जल संचय का शुद्ध देसी तरीका क्‍या है, जिसकी तारीफ PM Modi ने की | Reality Check

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Ranchi: Jharkhand के दो गांवों ने Prime Minister Narendra Modi का ध्यान आकर्षित किया है. दोनों गांवों के नाम हैं आरा और केरम. जब देश में लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू थी. नई योजनाओं के घोषणा और लागू करने में पाबंदी थी तब गांव के लोगों ने पहाड़ को श्रमदान से बांधा और जल संचय का मिसाल कायम किया. इसकी चर्चा पीएम मोदी ने 29 जुलाई के अपने नियमित मन की बात कार्यक्रम के दौरान की.

राजधानी Ranchi से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित ओरमांझी प्रखंड में हैं ये दोनों गांव. दोनों के बीच की दूरी सिर्फ दो किलोमीटर है. पहाड़ की तलहटी में बने मार्ग का आखिरी गांव है केरम. लेकिन, कई मामलों में यह राज्य का सबसे श्रेष्ठ गांव है. जी हां, इन गांवों की स्वच्छता और सौंदर्य देखते ही बनता है. शहरी क्षेत्र के वार्डों को भी मात देते हैं दोनों गांव. जल संरक्षण के दम पर इस गांव ने गरीबी को मात दी है.

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इतना ही नहीं, गांव के लोग कृषि के साथ-साथ अपनी थाती जंगल को भी बचाने में पीछे नहीं हैं. गांव से सटे करीब 80 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगलों की रक्षा और सुरक्षा के लिए उन्होंने ‘जंगल बचाओ समिति’ का गठन किया है. सब मिलकर जंगल को सुरक्षित और संरक्षित कर रहे हैं. गांव की इन्हीं खूबियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रभावित किया है, जिसकी वजह से उन्होंने ‘मन की बात’ में इन गांवों का जिक्र किया.

पीएम ने #MannKiBaat में क्या कहा

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा, ‘झारखंड में रांची से कुछ दूर, ओरमांझी प्रखंड के आरा-केरम गांव में, ग्रामीणों ने जल प्रबंधन को लेकर जो हौसला दिखाया है, वो हर किसी के लिए मिसाल बन गया है. ग्रामीणों ने, श्रमदान करके पहाड़ से बहते झरने को, एक निश्चित दिशा देने का काम किया. वो भी शुद्ध देसी तरीके से. इससे न केवल मिट्टी का कटाव और फसल की बर्बादी रुकी है, बल्कि खेतों को भी पानी मिल रहा है. ग्रामीणों का ये श्रमदान, अब पूरे गांव के लिए जीवनदान से कम नहीं है.’

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