हेमंत सोरेन ने छठी जेपीएससी पर कब क्‍या कहा?

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Ranchi: झारखंड में जेपीएससी विवादों से भरा है. झारखंड के 20 सालों में अभी तक पांच जेपीएससी की परीक्षाएं हुई हैं. इसमें से एक भी जेपीएससी Exam विवादों से दूर नहीं है. कहने का मतलब सरकारी नौकरी देने वाली झारखंड की सबसे बड़ी संस्‍था झारखंड लोक सेवा आयोग में विवाद और भ्रष्‍टाचार का चोली दामन का साथ रहा है.

इसके खिलाफ जहां छात्र लंबे समय से आंदोलन करते रहे हैं, वहीं इसे मुद्दा बनाकर राजनीति भी खूब हुई. बावजूद इसके जेपीएससी की बीमारी दूर नहीं हुई और छात्र आज भी छठी जेपीएससी में गड़बडियों के खिलाफ लड़ रहे हैं.

इस बीच झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन का सियासी सफर बड़ा दिलचस्‍प रहा है. नेता प्रतिपक्ष से मुख्‍यमंत्री बनने के बीच जेपीएससी से बड़ा मुद्दा उनके लिए कुछ रहा ही नहीं है. इस दौरान उन्‍होंने कब क्‍या कहा, आइए दोहराते हैं-

23 जनवरी 2019 (झारखंड विधानसभा सत्र): विपक्ष के तौर पर हेमंत सोरेन ने जेपीएससी के मुद्दे को झारखंड विधानसभा में प्रमुखता से उठाया. उन्‍होंने 23 जनवरी 2019 को सदन में मामले को लेकर स्‍पीकर के साथ खूब बहस की थी.

हेमंत सोरेन ने कहा था कि सरकार मामले को यह कहकर नजरअंदाज नहीं कर सकती है कि कोर्ट में यह लंबित है. अगर कोर्ट में मामला लंबित है तो परीक्षा को भी रोका जाये.

28 जनवरी 2019: जेपीएससी मामले पर ही हेमंत सोरेन ने 28 जनवरी 2019 को हेमंत सोरेन ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी थी. उन्‍होंने तब कहा था कि जेपीएससी में आरक्षण की बात तो बाद की हो गई. अब इसमें भ्रष्‍टाचार की बू आ रही है. जिस तरह से भ्रष्‍टाचार में अधिकारियों की भूमिका देखी जा रही है और सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है. इससे उत्‍पन्‍न गंभीर विषयों पर सकार के पास कोई जवाब नहीं है.

लगता है कि इसमें बहुत बड़ा घपला है. सरकार के लोगों ने मिलकर इसमें बैकडोर एंट्री करने का रास्‍ता बनाया है. बड़े पैमाने पर इसमें पैसों का लेन-देन है. बहुत दूर तक ये बात जाएगी. उन्‍होंने कहा था कि मुझे लगता है कि सरकार जेपीएससी मामले में बुरी तरह से घिरने जा रही है.

4 फरवरी 2019: झारखंड मुक्ति मोर्चा के स्‍थापना दिवस के मौके पर हेमंत सोरेन ने मौजूदा भाजपा सरकार को जेपीएससी मुद्दे पर खूब कोसा था. उन्‍होंने तब अपने भाषण में कहा था कि परसो जेपीएससी का एग्‍जाम हुआ. ये जेपीएससी का एग्‍जाम उदाहरण बनेगा. इस देश में पहला उदाहरण बनेगा कि जेपीएससी के सवा तीन सौ-साढ़े तीन सौ सीटों के लिए 34 हजार लोग मेंस में एग्‍जाम दिये हैं.

उन्‍होंने कहा कि ऐसे-ऐसे लोगों ने एग्‍जाम दिये हैं जिन्‍होंने फॉर्म भी नहीं भरा. उसका भी एग्‍जाम हो गया. जो पीटी में फेल हो गया उसका भी एग्‍जाम हो गया. कुल मिलाकर यहां के नौजवानों के साथ फिर से खिलवाड़ किया गया.

हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा था कि मुझे पक्‍का पता है कि उसमें 50-60 लोग बैक डोर से घुसने का काम कर रहे हैं. या तो पदाधिकारी के रिश्‍तेदार हैं या फिर मौजूदा सरकार के मंत्री-विधायक के बेटे-बेटियां हैं. बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन हो रहा है. करोड़ों रुपयों में सीट का सौदा किया जा रहा है. हमारे यहां के मूलवासी-आदिवासी करोड़ों रुपया कहां से लाएंगे.

12 फरवरी 2020: हेमंत सोरेन अब प्रतिपक्ष के नेता नहीं है, वह चुनाव जीतकर एक मजबूत स्थिर सरकार के मुख्‍यमंत्री बन चुके हैं. झारखंड बजट सत्र के दौरान 12 फरवरी को उन्‍होंने सीएम बनने के बाद पहली बार जेपीएससी मामले पर सदन में अपनी बात कही.

हेमंत सोरेन ने विधायक विनोद सिंह के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यह बातें हमारे संज्ञान में भी है. उन्‍होंने कहा कि जेपीएससी एक स्‍वतंत्र एजेंसी है. संवैधानिक संस्‍था है. कमोबेश स्‍पष्‍ट होना चाहिए कि उसके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत सरकार का हस्‍तक्षेप नहीं होना चाहिए. उसकी वह प्रक्रिया है. अभी उसकी प्रक्रिया चल रही है.

हेमंत सोरेन ने कहा कि मुझे लगता है कि समय-समय पर सरकार के हस्‍तक्षेप की वजह से भी कई चीजें खराब हुईं. कभी 15 प्रतिशत, कभी 36 प्रतिशत, कभी 5 प्रतिशत रिजल्‍ट का जो प्रकाशन हुआ. मुझे लगता है सरकार ने भी अपने दायरे को भी नहीं समझा और जेपीएससी संस्‍था ने भी अपने दायरे को नहीं समझा. और नतीजो जो परीक्षा दिये वह सफर करते रहे. कई लोग कोर्ट में भी गए हैं.

हेमंत सोरेन ने विधानसभा में कहा कि राज्‍य के मुख्‍यमंत्री के रूप में लोगों की कई आशाएं हैं मुझसे. कई बच्‍चे हमारे पास आते हैं कि हमने जेपीएससी का परीक्षा दिया है इसमें हमें पास करा दीजिए. उन्‍होंने कहा कि मैं सुबह सोकर उठता हूं तो रोज ईश्‍वर से प्रार्थना करता हूं कि मेरे घर में कोई जेपीएससी पास नहीं करे. नहीं तो बोलेंगे कि यह मुख्‍यमंत्री ने ही कराया है. जेपीएससी को लेकर इतनी अविश्‍वास हो चुकी है.

मुख्‍यमंत्री ने सदन में बताया कि सिर्फ जेपीएससी ही नहीं जेएसएससी के निवमावली की भी अवलोकन होगी. उसके बाद ही बिल्‍कुल पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं होंगी. अभी छठी जेपीएससी की परीक्षा हो रही है. रिजल्‍ट होने दीजिए. उसके मेरिट के आधार पर कई चीजों की आंकलन होगी. इसके बाद ही सरकार आगे निर्णय लेगी.

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