीमत में उच्च क्षमता के साथ उपलब्ध है. हालांकि लिथियम आयन बैटरी का उत्पादन अभी अपने देश में नहीं हो रहा है. एथर एनर्जी ने हाल ही में कहा था कि वह केवल लिथियम आयन सेल को छोड़कर भारत में अपने 99 प्रतिशत स्कूटरों को स्थानीय बनाने में सक्षम है.

प्रकाश कुमार बताते हैं कि कोरिया से आने वाले लिथियम आयन सेल बहुत जल्द भारत में बनने लगेंगे. मेंटेनेंस की वजह से बैटरी उत्पादक कंपनियां यहां प्लांट लगाने की तैयारी कर रही हैं. हाल ही में पुणे स्थित स्टार्टअप ने बैटरीपूल में पूंजी लगाई है. यह अभी भी विकसित हो रहा है और एक साथ बहुत सारे काम हो रहे हैं. उच्च घनत्व वाले नए रसायन और बैटरी सामने आएंगे और आज के कल-पुर्जे या ओईएम बाजार में अपनी खुद की यूएसपी बनाने के लिए भारी निवेश करेंगे. आज के वाहनों की तरह, निर्माता बैटरी के माध्यम से रेंज, चार्जिंग और प्रदर्शन के बीच संतुलन बनाने वाले हैं, यह तय मानिए.

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