Take a fresh look at your lifestyle.

सिम स्वै‍प फ्रॉड क्या है, एक कॉल से कैसे चोरी हो जाते हैं बैंक अकाउंट के पैसे

0

सिम स्वैपिंग के जरिए हैकर आपकी पहचान चोरी कर, बैंक खाते से जुड़ा आपका मोबाइल नंबर बंद कराते हैं और फिर फर्जी पहचान पत्र के जरिये उसी मोबाइल नंबर का डुप्लीकेट सिम अपने पास एक्टिवेट (शुरू) करा लेते हैं.

सिम स्वैपिंग के लिए हैकर अब एक नया तरीका भी अपनाने लगे हैं. हैकर अपने शिकार को फोन कर उनके सिम को अपग्रेड करने या उसकी वैधता बढ़ाने का झांसा देते हैं.

इसके बाद पीड़ित से कहा जाता है कि वह सिम कार्ड पर लिखा 20 अंकों का नंबर अपने कस्टमर केयर के नंबर 121 पर एसएमएस कर दें. हैकर के पास पहले से पीड़ित का नया डुप्लीकेट 4जी या 3जी सिम रहता है.

ये सिम फर्जी पहचान पत्र की मदद से प्राप्त किया गया होता है. पीड़ित जैसे ही 121 पर सिम का नंबर मैसेज करता है. कुछ देर में उसके पास मौजूद सिम बंद हो जाता है और हैकर के पास मौजूद डुप्लीकेट सिम शुरू हो जाता है.

क्यों करते हैं सिम स्वैपिंग?

आपका सिम हैकर के पास शुरू होने के बाद वह आपके इंटरनेट बैंकिंग पर लॉग इन करता है. जाहिर है उसके पास पासवर्ड नहीं होता है, जिसे वह रीसेट करता है. नया पासवर्ड रीसेट करने के लिए मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आता है. सिम हैकर के पास होने के कारण उसे आसानी से ओटीपी मिल जाता है और हैकर इंटरनेट बैंकिंग के जरिये आसानी से आपके खाते में सेंध लगा सकता है.

पीड़ित को इसका पता भी नहीं चलेगा, क्योंकि बैंक का एसएमएस अलर्ट भी हैकर के पास मौजूद सिम कार्ड पर ही पहुंचेगा. सिम स्वैपिंग से बचाने के लिए पिछले दिनों सभी टेलिकॉम कंपनियों ने अपने ग्राहकों को एसएमएस भेजकर जागरूक करने का प्रयास किया है कि वह अपने सिम का 20 डिजिट का नंबर 121 पर एसएमएस न करें.

कैसे मिल जाता है डुप्लीकेट सिम?

पीड़ितों के मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि हैकरों को उनका डुप्लीकेट सिम कैसे मिल जाता है. साइबर क्राइम विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल ने बताया कि हैकर अक्सर सोशल मीडिया के जरिये आपकी जानकारी जुटाते हैं. इसके बाद उस जानकारी के आधार पर एक फर्जी पहचान पत्र तैयार किया जाता है, जिसकी मदद से डुप्लीकेट सिम जारी करा लिया जाता है.

अमूमन सिम कार्ड देने से पहले टेलिकॉम कंपनियों के स्टोर पर आवेदक और दस्तावेज का अच्छे से मिलान नहीं किया जाता है. कई बार टेलिकॉम कंपनी के स्टोर पर कार्यरत किसी कर्मी की मदद से भी हैकरों को डुप्लीकेट सिम मिल जाता है.

कैसे मिलता है बैंक खाते का ब्योरा?

साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार नोटबंदी के बाद देश में ई-पेमेंट और ई-शॉपिंग का इस्तेमाल बढ़ा है. इसके लिए बहुत से मोबाइल एप और गेटवे आदि बने हैं. जब भी हम कोई ई-पेमेंट करते हैं तो हमारी गोपनीय जानकारियां संबंधित वेबसाइट और उसके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे गेटवे के पास पहुंच जाती है.

ऐसे में कई जगहों से हमारी गोपनीय जानकारी चोरी हैकरों तक पहुंच सकती है. कई ऐसे भी मामले भी आ चुके हैं, जिसमें बैंक कर्मियों द्वारा अपने ग्राहकों का गोपनीय डाटा बेचा गया हो.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More