झारखंड मॉब लिंचिंग पर पीएम मोदी ने क्‍या कहा?

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New Delhi: 17वीं लोकसभा के पहले सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सभा में बुधवार को झारखंड मॉब लिंचिंग का जिक्र किया. अभिभाषण के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि झारखंड मॉब लिंचिंग का अड्डा बन गया है…क्या झारखंड राज्य को दोषी बता देना सही है? जो बुरा हुआ है उसे अलग करें… पूरे झारखंड को बदनाम करने का हक हमें नहीं है…वहां भी सज्जनों की भरमार है…न्याय हो, इसके लिए कानूनी व्यवस्था है.

अभिभाषण की शुरूआत में पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं जब चुनाव स्वयं जनता लड़ती है. 2019 का चुनाव दलों से परे देश की जनता लड़ रही थी. उन्होंने कहा कि ये चुनाव विशेष थे, कई दशकों के बाद पूर्ण बहुमत की सरकारें बनना मतदाताओं की सोच की स्थिरता जाहिर करता है.

राज्यसभा में अभिभाषण के दौरान पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस हारी तो देश हार गया. देश यानी कांग्रेस, कांग्रेस यानी देश. अहंकार की एक सीमा होती है. उन्होंने कहा कि भाजपा की जीत को लोकतंत्र तथा देश की हार बताना लोकतंत्र का अपमान है.

क्या वायनाड में हिंदुस्तान हार गया था? क्या रायबरेली में हिंदुस्तान हार गया था? क्या बहरामपुर और तिरुअनंतपुरम में हिंदुस्तान हार गया था? क्या कांग्रेस हारी तो देश हार गया? अहंकार की एक सीमा होती है. इस तरह की भाषा बोलना देश के मतदाताओं को कठघरे में खड़ा करने जैसा है. यह देश के मतदाताओं का अपमान है.

पीएम मोदी ने कहा कि हम इस चुनाव को देखें तो 40-45 डिग्री तापमान के बाद भी लोग कतारों में खड़े नजर आ रहे थे. 80 साल के बुजुर्ग भी लाइनों में लगे थे. चुनाव के लिए कितनी तपस्या करनी पड़ती है और हम चुनाव पर सवाल उठाकर उनका अपमान कर डालते हैं. उन्होंने कहा कि मैं हैरान हूं कि चुनाव में हार के बाद मीडिया को भी गालियां दी गईं. मीडिया के कारण चुनाव जीते जाते हैं क्या ? मीडिया क्या बिकाऊ है? क्या केरल और तमिलनाडु में यह लागू होगा ?

कभी हम दो हुआ करते थे

राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा कि अक्सर चुनावों में देखा जाता रहा था कि पुरुष मतदाताओं का अनुपात करीब 9 फीसदी तक ज्यादा होता था. इस बार यह अंतराल शून्य पर पहुंच गया है. चुनाव में महिलाओं ने बढ-चढ़कर हिस्सा लिया. महिलाएं में ज्यादा संख्या में चुनकर संसद पहुंचीं हैं. उन्होंने कहा कि कभी हमारी संख्या 2 थी. हमारा मजाक उड़ाया जाता था.

निराशाजनक वातावरण में विश्वास के बलबूते हमने पार्टी को खड़ा किया. हम हार पर कभी दुखी नहीं हुए. जब स्वयं पर भरोसा नहीं होता, सामर्थ्य का अभाव होता है. तब बहाने खोजे जाते हैं. ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा जाता है.

अखबारों की हेडलाइन और इवीएम का वार

राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा कि सुधार की एक निरंतर प्रक्रिया है. पहले का जमाना देख लीजिए क्या था ? चुनाव के बाद अखबारों की हेडलाइन में क्या नजर आता था?  इतनी हिंसा हुई, इतने लोग मारे गये और इतने बूथ कैप्चर किये गये. आज हेडलाइन होती है कि पहले की तुलना में मतदान कितना बढ़ा है. 1977 में ईवीएम की चर्चा हुई.

1982 में पहली बार इसका प्रयोग किया गया. 1988 में इसी सदन के महानुभावों ने कानूनन इस बात की स्वीकृति प्रदान की. कांग्रेस के नेतृत्व में ईवीएम को लेकर नियम बनाए गये. आप हर गए इसलिए रो रहे हो. ये क्या तरीका है ?  इस ईवीएम से अबतक विधानसभा के चुनाव हुए हैं अबतक 113, और यहां उपस्थित सभी दलों को उसी ईवीएम से जीतकर सत्ता में आने का मौका मिला.

चार लोकसभा के आम चुनाव हुए हैं. उसमें भी दल बदले हैं और आज हम पराजय के लिए कैसी बात कर रहे हैं. सारे परीक्षण के बाद ईवीएम पर सारी देश की न्यायपालिकाओं ने सही फैसला दिया है. चुनाव आयोग ने चुनौती दी थी. आज जो ईवीएम का यहां हल्ला कर रहे हैं. वह कोई गया नहीं. केवल दो दल गया एनसीपी और सीपीआई। बाकी लोग चुनाव आयोग के निमंत्रण के बाद भी नहीं गये.

