क्‍या है यमराज का राखी कनेक्‍शन

by

राखी उन त्योहारों में से है जिसका एक्साइटमेंट बचपन से लेकर पचपन तक हर किसी को रहता है. रक्षा बंधन के रीति-रिवाजों से देश का बच्चा-बच्चा वाकिफ होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं राखी मनाने की प्रथा कब और कैसे शुरू हुई.

इसका जवाब आपको ग्रंथों में मिल सकता है. महाभारत से लेकर यमराज तक के कई किस्से रक्षा बंधन की प्रथा से संबंध रखते हैं. तो चलिए आज इसी के बारे में बात करते हैं और आपको बताते हैं रक्षा बंधन के पीछे छिपी धार्मिक मान्यताएं.

Read Also  7th Pay Commission : दिवाली में सरकारी कर्मचारियों का कितना बढ़ेगा महंगाई भत्‍ता, जानिए दिवाली गिफ्ट में क्‍या खास मिलेगा

द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कहानी

रक्षा सूत्र को लेकर महाभारत की कहानी बेहद प्रचलित है. मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दौरान गन्ना छीलते हुए भगवान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग जाती है. ये देख द्रौपदी अपनी साड़ी का एक कोना फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध देती है.

श्रीकृष्ण देते हैं रक्षा का वचन

द्रौपदी का स्नेह और समर्पण देख श्रीकृष्ण मुसीबत के समय में उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं. इसी के परिणाम स्वरूप चीरहरण के दौरान श्रीकृष्ण द्रौपदी की साड़ी अनंत कर उसकी रक्षा करते हैं. मान्यताओं के अनुसार, इसी वाक्यांश के बाद से रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई.

यम और यमराज की कहानी

कहते हैं एक बार भगवान यमराज काफी दिनों बाद अपनी बहन यमुना से मिलने गए. अपने भाई को देख यमुना देवी बेहद प्रसन्न हुईं और प्रेम प्रतीक के तौर पर रक्षा सूत्र यमराज को बांधा.

Read Also  7th Pay Commission : दिवाली में सरकारी कर्मचारियों का कितना बढ़ेगा महंगाई भत्‍ता, जानिए दिवाली गिफ्ट में क्‍या खास मिलेगा

यमराज ने दिया अमरता का वरदान

बहन के इस प्रेम से खुश होकर यमराज ने उनकी रक्षा करने का वचन दिया, साथ ही साथ उन्हें अमरता का वरदान भी प्रदान किया. इसे भी रक्षा बंधन की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है.

मां संतोषी से जुड़ी कहानी

फिल्म मां संतोषी में दिखाए गए प्रसंग के अनुसार, एक बार भगवान गणेश की बहन उन्हें राखी बांधने आती हैं. ये देख गजानन के पुत्र भी बहन की मांग करने लगते हैं.

हुई मां संतोषी की उत्पत्ति

पुत्रों के कहने पर श्री गणेश रिद्धि-सिद्धि की शक्तियों को मिलाकर संतोषी मां को उत्पन्न करते हैं. उत्पत्ति के बाद संतोषी मां और शुभ-लाभ मिलकर रक्षा बंधन मनाते हैं. इस कथा का संबंध भी रक्षा बंधन के त्यौहार से माना जाता है.

देवी लक्ष्मी और बलि की कहानी

राजा बलि ने भगवान विष्णु की दिन-रात सेवा कर उन्हें अपने द्वारपाल के रूप में मांग लिया था. इसी वचन के चलते भगवान विष्णु पाताल लोक जाकर निवास करने लगे. देवी लक्ष्मी पति से दूर नहीं रहना चाहती थीं, इसीलिए उन्होंने राजा बलि से उनके महल में रहने का निवेदन किया.

Read Also  7th Pay Commission : दिवाली में सरकारी कर्मचारियों का कितना बढ़ेगा महंगाई भत्‍ता, जानिए दिवाली गिफ्ट में क्‍या खास मिलेगा

राजा बलि के महल में रहने लगीं लक्ष्मीजी

बली ने देवी का निवेदन स्वीकार कर लिया. धन-धान्य की देवी के आते ही बलि के महल में सुख-सुविधाएं बढ़ने लगीं. सावन की पूर्णिमा को देवी लक्ष्मी रक्षा सूत्र के रूप में रंगीन धागा राजा बलि के हाथ में बांधती हैं.

राजा बलि ने दिया रक्षा का वचन

इस बात से प्रसन्न होकर राजा बलि आजीवन देवी की रक्षा करने का वचन देते हैं. साथ ही भगवान विष्णु को द्वारपाल की भूमिका से मुक्ति दे देते हैं. कई मान्यताओं में इस कहानी को भी रक्षा बंधन की शुरुआत माना गया है.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.