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झारखंड का 2019 बजट सत्र कैसा होगा?

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Ranchi: झारखंड विधानसभा क बजट सत्र 17 जनवरी से शुरू हो रहा है. 22 जनवरी को सरकार विधानसभा में बजट पेश करेगी. यह चौथी विधानसभा का 15 वां सत्र होगा.

सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा. इसी दिन राज्यपाल द्वारा स्वीकृत अध्यादेश की प्रति सदन के पटल पर रखी जाएगी. सत्र का संचालन आठ फरवरी तक होना है. इस दौरान कुल पंद्रह दिनों का कार्य दिवस होगा.

बजट सत्र के भी हंगामेदार होने के आसार हैं. इससे पहले ढाई साल यानि दस सत्र विधानसभा हंगामे की भेंट चढ़ चुकी है. यानि दस सत्रों में जनता के सवाल नहीं पूछे जा सके.

हालांकि इस दौरान विधेयक पारित किए और बजट भी पारित किए गए. विधायी कार्य निपटाए गए. विधायकों की तनख्वाह- सुविधाएं बढ़ी. टीए- डीए बने. अगर कुछ नहीं हो सका, तो जनता के सवाल और जवाब.

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जबकि पिछले बजट सत्र में सदन शोर- शराबा में डूबा रहा था. कुर्सियां तक फेकी गई. सदन के नहीं चलने से सरयू राय ने संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी छोड़ दी थी. उनका कहना था कि तमाम कोशिशों के बाद भी जिच खत्म होता नहीं दिख रहा. तब उनका इस पद पर बने रहना उचित नहीं.

दो दिनों पहले विधानसभा के संचालन को लेकर स्पीकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन मौजूद नहीं हो सके थे. यह बैठक सदन के सुचारू तौर पर चलाने के लिए सहमति के लिए थी.

नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन का कहना है कि जनता के सवाल सुने जाएं, इसकी जिम्मेदारी सरकार को तय करनी है. विपक्ष ज्वलंत मुद्दों पर जवाब चाहता रहा है और सरकार उससे मुंह मोड़ती रही है. दो महीने से अधिक वक्त हो गए राज्य के 67 हजार पारा शिक्षक हड़ताल पर हैं. मनरेगा कर्मी हड़ताल पर है. तो क्या इन सवालों पर विपक्ष शोर नहीं करे.

विपक्षी दलों में शामिल झारखंड विकास मोर्चा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव का कहना है कि शीतकालीन सत्र में भी विपक्ष ने इन्हीं मुद्दों पर कार्यस्थगन का प्रस्ताव लाया था. सरकार, विधानसभा संचालन नियमावली और विधायी पंरपरा का ख्याल नहीं रखती है. सदन चले यह विपक्ष का मकसद है, लेकिन सरकार को उन सवालों के जवाब पहले देने होंगे, जिस पर वे परदा डालना चाहती है.

प्रदीप यादव कहते हैं कि कैग की रिपोर्ट में कई घपले- घोटाले उजागर हुए हैं. विपक्ष चाहता है कि सरकार सदन मे दो टूक जवाब दे. लेकिन प्रश्नकाल का नहीं चलना कितना जायज है इस सवाल पर वे कहते हैं कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रशानकाल चलाए.

संसदीय कार्य मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा कहते हैं कि राज्य की सबसे बड़ी पंचायत बैठती है, तो जनता की बड़ी उम्मीदें होती हैं. सत्ता- विपक्ष दोनों को सदन चलाने के लिए आगे बढ़ना होगा. जिद या हंगामा से राज्य का भला नहीं हो सकता.

सत्तारूढ़ आजसू विधायक दल के नेता चंद्रप्रकाश चौधरी कहते हैं कि बजट सत्र बेहद महत्वपूर्ण होता है. इसलिए सत्ता- विपक्ष दोनों को झारखंड का हित देखना होगा. पहले ही काफी हंगामा हो चुका है. प्रशानकाल चले, यह सबकी जिम्मेदारी है.

पारा शिक्षकों मांग पर गंभीरता से विचार हो, इसके लिए सत्ता पक्ष के लोग भी सहमत हैं और सरकार का ध्यान बार- बार दिलाते रहे हैं.

उनका कहना है कि सदन चले इसके लिए कार्यमंत्रणा समिति की बैठकों में भी सहमति बनने के बाद भी शोर- शराबा ठीक नहीं होता.

 

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