पीएम मोदी ने किया बड़ा वार-जीत भी नहीं पचा पाती है कांग्रेस

राज्यसभा में पीएम मोदी ने ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर कहा कि उस हवा में हमारे लोग भी फंस गये थे. हम भी मानने लगे थे कि ईवीएम में गड़बड़ी है. हमने सारी चीजों को समझा…हमारी पार्टी में भी उस विचार को मानने वाले को समझाया गया कि वे गलत रास्ते पर चल रहे हैं.

2014 से मैं लगातार देख रहा हूं कि कांग्रेस पराजय को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं. मध्य प्रदेश में क्या हुआ ? अभी तो विजय हुई है. मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा वार करते हुए कहा कि जीत भी नहीं पचा पाती है कांग्रेस, हार भी स्वीकार करने का सामर्थ्य नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक देश, एक चुनाव के पक्ष में नहीं हैं. अरे चर्चा में तो भाग लीजिए.

हम आधार से भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं तो…

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि अगर साथ चुनाव होंगे तो रीजनल पार्टियां खत्म हो जाएंगी. जहां-जहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हुए वहां प्रादेशिक पार्टियों ने जीत दर्ज की है. देश के मतदाताओं को समझ है, इसलिए उनकी समझ पर शक करने का काम उचित नहीं.

हर प्रयास का स्वागत किया जाना चाहिए. लेकिन हम पहले ही दरवाजे बंद करें तो कभी बदलाव नहीं आता है. उन्होंने कहा कि इसी सदन में विद्वान लोग बैठे थे, उन्होंने कहा था कि हमारे देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन असंभव है. जब हम आधार से भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं तो वह गलत हो जाता है. हम महान भारत बनाना चाहते हैं तो तकनीक से कितना दूर रह सकते हैं.

हम चीजों से भागते रहेंगे….जीएसटी, ईवीएम, वीमैप हर चीज में उसका विरोध किया जा रहा है. इस सदन में जिन दलों का व्यवहार पिछले पांच साल में रुकावट डालने का रहा है, अड़ंगे डालने का रहा है, उन सबको देशवासियों ने सजा देने का काम किया है.

ओल्ड इंडिया या न्यू इंडिया

राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा कि मैं हैरान हूं कि अब न्यू इंडिया का विरोध किया जा रहा है. मैं यह समझ सकता हूं, कि इसमें 5 बातें सही और 5 बातें गलत है….और ने क्या किया, उसे छोड़ दीजिए…देश के लोगों को निराशा की ओर धकेलने का पाप न करें. हम आइडिया में सुधार करेंगे…लेकिन एकदम विरोध…ओल्ड इंडिया चाहिए क्या… जहां कैबिनेट के निर्णय को पत्रकारों के बीच फाड़ दिया जाए, वैसा ओल्ड इंडिया चाहिए, हमें वो ओल्ड इंडिया चाहिए जो जल, थल, नभ में घोटाले से परेशान रहे?, हमें वो ओल्ड इंडिया चाहिए जो टुकड़े गैंग को समर्थन करने पहुंच जाए ? पासपोर्ट के लिए महीनों तक इंतजार करना चाहिए, क्या हमें वो ओल्ड इंडिया चाहिए? इंटरव्यू के नाम पर करप्शन वाला इंडिया चाहिए ? उन्होंने कहा कि देश छोटी-छोटी चीजों से बदलता है. देश को छोटी चीजें चाहिए.

हम बड़े नहीं छोटों के बीच से यहां पहुंचे हैं. हमें उसी के लिए काम करने की जरूरत है. हमने पांच साल आम लोगों के काम को पूरा करने का प्रयास किया है. अब ये पांच साल आवश्यकताओं से ज्यादा इच्छाओं की पूर्ति का है. हम भाग्यवान हैं, जब देश का सामान्य लोग इच्छाओं के साथ है. इससे काम की गति बढ़ती है. इसलिए हम सबका दायित्व बढ़ता है.

झारखंड मॉब लिंचिंग का भी जिक्र

अभिभाषण के दौरान पीएम मोदी ने झारखंड मॉब लिंचिंग का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि झारखंड मॉब लिंचिंग का अड्डा बन गया है…क्या झारखंड राज्य को दोषी बता देना सही है? जो बुरा हुआ है उसे अलग करें…लेकिन सबको कठघरे में रखकर राजनीति तो कर लेंगे…इसलिए पूरे झारखंड को बदनाम करने का हक हमें नहीं है…वहां भी सज्जनों की भरमार है…न्याय हो, इसके लिए कानूनी व्यवस्था है. उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचारों को लाइए, हम सुनने के लिए तैयार हैं. हम वैसा नहीं है कि जहां बुद्धि बंट रही थी तो सबसे आगे थे कहें. हमें देश चलाना है, हम आपके विचार सुनने को तैयार हैं.

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