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क्‍या छलावा होते हैं चुनाव के पहले गठबंधन की ऐसी तस्‍वीरें

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2019 लोकसभा चुनाव के होने वाले हैं. सोशल मीडिया में कई तरह की तस्‍वीरें वायरल हो रही हैं. कुछ तो ट्रिेकी होती हैं, जो कंप्‍यूटर व मोबाइल के सॉफ्टवेयर के जरिये बनाई जाती हैं. व्‍यंग्‍य व मजाकियां लहजे में यह तस्‍वीरें किसी न किसी रूप में परदे के पीछे की सच्‍चाई बताते हैं.

वहीं कुछ ऐसी राजनीतिक गलियारों की तस्‍वीरें होती हैं. जो मीडिया के लिए खास पोज देकर तैयार होते हैं. इसमें न कोई ट्रिक होता है और न किसी सॉफ्टवेयर का इस्‍तेमाल होता है. यह खांटी ऑरिजनल होता है. लेकिन इन तस्‍वीरों के पीछे की असल बात लोगों को नहीं दिखती है.

चुनाव का समय है. राजनीतिक गलियारों से ऐसी ही ऑरिजनल तस्‍वीरें सामने आना शुरू हो गये हैं. झारखंड के विपक्षी महागठबंधन की ओर से शनिवार देर रात एक तस्‍वीर साझा की गयी, जिसमें कांग्रेस, झामुमो और जेवीएम के नेता दिखे. जवाब में 2019 लोकसभा चुनाव के पहले बीजेपी और आजसू ने गठबंधन की घोषणा करते हुए साथ अपनी पोज वाली तस्‍वीरें मीडिया के सामने खींचवायी.

झारखंड में दो बड़े गठबंधन की तस्‍वीरें लोगों के बीच वायरल हैं. कुमार गौरव ने अपनी फेसबुक पोस्‍ट पर साझा किया है और लिखा है ‘कंफ्यूज हूं’. पूरा पढिये गौरव के फेसबुक वाल से.

Kumar Gaurav

एकता में बल है. बचपन में ही पढ़ा था. थोड़ा बड़ा हुआ इसके मायने को समझा. पर सब धोखा था. एकता में बल के सही मायने इस तस्वीर से समझ पा रहा हूं. देश की राजनीतिक पार्टियों ने चैकीदारी और देश में हो रही चोरी को दूर करने के लिए एकता में बल को चरितार्थ करते नजर आ रहे हैं.

एकजुटता दिखाने के लिए जोड़-तोड़ का प्रयोग

एक सच ये भी है कि इस एकजूटता को दिखाने के लिए बहुत ही ज्यादा जोड़-तोड़ का प्रयोग किया गया है. इस एकता के पीछे की वजह को देश गढ़ने की सोच माना जा सकता है. पर इसे मान लेना धोखा हो सकता है. ये तस्वीर महज एक तस्वीर है, जो जनता को बेवकूफ बनाने के लिए, अखबारों और टेलीविजन पर दिखाने के लिए ही है. अब हम तस्वीर के पीछे की असल बात पर आते हैं.

नरेंद्र मोदी को फिर से PM बनाने की मुहिम से जुड़ी आजसू पार्टी

लोकसभा चुनाव को देखते हुए राज्य में अब पार्टियां नहीं गठबंधन चुनाव लड़ रहा है. एक ओर तो महागठबंधन है. महागठबंधन का ये समीकरण पिछले साल से ही रुप ले रहा था, काफी जोड़-तोड़ पर एक के बल वाले कहानी कि एक-एक लकड़ी को समेटकर यूपीए नामक रस्सी से किसी तरह बांधकर एक किया गया है.

प्रधानमंत्री मजबूत करने के चक्‍कर में खोखला सांसद न चुन लें

एनडीए के सबसे बड़े दल भाजपा के दिन अभी अच्छे हैं भले हमारे और देश की जनता के अच्छे दिन नहीं आएं हों. इस गठबंधन का एक दल है आजसू. सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर हल्ला बोलती है. पर एनर्जी देने वाले केले की पूरी विटामिन कमल फिर से खिलने के संभावना के आगे गड़बड़ा गया है.वह भी महज एक सीट के लिए.

गठबंधन और एकता की ये जो दो तस्वीरें हैं. ये देश की तकदीर बदलने के लिए है. हो सकता है कि ये लाईन सही हो. पर, मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता. चुनाव दो तरीके का हो सकते हैं. एक प्रधानमंत्री चुनने के लिए और दूसरा सांसद चुनने के लिए. पर ग्रामीण इलाकों में जाकर पता करने पर पता चलेगा कि उन्होने अपने सांसद को सिर्फ अखबारों और तस्वीरों में ही देखा है. प्रधानमंत्री मजबूत करने क चक्कर में हम कहीं अंदर से खोखला सांसद न चुन लें, यह भी ध्यान रखना पड़ेगा.

फिलहाल कंफ्यूज हूं…

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